6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 33

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यशायाह अध्याय 33 एक ऐसे समय में लिखा गया जब यहूदा का देश बड़े खतरे में था। एक शक्तिशाली शत्रु, अश्शूर का राजा, वादे तोड़ता था और लोगों को लूटता था। इसलिए पहली आयत में कहा गया है, "हाय तुझ नाश करनेवाले पर।" यह एक चेतावनी है, जो धोखा देता है, वह खुद धोखा खाएगा।

इसके बाद लोग परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, "हे यहोवा, हम लोगों पर अनुग्रह कर।" वे जानते हैं कि उनके पास अपनी कोई ताकत नहीं है। परमेश्वर उनकी एकमात्र आशा हैं। और फिर कुछ अद्भुत होता है, परमेश्वर खुद उठते हैं। जब वे उठते हैं, तो दुश्मन देश भाग जाते हैं जैसे टिड्डियाँ किसी खेत पर टूट पड़ती हैं और सब कुछ चट कर जाती हैं, पर अब यह लूट उन्हीं पर पलटेगी।

आयत 7 से 9 में देश का हाल बहुत बुरा दिखाया गया है। रास्ते सुनसान हैं, कोई यात्रा नहीं करता, खेत मुरझा गए हैं, पेड़ सूख गए हैं। ऐसा लगता है जैसे पूरी पृथ्वी रो रही हो। परन्तु ठीक इसी जगह परमेश्वर बोलते हैं, "अब मैं उठूँगा।" निराशा के बीच में ही परमेश्वर का वचन आता है।

फिर एक गंभीर सवाल पूछा जाता है, "हम में से कौन प्रचण्ड आग में रह सकता?" यह आग परमेश्वर की पवित्रता की तस्वीर है। परमेश्वर इतने पवित्र हैं कि पाप उनके सामने टिक नहीं सकता। पर तुरंत बताया जाता है कि कौन वहाँ रह सकता है, वह जो धार्मिकता से चलता है, सच बोलता है, रिश्वत नहीं लेता, और बुराई से दूर रहता है। ऐसा व्यक्ति सुरक्षित रहेगा, उसे रोटी और पानी की कमी नहीं होगी।

अध्याय के अंत में एक सुंदर चित्र आता है, सिय्योन यानी यरूशलेम, जो एक ऐसा तंबू बन जाएगा जिसका कोई खूँटा कभी नहीं उखड़ेगा। वहाँ परमेश्वर खुद राजा, न्यायी और उद्धारकर्ता के रूप में रहेंगे। और अंतिम आयत में एक अनमोल वादा है, "जो लोग उसमें बसेंगे, उनका अधर्म क्षमा किया जाएगा।"

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर चुप नहीं रहते जब उनके लोग दुख में हों, भले ही वे तुरंत कुछ न करें। कभी-कभी हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि लगता है सब कुछ खत्म है, पेड़ सूखे, रास्ते सुनसान, दिल डरा हुआ। ठीक तब परमेश्वर कहते हैं, "अब मैं उठूँगा।" उनकी चुप्पी का मतलब यह नहीं कि वे भूल गए हैं।

साथ ही यह अध्याय हमें ईमानदार रहना सिखाता है। परमेश्वर पवित्र हैं, और उनके सामने कोई भी अपनी ताकत पर खड़ा नहीं रह सकता। यह सवाल, "हम में से कौन उस आग में बना रह सकता है?" आसानी से नहीं टाला जा सकता। लेकिन उत्तर आता है, और वह डराने के लिए नहीं बल्कि रास्ता दिखाने के लिए है।

The Common Thread

यशायाह यहाँ एक राजा की बात करता है जो न्यायी और उद्धारकर्ता दोनों है। "यहोवा हमारा न्यायी, यहोवा हमारा हाकिम, यहोवा हमारा राजा है; वही हमारा उद्धार करेगा।" यह वादा अंततः यीशु मसीह में पूरा होता है। वे भी राजा हैं, पर ऐसे राजा जो अपने लोगों के लिए मरे ताकि अधर्म क्षमा हो सके। आयत 24 का वादा, "जो लोग उसमें बसेंगे, उनका अधर्म क्षमा किया जाएगा," पूरी बाइबल की सबसे बड़ी खबर से जुड़ा है, परमेश्वर पाप क्षमा करना चाहते हैं, और उन्होंने इसके लिए रास्ता बनाया।

For You

शायद तुम्हारी ज़िंदगी में भी कभी ऐसा समय आता है जब सब कुछ सूखा और निराश लगता है, कोई झगड़ा, कोई डर, कोई मुश्किल जो खत्म होती नहीं दिखती। इस अध्याय से याद रखो कि परमेश्वर उस चुप्पी के बीच भी काम कर रहे होते हैं। और सोचो, सच बोलना, रिश्वत न लेना, बुराई से आँख मोड़ लेना, ये सब छोटी बातें नहीं हैं, ये वही गुण हैं जो परमेश्वर के पास रहने का रास्ता हैं।

Talk About It

तुम्हारे जीवन में कब ऐसा लगा है कि सब कुछ सूखा और निराश है, और क्या उस समय परमेश्वर ने कुछ नया किया?

आयत 15 में बताए गए गुणों में से कौन सा गुण तुम्हारे लिए सबसे मुश्किल लगता है, और क्यों?

Praying Together

हे प्रभु, जब हमारे चारों ओर सब कुछ सूना और डरावना लगे, तब हमें याद दिलाइए कि आप चुप नहीं हैं। हमें सच बोलना और ईमानदार रहना सिखाइए। धन्यवाद कि यीशु मसीह में आपने हमारे अधर्म को क्षमा करने का रास्ता बनाया। आमीन।

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यशायाह 33 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 33 किस विषय में है?
यशायाह अध्याय 33 एक ऐसे समय में लिखा गया जब यहूदा का देश बड़े खतरे में था। एक शक्तिशाली शत्रु, अश्शूर का राजा, वादे तोड़ता था और लोगों को लूटता था। इसलिए पहली आयत में कहा गया है, "हाय तुझ नाश करनेवाले पर।" यह एक चेतावनी है, जो धोखा देता है, वह खुद धोखा खाएगा।
यशायाह 33 क्या कहता है?
आयत 7 से 9 में देश का हाल बहुत बुरा दिखाया गया है। रास्ते सुनसान हैं, कोई यात्रा नहीं करता, खेत मुरझा गए हैं, पेड़ सूख गए हैं। ऐसा लगता है जैसे पूरी पृथ्वी रो रही हो। परन्तु ठीक इसी जगह परमेश्वर बोलते हैं, "अब मैं उठूँगा।" निराशा के बीच में ही परमेश्वर का वचन आता है।
यशायाह 33 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अध्याय के अंत में एक सुंदर चित्र आता है, सिय्योन यानी यरूशलेम, जो एक ऐसा तंबू बन जाएगा जिसका कोई खूँटा कभी नहीं उखड़ेगा। वहाँ परमेश्वर खुद राजा, न्यायी और उद्धारकर्ता के रूप में रहेंगे। और अंतिम आयत में एक अनमोल वादा है, "जो लोग उसमें बसेंगे, उनका अधर्म क्षमा किया जाएगा।"
बच्चे यशायाह 33 से क्या सीख सकते हैं?
साथ ही यह अध्याय हमें ईमानदार रहना सिखाता है। परमेश्वर पवित्र हैं, और उनके सामने कोई भी अपनी ताकत पर खड़ा नहीं रह सकता। यह सवाल, "हम में से कौन उस आग में बना रह सकता है?" आसानी से नहीं टाला जा सकता। लेकिन उत्तर आता है, और वह डराने के लिए नहीं बल्कि रास्ता दिखाने के लिए है।
यशायाह 33 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
शायद तुम्हारी ज़िंदगी में भी कभी ऐसा समय आता है जब सब कुछ सूखा और निराश लगता है, कोई झगड़ा, कोई डर, कोई मुश्किल जो खत्म होती नहीं दिखती। इस अध्याय से याद रखो कि परमेश्वर उस चुप्पी के बीच भी काम कर रहे होते हैं। और सोचो, सच बोलना, रिश्वत न लेना, बुराई से आँख मोड़ लेना, ये सब छोटी बातें नहीं हैं, ये वही गुण हैं जो परमेश्वर के पास रहने का रास्ता हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

अश्शूर की सेना फाटकों पर खड़ी थी, और सबसे डरावना था उनका बोलना, ऐसी भाषा जो कोई समझ न पाए। डर अक्सर ऐसे ही आता है, बिना समझ में आए, बस एक शोर बनकर। पर परमेश्वर कहता है, "तू उस भयंकर जाति को फिर न देखेगा।" वह आवाज़ सदा तेरे कानों में नहीं गूँजेगी। एक दिन चुप्पी आएगी, और उस चुप्पी में तू उसका जाना पहचाना स्वर सुनेगा।

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