3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 23

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाई

एक दिन था। बहुत उदास दिन। यीशु को पकड़ लिया गया था।

लोग उसे पिलातुस के पास ले गए। पिलातुस बड़ा हाकिम था। लोगों ने कहा, "यह बुरा है।" पर पिलातुस ने कहा, "मुझे तो इसमें कोई दोष नहीं मिलता।"

पिलातुस ने यीशु को हेरोदेस के पास भेजा। हेरोदेस ने यीशु का मज़ाक बनाया। सिपाहियों ने भी उसे तंग किया। फिर उसे वापस पिलातुस के पास भेज दिया।

लोग बहुत चिल्लाए। बहुत ज़ोर से। "उसे क्रूस पर चढ़ा दो!" वे चिल्लाते रहे। और चिल्लाते रहे। पिलातुस ने तीन बार कहा, "इसने कुछ बुरा नहीं किया है।" पर लोगों की आवाज़ जीत गई।

इसका अर्थ क्या है?

फिर यीशु को एक भारी क्रूस दिया गया। वह चला। धीरे धीरे। शमौन नाम के एक आदमी ने उसका क्रूस उठाकर मदद की। स्त्रियाँ रो रही थीं। यीशु ने उनकी तरफ देखा और धीरे से बात की।

फिर वे एक जगह पहुँचे। उसका नाम था "खोपड़ी"। वहाँ उन्होंने यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया। साथ में दो और आदमी भी थे।

यीशु ने कहा, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर दो। ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।" सोचो, कितना दर्द था। फिर भी यीशु ने क्षमा माँगी। अपने दुश्मनों के लिए।

समान सूत्र

क्रूस पर एक आदमी और था। उसने यीशु से कहा, "मुझे याद रखना।" यीशु ने जवाब दिया, "आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।" कैसी अच्छी बात! यीशु मरते हुए भी किसी को स्वर्ग का वचन दे सकते थे।

फिर आसमान अंधेरा हो गया। सूरज की रोशनी चली गई। मंदिर का बड़ा परदा फट गया। ऊपर से नीचे तक। यीशु ने ज़ोर से पुकारा, "हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।" और फिर उन्होंने अपने प्राण दे दिए।

एक सिपाही ने यह सब देखा। उसने कहा, "यह मनुष्य सचमुच धर्मी था।"

यूसुफ नाम का एक भला आदमी था। उसने यीशु के शव को कोमल चादर में लपेटा। उसे एक नई कब्र में रखा। पत्थर की कब्र में, जहाँ पहले कभी कोई नहीं रखा गया था।

तुम्हारे लिए

यीशु ने क्रूस पर भी क्षमा माँगी। अपने दुश्मनों के लिए भी। जब कोई हमारे साथ बुरा करता है, हम भी यीशु से क्षमा करना सीख सकते हैं। थोड़ा थोड़ा।

बातचीत के लिए

यीशु ने क्रूस पर क्या कहा, जब उन्हें बहुत दर्द था?

यीशु ने उस आदमी से क्या वादा किया, जो उसके साथ लटका था?

संगति में प्रार्थना

प्रिय यीशु, आप हमारे लिए क्रूस पर मरे। आपने दूसरों को क्षमा किया, तब भी। हमें भी क्षमा करना सिखाइए। धन्यवाद, आप हमें बहुत प्यार करते हैं। आमीन।

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लूका 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 23 किस विषय में है?
लोग उसे पिलातुस के पास ले गए। पिलातुस बड़ा हाकिम था। लोगों ने कहा, "यह बुरा है।" पर पिलातुस ने कहा, "मुझे तो इसमें कोई दोष नहीं मिलता।"
लूका 23 क्या कहता है?
लोग बहुत चिल्लाए। बहुत ज़ोर से। "उसे क्रूस पर चढ़ा दो!" वे चिल्लाते रहे। और चिल्लाते रहे। पिलातुस ने तीन बार कहा, "इसने कुछ बुरा नहीं किया है।" पर लोगों की आवाज़ जीत गई।
लूका 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर वे एक जगह पहुँचे। उसका नाम था "खोपड़ी"। वहाँ उन्होंने यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया। साथ में दो और आदमी भी थे।
नन्हे बच्चे लूका 23 से क्या सीख सकते हैं?
क्रूस पर एक आदमी और था। उसने यीशु से कहा, "मुझे याद रखना।" यीशु ने जवाब दिया, "आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।" कैसी अच्छी बात! यीशु मरते हुए भी किसी को स्वर्ग का वचन दे सकते थे।
लूका 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
एक सिपाही ने यह सब देखा। उसने कहा, "यह मनुष्य सचमुच धर्मी था।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

अपनी पीठ पर क्रूस लिए, लहूलुहान चलते हुए यीशु रुककर रोती हुई स्त्रियों से कहते हैं कि मेरे लिए नहीं, अपने लिए रोओ। और फिर यह भयानक बात: "तब वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, 'हम पर गिरो' और टीलों से कि 'हमें ढाँप लो।'" सोचो, पहाड़ के नीचे दबना उस दिन का सामना करने से आसान लगेगा। पर जिससे लोग छिपना चाहेंगे, वही आज तुम्हें ढाँपने को क्रूस तक चला जा रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

फसह पर एक बन्दी को छोड़ने की रीति थी, "उसे हर एक पर्व में उनके लिये एक बन्दी को छोड़ना पड़ता था।" छुटकारे के इसी पर्व में एक दोषी छूट गया और एक निर्दोष बाँधा गया। बरअब्बा को शायद कभी समझ न आया हो कि उसकी जंजीरें किसने पहनीं। पर तुम जानते हो। तुम्हारी जगह कोई खड़ा हुआ था। आज उस अदला बदली को हल्के में मत लेना।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

फिर सारी सभा उठकर उसे पिलातुस के पास ले गई।" पूरी सभा एक साथ उठी। इतने धर्मी लोग, इतनी एकमत, और सब गलत दिशा में। भीड़ का एक स्वर होना इस बात का सबूत नहीं कि वह सही है। तू भी कभी किसी ऐसे समूह में खड़ा हो सकता है जहाँ सब एक ही बात कह रहे हों। रुककर पूछ, क्या मसीह इस भीड़ के साथ है, या उसके सामने बँधा खड़ा है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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