7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

अय्यूब 22

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

अय्यूब बहुत दुखी है। वह राख पर बैठा है, उसका शरीर दर्द से भरा है, उसके बच्चे मर चुके हैं, उसका सब कुछ छिन गया है। उसके तीन दोस्त उसे देखने आए हैं। अब तीसरी बार तेमानी एलीपज बोलता है।

एलीपज की आँखों में गुस्सा और उलझन है। वह पूछता है, "क्या मनुष्य से परमेश्वर को कोई लाभ पहुँच सकता है?" वह कहना चाहता है, परमेश्वर को तुम्हारी ज़रूरत नहीं, पर तुम्हें उनकी ज़रूरत है।

फिर एलीपज कुछ बहुत कठोर कहता है। वह अय्यूब पर आरोप लगाता है। "तूने अपने भाई से चीज़ें छीन लीं," वह कहता है। "तूने नंगे आदमी के कपड़े उतार लिए। थके हुए आदमी को पानी नहीं पिलाया। भूखे को रोटी नहीं दी। तूने विधवाओं को खाली हाथ भेज दिया।" क्या यह सच है? अय्यूब की कहानी के शुरू में हमने पढ़ा कि वह एक भला और सीधा आदमी था। पर एलीपज को यक़ीन है कि अय्यूब ने ज़रूर कुछ बुरा किया है, वरना इतनी तकलीफ क्यों आती?

एलीपज सोचता है, "परमेश्वर आकाश में इतने ऊँचे बैठे हैं कि शायद वे नीचे देख ही नहीं पाते।" वह कहता है कि अय्यूब शायद ऐसा सोच रहा है कि अंधेरे बादलों के पीछे परमेश्वर कुछ नहीं देखते। पर फिर भी वह अय्यूब को चेतावनी देता है, बुरे लोगों का रास्ता मत पकड़ना।

फिर एलीपज की बात में कुछ बदल जाता है। वह कहता है, "परमेश्वर से मेल मिलाप कर ले, तब तुझे शान्ति मिलेगी।" वह कहता है कि अगर अय्यूब परमेश्वर के पास लौटे, अपने तम्बू से बुराई दूर करे, तो परमेश्वर उसकी चाँदी और सोने से भी ज़्यादा कीमती बन जाएँगे। तब अय्यूब प्रार्थना करेगा और परमेश्वर उसकी सुनेंगे। तब उसके रास्ते पर उजाला होगा।

What Does This Mean?

एलीपज की बातें मिली जुली हैं। एक तरफ वह अय्यूब पर झूठा आरोप लगाता है, चीज़ें जो अय्यूब ने कभी नहीं कीं। वह सोचता है कि दुख हमेशा पाप के कारण आता है, पर यह पूरी सच्चाई नहीं है। कभी भले लोग भी भारी दुख सहते हैं।

पर दूसरी तरफ, एलीपज कुछ सच भी कहता है, परमेश्वर के पास लौटना अच्छी बात है, उनके पास शान्ति मिलती है, वे प्रार्थना सुनते हैं। यह बात हमें सिखाती है कि दोस्त भी कभी गलत बात कह सकते हैं, भले ही वे अच्छी नीयत से बोलें। हमें सुनना चाहिए पर जाँचना भी चाहिए, क्या यह बात सच में परमेश्वर की तरफ से है?

The Common Thread

एलीपज चाहता था कि अय्यूब परमेश्वर से मेल मिलाप करे। पर अय्यूब को किसी गलत काम से मेल मिलाप करने की ज़रूरत नहीं थी, वह तो पहले से ही परमेश्वर के साथ चल रहा था। फिर भी यह जो एलीपज ने कहा, "परमेश्वर से मेल मिलाप कर, तब तुझे शान्ति मिलेगी," यह बात आगे चलकर यीशु मसीह में पूरी होती है। यीशु मसीह हमारे और परमेश्वर के बीच सचमुच मेल मिलाप कराते हैं, सूली पर अपनी जान देकर। अब हम अपने पापों के कारण नहीं बल्कि यीशु मसीह के कारण परमेश्वर के पास शान्ति से आ सकते हैं।

For You

जब तुम्हारा कोई दोस्त तुम पर कुछ गलत आरोप लगाए, तो दुख होता है। जैसे अय्यूब को हुआ। उस वक्त परमेश्वर के पास जाना अच्छा है, उन्हें सब पता है। और जब तुम किसी के बारे में कुछ सोचो, तो पहले पूछना सीखो, जाँचना सीखो, बिना सोचे आरोप मत लगाओ। आज किसी थके हुए को एक गिलास पानी दो, या किसी भूखे को कुछ खाने को दो, जैसे एलीपज ने कहा अय्यूब ने नहीं किया।

Talk About It

एलीपज ने अय्यूब पर झूठा आरोप लगाया, क्या तुम्हें कभी किसी ने गलत समझा है?

एलीपज ने कहा परमेश्वर से मेल मिलाप करने पर शान्ति मिलती है, तुम्हें कब परमेश्वर के पास शान्ति मिलती है?

Praying Together

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप सब कुछ देखते और जानते हैं, भले ही हम कभी गलत समझे जाएँ। हमें सिखाइए कि दूसरों के बारे में जल्दी राय न बनाएँ। हमें यीशु मसीह के द्वारा अपने पास आने दीजिए, और हमारे मन में शान्ति भर दीजिए। आमीन।

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अय्यूब 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

अय्यूब 22 किस विषय में है?
अय्यूब बहुत दुखी है। वह राख पर बैठा है, उसका शरीर दर्द से भरा है, उसके बच्चे मर चुके हैं, उसका सब कुछ छिन गया है। उसके तीन दोस्त उसे देखने आए हैं। अब तीसरी बार तेमानी एलीपज बोलता है।
अय्यूब 22 क्या कहता है?
फिर एलीपज कुछ बहुत कठोर कहता है। वह अय्यूब पर आरोप लगाता है। "तूने अपने भाई से चीज़ें छीन लीं," वह कहता है। "तूने नंगे आदमी के कपड़े उतार लिए। थके हुए आदमी को पानी नहीं पिलाया। भूखे को रोटी नहीं दी। तूने विधवाओं को खाली हाथ भेज दिया।" क्या यह सच है?
अय्यूब 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर एलीपज की बात में कुछ बदल जाता है। वह कहता है, "परमेश्वर से मेल मिलाप कर ले, तब तुझे शान्ति मिलेगी।" वह कहता है कि अगर अय्यूब परमेश्वर के पास लौटे, अपने तम्बू से बुराई दूर करे, तो परमेश्वर उसकी चाँदी और सोने से भी ज़्यादा कीमती बन जाएँगे। तब अय्यूब प्रार्थना करेगा और परमेश्वर उसकी सुनेंगे। तब उसके रास्ते पर उजाला होगा।
बच्चे अय्यूब 22 से क्या सीख सकते हैं?
पर दूसरी तरफ, एलीपज कुछ सच भी कहता है, परमेश्वर के पास लौटना अच्छी बात है, उनके पास शान्ति मिलती है, वे प्रार्थना सुनते हैं। यह बात हमें सिखाती है कि दोस्त भी कभी गलत बात कह सकते हैं, भले ही वे अच्छी नीयत से बोलें। हमें सुनना चाहिए पर जाँचना भी चाहिए, क्या यह बात सच में परमेश्वर की तरफ से है?
अय्यूब 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम्हारा कोई दोस्त तुम पर कुछ गलत आरोप लगाए, तो दुख होता है। जैसे अय्यूब को हुआ। उस वक्त परमेश्वर के पास जाना अच्छा है, उन्हें सब पता है। और जब तुम किसी के बारे में कुछ सोचो, तो पहले पूछना सीखो, जाँचना सीखो, बिना सोचे आरोप मत लगाओ। आज किसी थके हुए को एक गिलास पानी दो, या किसी भूखे को कुछ खाने को दो, जैसे एलीपज ने कहा अय्यूब ने नहीं किया।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

एलीपज ने अय्यूब पर दोष लगाते हुए कहा, "वह निर्दोष को भी बचाएगा, और तेरे हाथों की शुद्धता के कारण वह छुड़ाया जाएगा।" और आख़िर में यही हुआ, पर उल्टा। दोषी एलीपज ही निकला, और परमेश्वर ने अय्यूब की प्रार्थना सुनकर उसे क्षमा किया। तेरी साफ़ ज़िंदगी किसी और की रिहाई बन सकती है। तू किसके लिए प्रार्थना करने से कतरा रहा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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