6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 21

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यीशु मन्दिर के आँगन में बैठे थे। उन्होंने देखा, धनी लोग अपना दान सन्दूक में डाल रहे थे। खनाक, खनाक, सिक्के गिर रहे थे। फिर एक गरीब विधवा आई। उसके पास बस दो छोटी-छोटी दमड़ियाँ थीं। उसने चुपचाप दोनों डाल दीं। यीशु ने अपने चेलों से कहा, “यह विधवा सबसे ज्यादा लाई है। बाकी लोगों ने जो बचा था, उसमें से दिया। पर इसने अपना सब कुछ दे दिया।”

कुछ लोग मन्दिर की सुन्दर पत्थर की दीवारों को देखकर बोले, “कितना शानदार है!” यीशु ने गम्भीर होकर कहा, “एक दिन आएगा, जब यहाँ एक पत्थर भी दूसरे पर टिका नहीं रहेगा।” चेले चौंक गए। “यह कब होगा, गुरु?” उन्होंने पूछा।

यीशु ने समझाया, “सावधान रहना। बहुत लोग आकर कहेंगे, मैं ही मसीह हूँ। उनके पीछे मत जाना।” उन्होंने कहा, लड़ाइयाँ होंगी, भूकम्प आएँगे, अकाल पड़ेंगे। लोग डर जाएँगे। पर यीशु ने कहा, “घबराना मत।”

फिर यीशु ने कुछ कठिन बातें कहीं। उन्होंने बताया कि उनके चेलों को पकड़ा जाएगा, सताया जाएगा, यहाँ तक कि अपने ही घरवाले उन्हें धोखा देंगे। यह सुनना डरावना था। पर यीशु ने एक वादा भी दिया, “तुम्हारे सिर का एक बाल भी बाँका नहीं होगा। धीरज रखने से तुम अपने प्राण बचाओगे।”

उन्होंने यरूशलेम शहर के बारे में भी बताया। जब शहर को सेनाएँ घेर लें, तो लोग पहाड़ों पर भाग जाएँ। बड़ा दुख आने वाला था।

फिर यीशु ने आकाश की ओर इशारा किया। “सूरज, चाँद, तारों में निशान दिखेंगे। समुद्र गरजेगा।” यह सुनकर डर लगता है, है ना? पर फिर यीशु ने एक सुन्दर बात कही, “तब तुम मनुष्य के पुत्र को बादलों पर आते देखोगे, बड़ी महिमा के साथ। जब यह होने लगे, तो डरकर झुको मत, बल्कि अपना सिर ऊपर उठाओ, क्योंकि तुम्हारा छुटकारा पास आ रहा है!”

यीशु ने अंजीर के पेड़ की बात की। जब उसकी नई पत्तियाँ निकलती हैं, तो तुम जानते हो गर्मी आने वाली है। वैसे ही जब ये बातें होंगी, जानना कि परमेश्वर का राज्य पास है।

What Does This Mean?

यीशु हमें डराना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि उनके चेले तैयार रहें, और भरोसा रखें। दुनिया में मुश्किलें आएँगी, युद्ध, भूकम्प, दुख। पर परमेश्वर सब कुछ जानते हैं, और वे अपने लोगों को नहीं भूलते। विधवा की कहानी भी यही सिखाती है। उसने थोड़ा दिया, पर पूरे दिल से दिया। परमेश्वर देखते हैं कि हम कितना प्रेम से देते हैं, न कि कितना पैसा।

The Common Thread

यीशु ने कहा, “मनुष्य का पुत्र बादलों पर आएगा, बड़ी महिमा के साथ।” यह वही यीशु हैं, जो एक दिन फिर से आएँगे। परमेश्वर की बातें कभी नहीं बदलतीं, भले ही सारी दुनिया बदल जाए। “आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।” यह बड़ा भरोसेमंद वादा है।

For You

जब तुम डरो, चाहे अंधेरे में हो या किसी बुरी खबर से, याद रखो, यीशु ने कहा है डरना मत। तुम उस विधवा जैसे बन सकते हो, थोड़ा भी परमेश्वर को खुशी से दे सकते हो, अपना समय, अपनी प्रार्थना, अपनी मदद। और हर दिन जागते रहो, यानी परमेश्वर को याद रखो और उनसे बात करते रहो।

Talk About It

तुम्हें क्या लगता है, विधवा ने इतना कम देकर भी सबसे ज्यादा क्यों दिया?

जब तुम डरते हो, तो तुम किससे मदद माँगते हो?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं भूलते, चाहे कुछ भी हो जाए। हमें डर के बजाय भरोसा दीजिए। हमें उस विधवा जैसा दिल दीजिए, जो थोड़ा भी पूरे प्रेम से देती है। हमें याद रखने में मदद कीजिए कि यीशु फिर से आएँगे, महिमा के साथ। आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

लूका 21 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 21 किस विषय में है?
यीशु मन्दिर के आँगन में बैठे थे। उन्होंने देखा, धनी लोग अपना दान सन्दूक में डाल रहे थे। खनाक, खनाक, सिक्के गिर रहे थे। फिर एक गरीब विधवा आई। उसके पास बस दो छोटी-छोटी दमड़ियाँ थीं। उसने चुपचाप दोनों डाल दीं। यीशु ने अपने चेलों से कहा, “यह विधवा सबसे ज्यादा लाई है। बाकी लोगों ने जो बचा था, उसमें से दिया। पर इसने अपना सब कुछ दे दिया।”
लूका 21 क्या कहता है?
यीशु ने समझाया, “सावधान रहना। बहुत लोग आकर कहेंगे, मैं ही मसीह हूँ। उनके पीछे मत जाना।” उन्होंने कहा, लड़ाइयाँ होंगी, भूकम्प आएँगे, अकाल पड़ेंगे। लोग डर जाएँगे। पर यीशु ने कहा, “घबराना मत।”
लूका 21 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
उन्होंने यरूशलेम शहर के बारे में भी बताया। जब शहर को सेनाएँ घेर लें, तो लोग पहाड़ों पर भाग जाएँ। बड़ा दुख आने वाला था।
बच्चे लूका 21 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु ने अंजीर के पेड़ की बात की। जब उसकी नई पत्तियाँ निकलती हैं, तो तुम जानते हो गर्मी आने वाली है। वैसे ही जब ये बातें होंगी, जानना कि परमेश्वर का राज्य पास है।
लूका 21 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यीशु ने कहा, “मनुष्य का पुत्र बादलों पर आएगा, बड़ी महिमा के साथ।” यह वही यीशु हैं, जो एक दिन फिर से आएँगे। परमेश्वर की बातें कभी नहीं बदलतीं, भले ही सारी दुनिया बदल जाए। “आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।” यह बड़ा भरोसेमंद वादा है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास नन्हे बच्चों (3-5 वर्ष) और किशोरों (13 वर्ष और उससे ऊपर) के लिए अलग संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें