7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

सभोपदेशक 8

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बुद्धिमान राजा था। लोग उसके पास सलाह लेने आते थे। सभोपदेशक कहता है, "बुद्धिमान के तुल्य कौन है?" बुद्धिमान का चेहरा चमकता है, उसकी बातें कठोर नहीं रहतीं। फिर सभोपदेशक एक सलाह देता है। वह कहता है कि राजा की आज्ञा मानो, क्योंकि राजा के वचन में सामर्थ्य होती है। कोई भी राजा के सामने उतावली से नहीं लौट सकता।

पर सभोपदेशक केवल राजाओं की बात नहीं कर रहा। वह जीवन की एक बड़ी पहेली देख रहा है। हर काम का एक समय होता है, पर कोई भी मनुष्य यह नहीं जानता कि आगे क्या होगा। कोई भी अपने प्राण को रोक नहीं सकता जब मृत्यु का दिन आता है। कोई योद्धा युद्ध से भाग नहीं सकता। यह बहुत गंभीर बात है, पर सच है।

फिर सभोपदेशक कुछ अजीब देखता है। उसने दुष्ट लोगों को देखा जो पवित्रस्थान में जाते थे, पर मर जाने पर उनका नाम भी भुला दिया गया। उसने यह भी देखा कि बुरे काम की सज़ा तुरंत नहीं मिलती। इसलिए कुछ लोग सोचते हैं, "मैं फिर बुरा काम करूँगा, कुछ नहीं होगा।" यह सभोपदेशक को दुखी करता है। उसने ऐसे धर्मी लोग भी देखे जिनके साथ बुरा हुआ, और ऐसे दुष्ट लोग देखे जिनके साथ अच्छा हुआ। क्या अजीब बात है!

पर फिर सभोपदेशक एक बात पर टिक जाता है। वह कहता है, "मुझे निश्चय है कि जो परमेश्वर से डरते हैं… उनका भला ही होगा।" भले ही अभी सब उलटा दिखे, परमेश्वर से डरने वालों का अंत अच्छा होगा। दुष्ट का भला स्थायी नहीं रहेगा।

अंत में सभोपदेशक कहता है कि परमेश्वर के काम बहुत गहरे हैं। चाहे मनुष्य कितनी भी मेहनत करे, वह परमेश्वर के सब काम की थाह नहीं पा सकता।

इसका अर्थ क्या है?

सोचो, क्या तुमने कभी ऐसा देखा कि किसी ने कुछ गलत किया और उसे सजा नहीं मिली? यह अजीब लगता है, है ना? सभोपदेशक को भी यह अजीब लगा। पर वह एक बात नहीं भूलता, परमेश्वर सब कुछ देख रहे हैं। जैसे राजा के वचन में सामर्थ्य होती है, वैसे ही परमेश्वर का वचन सबसे ऊपर है। परमेश्वर से डरने वाले, यानी उन्हें आदर और प्रेम से मानने वाले, अंत में सुरक्षित रहेंगे। भले अभी इंतज़ार करना पड़े।

सामूहिक सूत्र

परमेश्वर का समय हमेशा हमारी समझ से बड़ा होता है। सभोपदेशक इसे पूरी तरह नहीं समझ पाया, पर हमें यीशु मसीह में इसका उत्तर मिलता है। यीशु ने दुष्टता को अपने ऊपर सहा, सूली पर मरे, फिर जी उठे। इससे पता चलता है कि परमेश्वर बुराई को हमेशा के लिए नहीं छोड़ते। जो उनसे डरते हैं, जो उन्हें प्रेम करते हैं, उनके लिए एक दिन सब ठीक हो जाएगा, क्योंकि यीशु ने मृत्यु को भी हरा दिया।

तुम्हारे लिए

कभी तुम्हें लगे कि कोई बेईमानी करके भी जीत गया, तो याद रखना, कहानी अभी पूरी नहीं हुई। तुम सच्चाई से चलो, भले ही कुछ समय लगे। परमेश्वर से डरना यानी उन्हें अपने जीवन में सबसे ऊपर रखना। आज किसी के साथ ईमानदारी से पेश आओ, भले ही कोई देख न रहा हो। परमेश्वर देख रहे हैं।

बात करें

अगर किसी ने गलत काम किया और उसे तुरंत सजा न मिले, तो तुम क्या सोचोगे?

परमेश्वर से डरने का मतलब क्या है, अपने शब्दों में बताओ।

एक साथ प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, कभी-कभी जीवन में सब कुछ उल्टा लगता है। हमें याद दिलाइए कि आप सब कुछ देखते हैं और आप पर भरोसा रखा जा सकता है। हमें सच्चाई से चलने की शक्ति दीजिए, आमीन।

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सभोपदेशक 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

सभोपदेशक 8 किस विषय में है?
एक बुद्धिमान राजा था। लोग उसके पास सलाह लेने आते थे। सभोपदेशक कहता है, "बुद्धिमान के तुल्य कौन है?" बुद्धिमान का चेहरा चमकता है, उसकी बातें कठोर नहीं रहतीं। फिर सभोपदेशक एक सलाह देता है। वह कहता है कि राजा की आज्ञा मानो, क्योंकि राजा के वचन में सामर्थ्य होती है। कोई भी राजा के सामने उतावली से नहीं लौट सकता।
सभोपदेशक 8 क्या कहता है?
फिर सभोपदेशक कुछ अजीब देखता है। उसने दुष्ट लोगों को देखा जो पवित्रस्थान में जाते थे, पर मर जाने पर उनका नाम भी भुला दिया गया। उसने यह भी देखा कि बुरे काम की सज़ा तुरंत नहीं मिलती। इसलिए कुछ लोग सोचते हैं, "मैं फिर बुरा काम करूँगा, कुछ नहीं होगा।" यह सभोपदेशक को दुखी करता है। उसने ऐसे धर्मी लोग भी देखे जिनके साथ बुरा हुआ, और ऐसे दुष्ट लोग देखे जिनके साथ अच्छा हुआ। क्या अजीब बात है!
सभोपदेशक 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अंत में सभोपदेशक कहता है कि परमेश्वर के काम बहुत गहरे हैं। चाहे मनुष्य कितनी भी मेहनत करे, वह परमेश्वर के सब काम की थाह नहीं पा सकता।
बच्चे सभोपदेशक 8 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर का समय हमेशा हमारी समझ से बड़ा होता है। सभोपदेशक इसे पूरी तरह नहीं समझ पाया, पर हमें यीशु मसीह में इसका उत्तर मिलता है। यीशु ने दुष्टता को अपने ऊपर सहा, सूली पर मरे, फिर जी उठे। इससे पता चलता है कि परमेश्वर बुराई को हमेशा के लिए नहीं छोड़ते। जो उनसे डरते हैं, जो उन्हें प्रेम करते हैं, उनके लिए एक दिन सब ठीक हो जाएगा, क्योंकि यीशु ने मृत्यु को भी हरा दिया।
सभोपदेशक 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर किसी ने गलत काम किया और उसे तुरंत सजा न मिले, तो तुम क्या सोचोगे?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

राजा के सम्मुख से लौट जाने में उतावली न कर, और न किसी बुरी बात पर हठ कर।" गुस्से में दरवाज़ा पटककर निकल जाना आसान लगता है, पर सुलैमान कहता है, ठहर जा। कई बार हमारी उतावली हमें उस जगह से बाहर ले जाती है जहाँ परमेश्वर ने हमें रखा था। और हठ? वह बुरी बात को सही नहीं बनाता, बस हमें उससे बाँध देता है। आज तू कहाँ जल्दबाज़ी कर रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

सुलैमान कहता है, "मनुष्य पर अधिकार करके दूसरे मनुष्य की हानि करता है।" उसने यह सब देखा, ध्यान लगाकर देखा। सत्ता हाथ में आते ही इंसान अक्सर दूसरे को दबाने लगता है। शायद तुम्हारे ऊपर भी कोई ऐसा है, या शायद तुम्हारे हाथ में थोड़ा अधिकार है, घर में, दफ़्तर में, कलीसिया में। रुककर पूछो, मैं इसका उपयोग किसकी भलाई के लिए कर रहा हूँ?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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