7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

हाग्गै 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

लगभग ढाई हज़ार साल पहले की बात है। इस्राएल के लोग बहुत सालों तक बाबेल देश में बंदी बनकर रहे थे। फिर परमेश्वर ने उन्हें वापस अपने देश यहूदा में आने दिया। उनके पास एक बड़ा काम था: यरूशलेम में परमेश्वर का भवन, यानी मंदिर, फिर से बनाना। शुरू में उन्होंने काम शुरू किया, लेकिन फिर रुक गया। साल बीतते गए। लोग अपने-अपने घरों में बस गए, अपनी खेती में लग गए, और मंदिर वैसा ही खंडहर पड़ा रहा।

तब परमेश्वर ने हाग्गै नाम के भविष्यद्वक्ता को भेजा। हाग्गै ने राज्यपाल जरुब्बाबेल और महायाजक यहोशू के पास जाकर परमेश्वर का संदेश सुनाया। संदेश तीखा था: "लोग कहते हैं कि यहोवा का भवन बनाने का समय नहीं आया है।" लेकिन देखो, वही लोग अपने लिए सुंदर छत वाले घर बना रहे हैं। परमेश्वर का घर टूटा पड़ा है, और उनके अपने घर सज-धज कर तैयार हैं।

फिर परमेश्वर ने एक अजीब बात कही: "अपने चाल-चलन पर सोचो।" उन्होंने कहा, तुम बहुत बीज बोते हो, पर फसल कम होती है। तुम खाते हो, पर पेट नहीं भरता। तुम पीते हो, पर प्यास बनी रहती है। तुम कपड़े पहनते हो, पर ठंड नहीं जाती। और जो मज़दूरी कमाते हो, वह मानो छेद वाली थैली में रखते हो, सब निकल जाता है।

परमेश्वर ने बताया कि यह सब क्यों हो रहा है। उनका भवन उजाड़ पड़ा है, और हर कोई सिर्फ अपने घर की चिंता कर रहा है। इसलिए आकाश से ओस नहीं गिरती, ज़मीन से अन्न ठीक से नहीं उगता।

और अब सुनो कैसा सुंदर हुआ। जरुब्बाबेल, यहोशू और सारे लोगों ने परमेश्वर की बात मान ली। उन्होंने परमेश्वर का भय माना। तब हाग्गै ने एक छोटा-सा पर बहुत बड़ा वचन कहा: "मैं तुम्हारे संग हूँ।" परमेश्वर ने उनके मन उभारे, और लगभग तेईस दिनों के भीतर वे मंदिर बनाने के काम में लग गए।

What Does This Mean?

यह कहानी एक बड़ा सवाल पूछती है: तुम्हारे जीवन में सबसे पहले क्या आता है? इस्राएलियों के लिए परमेश्वर पहले होने चाहिए थे, लेकिन वे खुद पहले हो गए थे। वे बुरे इंसान नहीं थे। वे बस भूल गए थे कि उनका असली घर, उनकी असली पहचान, परमेश्वर से जुड़ी है।

परमेश्वर ने उन्हें भूख या प्यास से सज़ा देने के लिए यह नहीं किया। यह ज़्यादा पिता जैसा था। जब कोई बच्चा कुछ ज़रूरी भूल रहा हो, तो पिता उसे हिलाकर जगाता है। "छेद वाली थैली" वाली बात याद रखो। जब परमेश्वर हमारे जीवन में केंद्र में नहीं होते, तब बहुत कुछ पाकर भी हमें लगता है, कुछ छूट रहा है।

और सबसे सुंदर बात यह है कि जब लोगों ने सुना, तो परमेश्वर ने डांटा नहीं। उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारे संग हूँ।"

The Common Thread

"मैं तुम्हारे संग हूँ।" यह वचन बाइबल में बार-बार आता है। परमेश्वर ने यह मूसा से कहा, यहोशू से कहा, और यहाँ हाग्गै के द्वारा फिर कहा। और बहुत सालों बाद, जब प्रभु यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आए, तो उनका एक नाम था "इम्मानुएल" जिसका मतलब है "परमेश्वर हमारे संग।"

स्वर्ग पर लौटने से पहले प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूँ।" वही वचन जो हाग्गै के दिनों में लोगों को हिम्मत देता था, आज हमें भी दिया गया है।

और सोचो, इस्राएलियों ने पत्थर और लकड़ी से मंदिर बनाया। पर आज परमेश्वर पत्थर के मंदिर में नहीं रहते। पवित्र आत्मा उन सब लोगों में रहते हैं जो प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं। तुम खुद परमेश्वर का भवन हो।

For You

तुम शायद सोचो, मैं तो बच्चा हूँ, मेरे पास अपने पैसे भी नहीं, मंदिर बनाने की बात मेरे लिए कैसी? पर सवाल यही है: तुम्हारे दिल में परमेश्वर की जगह कहाँ है?

एक ईमानदार सवाल पूछो। जब तुम्हारे पास खाली समय हो, तुम सबसे पहले क्या करते हो? मोबाइल? खेल? या कभी-कभी बाइबल भी, प्रार्थना भी? अगर हर चीज़ के लिए वक़्त है, पर परमेश्वर के लिए "बाद में" है, तो शायद हाग्गै तुमसे भी बात कर रहा है।

और अच्छी खबर यह है: जब तुम परमेश्वर को पहला स्थान देना शुरू करते हो, वे नाराज़ नहीं होते। वे कहते हैं, "मैं तुम्हारे संग हूँ।" यही उनका वादा है।

Talk About It

अगर परमेश्वर आज तुमसे कहें, "अपने चाल-चलन पर सोचो," तो तुम्हारे जीवन में कौन-सी बात होगी जिसके बारे में तुम्हें सोचना पड़ेगा?

"मैं तुम्हारे संग हूँ" यह वचन इस्राएलियों को हिम्मत देता था। तुम्हें कब ऐसा लगता है कि तुम्हें यह वचन सुनने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, कई बार हम आपको भूल जाते हैं और अपनी ही चीज़ों में लग जाते हैं। हमें माफ़ कीजिए। हमारे दिल को जगाइए, जैसे आपने हाग्गै के दिनों में लोगों के मन उभारे थे। धन्यवाद कि प्रभु यीशु के द्वारा आप हमारे संग हैं, हर दिन, हर जगह। हमें सिखाइए कि हम आपको पहला स्थान देना सीखें। आमीन।

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हाग्गै 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

हाग्गै 1 किस विषय में है?
लगभग ढाई हज़ार साल पहले की बात है। इस्राएल के लोग बहुत सालों तक बाबेल देश में बंदी बनकर रहे थे। फिर परमेश्वर ने उन्हें वापस अपने देश यहूदा में आने दिया। उनके पास एक बड़ा काम था: यरूशलेम में परमेश्वर का भवन, यानी मंदिर, फिर से बनाना। शुरू में उन्होंने काम शुरू किया, लेकिन फिर रुक गया। साल बीतते गए। लोग अपने-अपने घरों में बस गए, अपनी खेती में लग गए, और मंदिर वैसा ही खंडहर पड़ा रहा।
हाग्गै 1 क्या कहता है?
और अब सुनो कैसा सुंदर हुआ। जरुब्बाबेल, यहोशू और सारे लोगों ने परमेश्वर की बात मान ली। उन्होंने परमेश्वर का भय माना। तब हाग्गै ने एक छोटा-सा पर बहुत बड़ा वचन कहा: "मैं तुम्हारे संग हूँ।" परमेश्वर ने उनके मन उभारे, और लगभग तेईस दिनों के भीतर वे मंदिर बनाने के काम में लग गए।
हाग्गै 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
"मैं तुम्हारे संग हूँ।" यह वचन बाइबल में बार-बार आता है। परमेश्वर ने यह मूसा से कहा, यहोशू से कहा, और यहाँ हाग्गै के द्वारा फिर कहा। और बहुत सालों बाद, जब प्रभु यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आए, तो उनका एक नाम था "इम्मानुएल" जिसका मतलब है "परमेश्वर हमारे संग।"
बच्चे हाग्गै 1 से क्या सीख सकते हैं?
एक ईमानदार सवाल पूछो। जब तुम्हारे पास खाली समय हो, तुम सबसे पहले क्या करते हो? मोबाइल? खेल? या कभी-कभी बाइबल भी, प्रार्थना भी? अगर हर चीज़ के लिए वक़्त है, पर परमेश्वर के लिए "बाद में" है, तो शायद हाग्गै तुमसे भी बात कर रहा है।
हाग्गै 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, कई बार हम आपको भूल जाते हैं और अपनी ही चीज़ों में लग जाते हैं। हमें माफ़ कीजिए। हमारे दिल को जगाइए, जैसे आपने हाग्गै के दिनों में लोगों के मन उभारे थे। धन्यवाद कि प्रभु यीशु के द्वारा आप हमारे संग हैं, हर दिन, हर जगह। हमें सिखाइए कि हम आपको पहला स्थान देना सीखें। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

इसी कारण आकाश ने ओस बरसाना और पृथ्वी ने अपनी उपज देना छोड़ दिया।" लोग मेहनत तो कर रहे थे, पर बटुए में छेद था। सूखा बाहर नहीं, भीतर शुरू हुआ था, जब परमेश्वर का भवन उजाड़ पड़ा रहा और हर कोई अपने घर को सजाने दौड़ा। तेरे जीवन में भी कुछ सूख गया है? शायद सवाल यह नहीं कि तू कितना दौड़ा, बल्कि किसके लिए।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

तुम ने बहुत उपज की आशा रखी, परन्तु देखो थोड़ी ही है," यहोवा कहता है, और फिर कारण बताता है: "मेरा भवन जो उजाड़ पड़ा है, और तुम में से प्रत्येक अपने अपने घर को दौड़ा चला जाता है।"

दौड़ना शब्द पर ठहर जा। लोग आलसी नहीं थे, वे भागे जा रहे थे, बस अपने ही घर की ओर। कभी कभी हमारी थकान इसी की गवाही देती है कि हम किसके लिए दौड़ रहे हैं। तेरी सबसे तेज़ दौड़ आज किस दिशा में है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

यह दारा राजा के दूसरे वर्ष के छठवें महीने के चौबीसवें दिन को हुआ।" पहला संदेश उसी महीने के पहले दिन आया था। यानी तेईस दिन बीत गए, फिर काम शुरू हुआ। परमेश्वर ने देर को नहीं, शुरुआत के दिन को दर्ज किया। तेरी टली हुई आज्ञाकारिता का हिसाब वह नहीं रखता, पर जिस दिन तू उठेगा, वह दिन उसकी किताब में लिखा जाएगा। वह दिन आज भी हो सकता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

परमेश्वर ने सोना या चाँदी नहीं माँगा। उसने कहा, "पहाड़ पर चढ़ो, और लकड़ी ले आओ, और इस भवन को बनाओ।" बस लकड़ी, और चढ़ने की मेहनत। लोग अपने घरों के लिए तो चढ़ते रहे थे, परमेश्वर के काम के लिए थक जाते थे। सोच, तेरी थकान आज किसके लिए बह रही है? जिस काम में तू जुटा है, क्या उसमें उसकी महिमा है?

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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