7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 कुरिन्थियों 5

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पौलुस एक तम्बू की बात से शुरू करते हैं। तम्बू ऐसा घर है जो चलते-फिरते लोग लगाते हैं, और फिर उखाड़ लेते हैं। पौलुस कहते हैं कि हमारा शरीर भी ऐसा ही है, "पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर।" वह एक दिन गिर जाएगा। यह डरावनी बात लग सकती है, पर पौलुस आगे कहते हैं कि परमेश्वर की ओर से स्वर्ग में एक भवन तैयार है, जो हाथों से नहीं बना और जो कभी खत्म नहीं होगा।

फिर वे एक अजीब सा शब्द इस्तेमाल करते हैं: कराहना। जैसे कोई भारी बस्ता उठाकर चल रहा हो और साँस फूल रही हो। पौलुस कहते हैं कि हम कराहते हैं, क्योंकि हम अपना स्वर्गीय घर पहन लेना चाहते हैं। ध्यान दें, वे यह नहीं कहते कि हम इस शरीर को उतार फेंकना चाहते हैं। वे कहते हैं: "हम उतारना नहीं, वरन् और पहनना चाहते हैं।" यानी मरना उनका सपना नहीं है, बल्कि पूरा जीवन पा लेना उनका सपना है, ऐसा जीवन जिसमें मरने वाली हर चीज़ जीवन में डूब जाए।

और यह कोरी उम्मीद नहीं है। परमेश्वर ने बयाना दिया है, यानी पहली किश्त, एक पक्का इशारा कि बाकी भी ज़रूर आएगा। वह बयाना है पवित्र आत्मा।

इसलिए पौलुस हिम्मत नहीं हारते। वे कहते हैं: "हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।" वे अभी प्रभु को आँखों से नहीं देखते, फिर भी उन पर भरोसा करते हैं। उनकी सबसे बड़ी इच्छा यह है कि वे परमेश्वर को भाएँ, यानी परमेश्वर को उनका जीना अच्छा लगे। क्यों? क्योंकि एक दिन हम सब मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाएँगे। सब कुछ सामने आ जाएगा।

पर पौलुस को जो चीज़ सबसे ज़्यादा आगे धकेलती है, वह डर नहीं है। वे लिखते हैं: "मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है।" एक व्यक्ति सब के लिये मरा। इसलिए अब कोई अपने लिए नहीं जीता, बल्कि उसके लिए जो मरा और फिर जी उठा।

और तब पौलुस वह वाक्य लिखते हैं जो कई मसीही लोगों को ज़ुबानी याद है: "यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।" परमेश्वर ने मसीह के द्वारा हमारा अपने साथ मेल मिलाप कर लिया, यानी जो दूरी और झगड़ा था, वह उन्होंने खुद खत्म किया। और लोगों के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया। यह काम अब पौलुस को सौंपा गया है, इसलिए वे कहते हैं: हम मसीह के राजदूत हैं। राजदूत वह होता है जो किसी राजा की ओर से बोलता है।

अध्याय का आखिरी वाक्य सबसे गहरा है: यीशु, जो पाप से अनजान थे, उन्हें परमेश्वर ने हमारे लिए पाप ठहराया, ताकि हम उनमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।

What Does This Mean?

इसका मतलब है कि मसीही उम्मीद हवा में बनी कहानी नहीं है। पौलुस मुश्किलों को छिपाते नहीं। वे मानते हैं कि जीवन में बोझ है, थकान है, कराहना है। पर वे कहते हैं कि यह सब अंत नहीं है।

और मेल मिलाप की पहल हमने नहीं की। हमने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे परमेश्वर हमसे राज़ी हो जाएँ। "सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं।" वे आगे बढ़े, उन्होंने रास्ता खोला, और फिर हमें बुलाया।

The Common Thread

पूरी बाइबल में परमेश्वर ऐसे लोगों के पास आते हैं जो उनसे दूर भाग गए हैं। यहाँ हम देखते हैं कि यह कैसे मुमकिन हुआ। पद 21 में एक अदल-बदल होती है: यीशु ने वह जगह ली जो हमारी थी, और हमें वह जगह मिली जो उनकी थी। जो पाप से अनजान थे, वे पाप ठहराए गए। और हम, जो सचमुच गलत करते हैं, परमेश्वर के सामने सही ठहरते हैं। यह हमें उलझन में डाल सकता है, और सच कहूँ तो यह रहस्य पूरी तरह समझ में आता भी नहीं। पर क्रूस पर यही हुआ।

For You

तुम्हें कभी लगता है कि तुम्हारे बारे में लोगों की राय पक्की हो गई है? "यह तो हमेशा झगड़ा करता है।" "यह तो कभी नहीं सुधरेगा।" पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर लोगों को उनके बाहरी रूप से नहीं आँकते। और जो मसीह में है, वह नई सृष्टि है। नई शुरुआत असली है।

दूसरी बात: राजदूत होना। तुम्हारी कक्षा में कोई ऐसा है जिसके साथ कोई नहीं बैठता? मसीह की ओर से एक बार जाकर उसके पास बैठ जाना, यह छोटा काम नहीं है। वहाँ तुम राजा की ओर से बोल रहे हो।

Talk About It

पौलुस कहते हैं कि हम "विश्वास से चलते हैं," आँखों से देखकर नहीं। तुम्हें किस बात पर भरोसा करना सबसे कठिन लगता है, जबकि तुम उसे देख नहीं सकते?

अगर तुम मसीह के राजदूत हो, तो इस हफ्ते तुम किसे और कैसे दिखा सकते हो कि परमेश्वर उससे मेल मिलाप चाहते हैं?

Praying Together

प्रभु यीशु, आपने वह जगह ली जो हमारी थी। हम इसे पूरी तरह समझ नहीं पाते, पर हम धन्यवाद देते हैं। जब हम थक जाएँ या बोझ महसूस करें, तो हमें याद दिलाइए कि आपने हमारे लिए एक घर तैयार किया है। और हमें हिम्मत दीजिए कि हम आपकी ओर से बोलें। आमीन।

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2 कुरिन्थियों 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 कुरिन्थियों 5 किस विषय में है?
पौलुस एक तम्बू की बात से शुरू करते हैं। तम्बू ऐसा घर है जो चलते-फिरते लोग लगाते हैं, और फिर उखाड़ लेते हैं। पौलुस कहते हैं कि हमारा शरीर भी ऐसा ही है, "पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर।" वह एक दिन गिर जाएगा। यह डरावनी बात लग सकती है, पर पौलुस आगे कहते हैं कि परमेश्वर की ओर से स्वर्ग में एक भवन तैयार है, जो हाथों से नहीं बना और जो कभी खत्म नहीं होगा।
2 कुरिन्थियों 5 क्या कहता है?
इसलिए पौलुस हिम्मत नहीं हारते। वे कहते हैं: "हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।" वे अभी प्रभु को आँखों से नहीं देखते, फिर भी उन पर भरोसा करते हैं। उनकी सबसे बड़ी इच्छा यह है कि वे परमेश्वर को भाएँ, यानी परमेश्वर को उनका जीना अच्छा लगे। क्यों? क्योंकि एक दिन हम सब मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाएँगे। सब कुछ सामने आ जाएगा।
2 कुरिन्थियों 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अध्याय का आखिरी वाक्य सबसे गहरा है: यीशु, जो पाप से अनजान थे, उन्हें परमेश्वर ने हमारे लिए पाप ठहराया, ताकि हम उनमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।
बच्चे 2 कुरिन्थियों 5 से क्या सीख सकते हैं?
पूरी बाइबल में परमेश्वर ऐसे लोगों के पास आते हैं जो उनसे दूर भाग गए हैं। यहाँ हम देखते हैं कि यह कैसे मुमकिन हुआ। पद 21 में एक अदल-बदल होती है: यीशु ने वह जगह ली जो हमारी थी, और हमें वह जगह मिली जो उनकी थी। जो पाप से अनजान थे, वे पाप ठहराए गए। और हम, जो सचमुच गलत करते हैं, परमेश्वर के सामने सही ठहरते हैं। यह हमें उलझन में डाल सकता है, और सच कहूँ तो यह रहस्य पूरी तरह समझ में आता भी नहीं। पर क्रूस पर यही हुआ।
2 कुरिन्थियों 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पौलुस कहते हैं कि हम "विश्वास से चलते हैं," आँखों से देखकर नहीं। तुम्हें किस बात पर भरोसा करना सबसे कठिन लगता है, जबकि तुम उसे देख नहीं सकते?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

पौलुस यह बात वहाँ कहता है जहाँ वह समझा रहा है कि अब वह किसी को शरीर के अनुसार नहीं पहचानता। "इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, सब बातें नई हो गई हैं।" ध्यान दे, यह कल की आशा नहीं, बीता हुआ काम है। तो जिस इंसान को तू आज तक उसके पुराने रूप में देखता आया है, क्या तू उसे नई सृष्टि मान पाएगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस कहता है, "यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं।" कुरिन्थ के लोग उस पर हँसते थे कि वह जुनूनी है, पागल है। पौलुस बचाव नहीं करता, बस इतना कहता है कि उसकी दीवानगी परमेश्वर के सामने है, और उसकी समझदारी उनकी भलाई के लिए।

सोचो, क्या तुम्हारा प्रेम भी ऐसा है? जो आँसू, जो प्रार्थनाएँ दुनिया को बेतुकी लगें, वे परमेश्वर के लिए हों; और जो शब्द तुम बोलते हो, वे दूसरे की भलाई के लिए।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

पौलुस ने अभी अभी लिखा है कि हम शरीर में हों या शरीर से अलग, हमारी असली चाहत क्या है? यही, "हम यही लक्ष्य रखते हैं, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें, हम उसे भाते रहें।"

सोचो, न स्वर्ग पाना लक्ष्य है, न दुख से बचना। बस उसे भाना। जैसे एक बच्चा दिनभर की छोटी छोटी बातों में पिता की मुस्कान ढूँढता है। आज तुम्हारा लक्ष्य क्या है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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