6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 22

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यशायाह 22 का अध्याय एक अजीब शहर की तस्वीर से शुरू होता है। यरूशलेम शहर में हर तरफ शोर और खुशी है। लोग छतों पर चढ़ गए हैं, जश्न मना रहे हैं। पर परमेश्वर के दूत यशायाह को यह देखकर रोना आता है, क्योंकि वे जानते हैं कि यह खुशी झूठी है। दुश्मन सेनाएँ शहर के पास आ चुकी हैं, एलाम और कीर के सैनिक तीर-कमान और ढाल लिए खड़े हैं। यरूशलेम के बड़े-बड़े अधिकारी डर के मारे भाग गए हैं, और जो नहीं भाग पाए वे पकड़े गए हैं।

लोगों ने क्या किया जब खतरा आया? उन्होंने शहरपनाह की दरारें देखीं, पानी के कुण्ड बनाए, पुराने घरों को तोड़कर दीवार मज़बूत की। यह सब बुद्धिमानी की बात लगती है, है ना? पर यशायाह एक बात साफ कहते हैं, उन्होंने उस परमेश्वर को याद नहीं किया जिसने बहुत पहले से इस शहर को बसाया था। उन्होंने दीवारें देखीं, पर दीवारें बनाने वाले परमेश्वर की ओर नहीं देखा।

इसके बाद परमेश्वर ने उनसे रोने, सिर मुंडाने और टाट पहनने को कहा था, यानी अपने पाप पर सच्चा दुख मनाने को। पर लोगों ने इसके बदले क्या किया? उन्होंने कहा, "आओ खाएँ-पीएँ, क्योंकि कल तो हमें मरना है।" यह सुनकर दिल भारी हो जाता है। जब परमेश्वर गंभीर होने को कहते हैं, तब वे मज़ाक उड़ाते हैं।

अध्याय के अंत में एक अलग कहानी है। शेबना नाम का एक भण्डारी राजमहल का बड़ा अधिकारी था। उसने अपने लिए एक शानदार कब्र खुदवाई, ऊँची जगह पर, जैसे वह हमेशा के लिए महान बना रहेगा। परमेश्वर कहते हैं कि वे उसे वहाँ से फेंक देंगे, और उसकी जगह एल्याकीम को देंगे, जो यरूशलेम के लोगों के लिए एक भले पिता जैसा अधिकारी बनेगा।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय बताता है कि सुरक्षा का एहसास और असली सुरक्षा एक बात नहीं है। यरूशलेम के लोगों के पास दीवारें थीं, पानी था, योजनाएँ थीं, पर उनके पास परमेश्वर के साथ सच्चा रिश्ता नहीं था। वे यह सोचकर जश्न मना रहे थे कि सब ठीक है, जबकि असल में उनके दिल परमेश्वर से दूर थे।

यह भी एक गहरी बात सिखाता है, कभी-कभी हम समस्या को ठीक करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम भूल जाते हैं कि परमेश्वर से बात करना ज़रूरी है। योजना बनाना गलत नहीं, पर परमेश्वर को भूल जाना खतरनाक है।

समान सूत्र

शेबना की कहानी में एक दिलचस्प बात है जो आगे बढ़कर यीशु मसीह तक पहुँचती है। परमेश्वर एल्याकीम के बारे में कहते हैं कि वे उसे दाऊद के घराने की कुंजी देंगे, "वह खोलेगा और कोई बन्द न कर सकेगा, वह बन्द करेगा और कोई खोल न सकेगा।" यह बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी की बात है। बहुत बाद में, प्रकाशितवाक्य की किताब में यीशु मसीह के बारे में बिल्कुल यही शब्द दोहराए गए हैं। यीशु वह हैं जिनके पास असली कुंजी है, स्वर्ग के राज्य की कुंजी। वे वह दरवाज़ा खोलते हैं जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता, परमेश्वर के पास आने का रास्ता।

यरूशलेम के लोगों ने अपनी ईंट-पत्थर की दीवारों पर भरोसा किया और वे गिर गईं। पर जो यीशु पर भरोसा करता है, वह एक ऐसी नींव पर खड़ा होता है जो कभी नहीं हिलती।

आपके लिए

कभी तुमने ऐसा महसूस किया है कि सब कुछ ठीक लग रहा है, पर अंदर से तुम जानते हो कि कुछ गड़बड़ है? यरूशलेम के लोगों की तरह, हम भी कभी-कभी बाहर से खुश दिखते हैं जबकि परमेश्वर से हमारा रिश्ता कमज़ोर होता जाता है। यह अध्याय हमें पूछने को कहता है, क्या मैं सच में परमेश्वर की बात सुन रहा हूँ, या मैं सिर्फ व्यस्त और खुश दिखने की कोशिश कर रहा हूँ?

यह भी याद रखने की बात है कि दीवारें, योजनाएँ, और तैयारियाँ गलत नहीं हैं। पर उनके पीछे परमेश्वर पर भरोसा होना चाहिए। जब तुम किसी परीक्षा की तैयारी करते हो या किसी मुश्किल का सामना करते हो, तो मेहनत करो, पर साथ में परमेश्वर से बात भी करो।

बात करें

तुम्हें क्या लगता है, यरूशलेम के लोगों को दीवारें मज़बूत करने के बजाय पहले क्या करना चाहिए था?

क्या तुम कोई ऐसा समय याद कर सकते हो जब तुमने किसी समस्या को खुद हल करने की कोशिश की, पर परमेश्वर से बात करना भूल गए?

एक साथ प्रार्थना

हे प्रभु, कभी-कभी हम व्यस्त हो जाते हैं और आपको भूल जाते हैं। हमें याद दिलाइए कि असली सुरक्षा आप में है, न कि हमारी अपनी योजनाओं में। धन्यवाद कि यीशु मसीह हमारे लिए वह दरवाज़ा खोलते हैं जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता। हमें ऐसा दिल दीजिए जो सच में आपकी सुनता है। आमीन।

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यशायाह 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 22 किस विषय में है?
यशायाह 22 का अध्याय एक अजीब शहर की तस्वीर से शुरू होता है। यरूशलेम शहर में हर तरफ शोर और खुशी है। लोग छतों पर चढ़ गए हैं, जश्न मना रहे हैं। पर परमेश्वर के दूत यशायाह को यह देखकर रोना आता है, क्योंकि वे जानते हैं कि यह खुशी झूठी है। दुश्मन सेनाएँ शहर के पास आ चुकी हैं, एलाम और कीर के सैनिक तीर-कमान और ढाल लिए खड़े हैं। यरूशलेम के बड़े-बड़े अधिकारी डर के मारे भाग गए हैं, और जो नहीं भाग पाए वे पकड़े गए हैं।
यशायाह 22 क्या कहता है?
अध्याय के अंत में एक अलग कहानी है। शेबना नाम का एक भण्डारी राजमहल का बड़ा अधिकारी था। उसने अपने लिए एक शानदार कब्र खुदवाई, ऊँची जगह पर, जैसे वह हमेशा के लिए महान बना रहेगा। परमेश्वर कहते हैं कि वे उसे वहाँ से फेंक देंगे, और उसकी जगह एल्याकीम को देंगे, जो यरूशलेम के लोगों के लिए एक भले पिता जैसा अधिकारी बनेगा।
यशायाह 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
शेबना की कहानी में एक दिलचस्प बात है जो आगे बढ़कर यीशु मसीह तक पहुँचती है। परमेश्वर एल्याकीम के बारे में कहते हैं कि वे उसे दाऊद के घराने की कुंजी देंगे, "वह खोलेगा और कोई बन्द न कर सकेगा, वह बन्द करेगा और कोई खोल न सकेगा।" यह बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी की बात है। बहुत बाद में, प्रकाशितवाक्य की किताब में यीशु मसीह के बारे में बिल्कुल यही शब्द दोहराए गए हैं। यीशु वह हैं जिनके पास असली कुंजी है, स्वर्ग के राज्य की कुंजी। वे वह दरवाज़ा खोलते हैं जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता, परमेश्वर के पास आने का रास्ता।
बच्चे यशायाह 22 से क्या सीख सकते हैं?
यह भी याद रखने की बात है कि दीवारें, योजनाएँ, और तैयारियाँ गलत नहीं हैं। पर उनके पीछे परमेश्वर पर भरोसा होना चाहिए। जब तुम किसी परीक्षा की तैयारी करते हो या किसी मुश्किल का सामना करते हो, तो मेहनत करो, पर साथ में परमेश्वर से बात भी करो।
यशायाह 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे प्रभु, कभी-कभी हम व्यस्त हो जाते हैं और आपको भूल जाते हैं। हमें याद दिलाइए कि असली सुरक्षा आप में है, न कि हमारी अपनी योजनाओं में। धन्यवाद कि यीशु मसीह हमारे लिए वह दरवाज़ा खोलते हैं जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता। हमें ऐसा दिल दीजिए जो सच में आपकी सुनता है। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

परमेश्वर पूरे राष्ट्र से बात करते करते रुकता है और एक आदमी का नाम लेता है: "उस भण्डारी शेबना के पास जा जो राजघराने के ऊपर ठहराया गया है।" शेबना भण्डारी था, यानी दूसरे के घर का रखवाला। पर वह ऊँचाई पर अपने लिए कब्र खुदवा रहा था, अपना नाम बड़ा कर रहा था। जो जिम्मेदारी तुझे सौंपी गई है, क्या तू उससे अपनी सेवा करवा रहा है या उसमें सेवा कर रहा है?

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