6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 11

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

होशे 11 में परमेश्वर एक पिता की तरह बोलते हैं जो अपने बेटे को याद करता है। वे कहते हैं, "जब इस्राएल बालक था, तब मैंने उससे प्रेम किया, और अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया" (पद 1)। परमेश्वर याद दिला रहे हैं कि उन्होंने इस्राएल को मिस्र की गुलामी से छुड़ाया, जैसे कोई पिता अपने छोटे बच्चे को गोद में उठाकर घर ले आता है।

पर फिर कुछ दुखद होता है। जितना परमेश्वर इस्राएल को बुलाते, उतना ही वह दूर भागता गया। उन्होंने बाल नाम के झूठे देवताओं को पूजना शुरू किया और मूरतों के सामने धूप जलाई (पद 2)। परमेश्वर आगे कहते हैं कि वे ही थे जिन्होंने एप्रैम, यानी इस्राएल, को चलना सिखाया, उसे गोद में उठाया, उसे चंगा किया, प्रेम की डोरी से खींचा। यह तस्वीर एक पिता की है जो अपने बच्चे को पहला कदम उठाना सिखाता है, गिरने पर उठाता है, और प्यार से खाना खिलाता है (पद 3-4)।

फिर भी इस्राएल ने मुँह फेर लिया। इसलिए परिणाम आएगा, अश्शूर देश उन पर राज करेगा, तलवार उनके शहरों में चलेगी (पद 5-7)। यह परमेश्वर की सज़ा से ज़्यादा उनके अपने चुनाव का नतीजा है।

पर फिर पद 8 में कुछ अद्भुत होता है। परमेश्वर का मन पलट जाता है। वे कहते हैं, "मेरा हृदय तो उलट-पुलट हो गया, मेरा मन स्नेह के मारे पिघल गया है।" वे इस्राएल को अदमा और सबोयीम जैसे पूरी तरह नाश किए गए शहरों के समान मिटा नहीं सकते। क्यों? क्योंकि वे कहते हैं, "मैं मनुष्य नहीं परमेश्वर हूँ" (पद 9)। अंत में परमेश्वर वादा करते हैं कि लोग सिंह की गर्जना सुनकर, थरथराते हुए, मिस्र और अश्शूर से लौट आएँगे, और वे उन्हें फिर से उनके घरों में बसाएँगे (पद 10-11)।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें परमेश्वर के हृदय के भीतर झाँकने देता है। यहाँ परमेश्वर क्रोधित राजा नहीं दिख रहे, बल्कि एक पिता दिख रहे हैं जिसका दिल टूट रहा है। सोचो, क्या तुमने कभी किसी से बहुत प्यार किया हो, और उसने तुम्हें नज़रअंदाज़ कर दिया हो? वही दर्द होशे पूरे अध्याय में दिखा रहा है।

सबसे बड़ी बात पद 9 में है। परमेश्वर अपने क्रोध को रोक लेते हैं, न इसलिए कि इस्राएल ने कुछ अच्छा किया, बल्कि इसलिए कि वे परमेश्वर हैं, मनुष्य नहीं। एक इंसान शायद बदला ले लेता, पर परमेश्वर का प्रेम इंसानी प्रेम से अलग है। यह गहरा और स्थिर है, तब भी जब हम उसे ठुकरा देते हैं।

The Common Thread

मत्ती के सुसमाचार में लिखा है कि जब यीशु बालक थे, उनके माता-पिता उन्हें लेकर मिस्र भाग गए, और बाद में वहाँ से लौट आए। मत्ती ने होशे 11:1 के शब्दों का उपयोग करके दिखाया कि यीशु मसीह ही वह सच्चा पुत्र हैं जिसे परमेश्वर मिस्र से बुलाते हैं। जहाँ इस्राएल नाम का पुत्र बार-बार भटक गया, वहाँ यीशु मसीह ने परमेश्वर की पूरी आज्ञा मानी। परमेश्वर का वह हृदय जो पद 8 में पिघल गया, वही हृदय हमें क्रूस पर यीशु मसीह में पूरी तरह दिखाई देता है। वहाँ परमेश्वर ने अपने प्रेम के लिए सबसे बड़ी कीमत चुकाई।

For You

शायद तुम्हें भी कभी लगे कि परमेश्वर से दूर जाना आसान है, जैसे कोई और चीज़ ज़्यादा दिलचस्प लगती है, स्कूल, दोस्त, मोबाइल, या बस अपनी मर्ज़ी। होशे हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर तब भी दूर नहीं जाते। वे बुलाते रहते हैं, पुकारते रहते हैं, जैसे एक पिता अपने बच्चे को खोजता रहता है। अगली बार जब तुम महसूस करो कि तुमने परमेश्वर की बात नहीं मानी, याद रखना कि उनका हृदय अभी भी तुम्हारी ओर मुड़ा हुआ है। यह सवाल पूछने लायक है, क्या तुम उनकी पुकार सुनोगे, या भागते रहोगे?

Talk About It

परमेश्वर कहते हैं "मेरा हृदय उलट-पुलट हो गया"। इसका मतलब क्या है कि परमेश्वर भी दुखी हो सकते हैं?

इस्राएल ने परमेश्वर को छोड़ा, फिर भी परमेश्वर ने उसे पूरी तरह नहीं छोड़ा। तुम्हारे जीवन में ऐसा कब हुआ है कि किसी ने तुम्हें माफ किया जब तुम उसके लायक नहीं थे?

Praying Together

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें तब भी प्रेम करते हैं जब हम आपसे दूर भाग जाते हैं। हमारा हृदय कभी-कभी भटक जाता है, हमें माफ कीजिए और हमें वापस अपनी ओर खींचिए। हमें अपनी पुकार सुनने में मदद कीजिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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होशे 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 11 किस विषय में है?
होशे 11 में परमेश्वर एक पिता की तरह बोलते हैं जो अपने बेटे को याद करता है। वे कहते हैं, "जब इस्राएल बालक था, तब मैंने उससे प्रेम किया, और अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया" (पद 1)। परमेश्वर याद दिला रहे हैं कि उन्होंने इस्राएल को मिस्र की गुलामी से छुड़ाया, जैसे कोई पिता अपने छोटे बच्चे को गोद में उठाकर घर ले आता है।
होशे 11 क्या कहता है?
फिर भी इस्राएल ने मुँह फेर लिया। इसलिए परिणाम आएगा, अश्शूर देश उन पर राज करेगा, तलवार उनके शहरों में चलेगी (पद 5-7)। यह परमेश्वर की सज़ा से ज़्यादा उनके अपने चुनाव का नतीजा है।
होशे 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय हमें परमेश्वर के हृदय के भीतर झाँकने देता है। यहाँ परमेश्वर क्रोधित राजा नहीं दिख रहे, बल्कि एक पिता दिख रहे हैं जिसका दिल टूट रहा है। सोचो, क्या तुमने कभी किसी से बहुत प्यार किया हो, और उसने तुम्हें नज़रअंदाज़ कर दिया हो? वही दर्द होशे पूरे अध्याय में दिखा रहा है।
बच्चे होशे 11 से क्या सीख सकते हैं?
मत्ती के सुसमाचार में लिखा है कि जब यीशु बालक थे, उनके माता-पिता उन्हें लेकर मिस्र भाग गए, और बाद में वहाँ से लौट आए। मत्ती ने होशे 11:1 के शब्दों का उपयोग करके दिखाया कि यीशु मसीह ही वह सच्चा पुत्र हैं जिसे परमेश्वर मिस्र से बुलाते हैं। जहाँ इस्राएल नाम का पुत्र बार-बार भटक गया, वहाँ यीशु मसीह ने परमेश्वर की पूरी आज्ञा मानी। परमेश्वर का वह हृदय जो पद 8 में पिघल गया, वही हृदय हमें क्रूस पर यीशु मसीह में पूरी तरह दिखाई देता है। वहाँ परमेश्वर ने अपने प्रेम के लिए सबसे बड़ी कीमत चुकाई।
होशे 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर कहते हैं "मेरा हृदय उलट-पुलट हो गया"। इसका मतलब क्या है कि परमेश्वर भी दुखी हो सकते हैं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

वे मिस्र से पक्षी के समान, और अश्शूर के देश से कबूतरी के समान थरथराते हुए आएँगे; और मैं उनको उनके घरों में बसा दूँगा।" ध्यान दे, लौटनेवाले काँप रहे हैं। उनके पास न सफाई है, न साहस, बस डरते हुए घर की ओर उड़ना। और परमेश्वर उन्हें डाँटता नहीं, बसा देता है। तेरा काँपता हुआ लौटना भी उसे मंज़ूर है।

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