लूका 15
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
लूका 15 में यीशु तीन कहानियाँ सुनाते हैं। और तीनों कहानियाँ एक ही बात के बारे में हैं: कुछ खो जाता है, फिर मिल जाता है, और उसके मिलने पर बहुत खुशी होती है।
पहले देखिए कि यीशु के आस-पास कौन खड़ा है। एक तरफ चुंगी लेनेवाले और वे लोग हैं जिन्हें सब "पापी" कहते थे। वे यीशु की बातें सुनने के लिए पास आ रहे हैं। दूसरी तरफ फरीसी और शास्त्री हैं, यानी वे लोग जो धर्म की सारी नियम जानते थे। वे कुड़कुड़ा रहे हैं: "यह आदमी पापियों के साथ खाना खाता है!" उनके लिए यह बहुत गलत बात थी।
तब यीशु तीन कहानियाँ सुनाते हैं।
पहली कहानी: एक चरवाहे की सौ भेड़ें हैं। एक खो जाती है। वह निन्यानवे को छोड़कर उस एक को खोजने जाता है, जब तक वह मिल न जाए। और जब मिलती है, तो वह उसे कंधे पर उठाकर घर ले आता है और सब पड़ोसियों को बुलाकर कहता है, "मेरे साथ खुशी मनाओ!"
दूसरी कहानी: एक स्त्री के पास दस चाँदी के सिक्के हैं। एक खो जाता है। वह दीया जलाकर पूरा घर झाड़ती है जब तक वह मिल न जाए। मिलने पर वह भी सखियों को बुलाकर खुशी मनाती है।
तीसरी कहानी सबसे लंबी है। एक पिता के दो बेटे हैं। छोटा बेटा अपने हिस्से की सम्पत्ति माँगकर दूर देश चला जाता है और वहाँ सब उड़ा देता है। जब पैसे खत्म हो जाते हैं, अकाल पड़ता है, और उसे सूअर चराने की नौकरी करनी पड़ती है। एक यहूदी लड़के के लिए यह सबसे नीचा काम था। भूख से तड़पते हुए वह सोचता है: "मेरे पिता के मजदूरों को भी भरपेट खाना मिलता है। मैं यहाँ मर रहा हूँ।"
वह उठकर पिता के पास लौटता है। लेकिन देखिए, पिता उसे दूर से ही देख लेते हैं। इसका मतलब है कि पिता उसकी राह देख रहे थे। वे दौड़ते हैं, उसे गले लगाते हैं, चूमते हैं। बेटा अपनी तैयार की हुई बात पूरी भी नहीं कह पाता कि पिता दासों को बुलाकर कहते हैं: सबसे अच्छा वस्त्र लाओ, अंगूठी पहनाओ, जूते पहनाओ, बड़ा भोज तैयार करो।
पर कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। बड़ा बेटा खेत से आता है, संगीत सुनता है, और गुस्से में बाहर ही रुक जाता है। वह कहता है, "मैं इतने साल से आपकी सेवा कर रहा हूँ, फिर भी आपने मुझे कभी एक बकरी का बच्चा भी नहीं दिया।" पिता बाहर आकर उसे भी मनाते हैं और कहते हैं, "बेटा, तू हमेशा मेरे साथ है। पर आज खुशी मनानी ही थी, क्योंकि तेरा भाई मर गया था और जी गया है।"
What Does This Mean?
फरीसियों को लगता था कि परमेश्वर सिर्फ अच्छे लोगों से प्यार करते हैं। यीशु कहते हैं: नहीं। परमेश्वर एक चरवाहे की तरह हैं जो खोजने निकलते हैं। वे एक स्त्री की तरह हैं जो दीया जलाकर ढूँढ़ती है। वे एक पिता की तरह हैं जो दौड़कर गले लगाते हैं।
और कहानी यह भी दिखाती है कि "खो जाना" दो तरह का होता है। छोटा बेटा दूर देश में खोया था। बड़ा बेटा घर में रहकर भी खोया था, क्योंकि उसका दिल पिता से दूर था। वह पिता के साथ नहीं, बल्कि नियमों के साथ जी रहा था।
The Common Thread
यीशु ये कहानियाँ इसलिए सुनाते हैं क्योंकि खुद वे ही वह चरवाहा हैं जो खोजने आए हैं। यीशु स्वर्ग से इसी कारण आए, क्योंकि परमेश्वर हमें खोए हुए नहीं छोड़ना चाहते। बाइबल की पूरी कहानी यही है: परमेश्वर लगातार अपने लोगों को खोजते हैं। आदम बगीचे में छिप गया, तो परमेश्वर ने पुकारा, "तू कहाँ है?" वैसे ही यीशु आज भी हमें पुकारते हैं।
यह भी सोचिए: पिता दौड़ते हैं। उस समय बुजुर्ग आदमी कभी दौड़ते नहीं थे, यह उनकी शान के खिलाफ था। पर यह पिता दौड़ते हैं। परमेश्वर की मुहब्बत ऐसी ही है।
For You
शायद तुम्हें कभी लगता है कि तुमने कुछ ऐसा किया है कि परमेश्वर अब तुमसे नाराज़ ही रहेंगे। यह कहानी कहती है: नहीं। जब तुम लौटते हो, वे दौड़ते हैं।
पर एक सवाल भी है: क्या तुम कभी बड़े बेटे जैसे हो? जब कोई शरारती बच्चा माफ किया जाता है, तो क्या तुम्हारे अंदर कुछ चुभता है, "यह तो ठीक नहीं!"? यीशु चाहते हैं कि हम पिता के दिल जैसे बनें, न कि बड़े भाई जैसे।
और यह भी सच है: कुछ सवाल इस कहानी में खुले रह जाते हैं। यीशु नहीं बताते कि बड़ा बेटा आखिर में अंदर गया या नहीं। शायद इसलिए, ताकि हम खुद अपने आप से पूछें: मैं क्या करूँगा?
Talk About It
दोनों बेटों में से तुम अपने आप को किसके ज़्यादा करीब पाते हो, और क्यों?
पिता दौड़कर बेटे को गले लगाते हैं, इससे तुम परमेश्वर के बारे में क्या सीखते हो?
Praying Together
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप हमें खोजनेवाले चरवाहे हैं। जब हम भटक जाते हैं, तब आप हमें ढूँढ़ते हैं। हमें ऐसा दिल दीजिए जो लौटना जानता हो, और ऐसा दिल भी जो दूसरों के लौटने पर सचमुच खुश हो सके। आमीन।
लूका 15 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लूका 15 किस विषय में है?
लूका 15 क्या कहता है?
लूका 15 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे लूका 15 से क्या सीख सकते हैं?
लूका 15 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
Reading Luke 15 about the prodigal son, I only noticed it this time: the father runs. An old man running through the village, robe lifted, dignity abandoned. That is not a story about repentance. That is a story about how we are sought.
फरीसी बड़बड़ा रहे थे कि यीशु पापियों के साथ खाता है, और उसी बड़बड़ाहट के बीच यह वाक्य आता है: "एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा।" स्वर्ग उन निन्यानवे पर चुप रहता है जो अपने को ठीक समझते हैं, और एक लौटने वाले पर गूँज उठता है। सोचो, तुम्हारे लौटने से किसी को इतनी खुशी होती है। तुम किस गिनती में खड़े हो?
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