7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 7

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यीशु कफरनहूम नाम के एक नगर में आए। वहाँ एक सूबेदार रहता था, सैनिकों का एक अफसर। उसका एक दास बहुत प्रिय था, और वह मरने पर था। सूबेदार ने यहूदियों के कुछ बुज़ुर्गों को यीशु के पास भेजा और कहलाया, "आकर मेरे दास को चंगा कर दीजिए।"

यीशु उसके घर की ओर चल पड़े। पर जब वे पास पहुँचे, सूबेदार ने मित्रों के द्वारा कहलाया, "हे प्रभु, कष्ट न उठाइए। मैं इस योग्य नहीं कि आप मेरी छत के नीचे आएँ। बस एक वचन कह दीजिए, मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। मैं भी अधीन मनुष्य हूँ, और जब सिपाही से कहता हूँ 'जा', तो वह जाता है।"

यह सुनकर यीशु को अचंभा हुआ। उन्होंने भीड़ से कहा, "मैंने इस्राएल में भी ऐसा विश्वास नहीं देखा।" जब लोग घर लौटे, दास पूरी तरह चंगा मिला।

कुछ दिन बाद यीशु नाईन नगर गए। उनके साथ चेले और बड़ी भीड़ थी। जैसे वे नगर के फाटक के पास पहुँचे, सामने से एक और भीड़ आती दिखी। लोग एक मुर्दे को ले जा रहे थे, एक जवान बेटा, अपनी विधवा माँ का इकलौता पुत्र। अब उसके पास कोई नहीं बचा था।

यीशु ने उसे देखा। उन्हें तरस आया। उन्होंने कहा, "मत रो।" फिर वे पास गए और अर्थी को छू लिया। उठानेवाले लोग ठहर गए। सन्नाटा छा गया। क्या होगा?

यीशु ने पुकारा, "हे जवान, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ!" और वह मुर्दा उठ बैठा और बोलने लगा! यीशु ने उसे उसकी माँ के हाथों सौंप दिया। सब डर गए और परमेश्वर की स्तुति करने लगे, "हमारे बीच एक बड़ा भविष्यद्वक्ता आया है। परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपादृष्टि की है।"

What Does This Mean?

ये दोनों घटनाएँ दिखाती हैं कि यीशु के पास सच में अधिकार है। उन्हें घर में जाने की भी ज़रूरत नहीं, एक वचन काफी है। उन्हें मौत से भी डर नहीं लगता, वे मौत को भी आज्ञा दे सकते हैं। पर ध्यान दीजिए, यीशु ने यह शोर-शराबे से नहीं किया। उन्होंने रोती हुई माँ को देखा और उनका मन पसीज गया। वे शक्तिशाली हैं, पर ठंडे नहीं। उनकी शक्ति हमेशा प्रेम के साथ आती है।

बाद में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने पूछवाया, "क्या आनेवाला तू ही है?" यीशु ने उत्तर दिया, "अंधे देखते हैं, लँगड़े चलते हैं, मुर्दे जिलाए जाते हैं, कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है।" यही उनके काम का प्रमाण था।

The Common Thread

इसी अध्याय में एक स्त्री आती है जिसने बहुत पाप किए थे। वह यीशु के पाँवों के पास रोती हुई आई, आँसुओं से उनके पाँव भिगोए, बालों से पोंछे, और इत्र मला। फरीसी शमौन मन में सोचने लगा कि यीशु को पता भी नहीं कि यह कैसी स्त्री है।

यीशु ने एक छोटी कहानी सुनाई। एक महाजन के दो कर्ज़दार थे, एक पर पाँच सौ का कर्ज़, दूसरे पर पचास का। उसने दोनों को माफ कर दिया। किसका प्रेम अधिक होगा? वही, जिसे अधिक माफ किया गया। यीशु ने स्त्री से कहा, "तेरे पाप क्षमा हुए… तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है।"

यही धागा पूरे अध्याय में चलता है: यीशु बीमार को चंगा करते हैं, मुर्दे को उठाते हैं, और पापी को क्षमा करते हैं। तीनों जगह उनके पास वही अधिकार है, क्योंकि वे वही हैं जिन्हें परमेश्वर ने भेजा था।

For You

आप भी यीशु से बात कर सकते हैं, जैसे सूबेदार ने की। जब आप किसी के लिए चिंतित हों, अपने भाई या दोस्त के लिए, तो यीशु से उसके लिए प्रार्थना कीजिए। आपको बड़े शब्दों की ज़रूरत नहीं, बस सच्चे दिल की। और जब आपसे गलती हो जाए, याद रखिए कि यीशु उस स्त्री की तरह आपको भी क्षमा करना चाहते हैं। उनके पास आइए और सच बताइए। वे दूर नहीं भगाते, वे पास बुलाते हैं।

Talk About It

सूबेदार ने कहा था कि यीशु को उसके घर आने की भी ज़रूरत नहीं, बस एक वचन काफी है। आपको क्या लगता है, क्यों उसे इतना भरोसा था?

विधवा माँ अपने बेटे को खो चुकी थी और फिर उसे वापस पाया। आपको क्या लगता है उसके मन में उस पल क्या चल रहा होगा?

Praying Together

हे प्रभु यीशु, आपके पास बीमारी, मौत और पाप से भी बड़ा अधिकार है। हम आपसे प्रार्थना करते हैं अपने प्रियजनों के लिए, जैसे सूबेदार ने की। हमें अपने पापों को आपके सामने लाने का साहस दीजिए, क्योंकि आप हमें क्षमा करना चाहते हैं। धन्यवाद कि आप पास आते हैं और हमारी सुनते हैं। आमीन।

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लूका 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 7 किस विषय में है?
यीशु कफरनहूम नाम के एक नगर में आए। वहाँ एक सूबेदार रहता था, सैनिकों का एक अफसर। उसका एक दास बहुत प्रिय था, और वह मरने पर था। सूबेदार ने यहूदियों के कुछ बुज़ुर्गों को यीशु के पास भेजा और कहलाया, "आकर मेरे दास को चंगा कर दीजिए।"
लूका 7 क्या कहता है?
कुछ दिन बाद यीशु नाईन नगर गए। उनके साथ चेले और बड़ी भीड़ थी। जैसे वे नगर के फाटक के पास पहुँचे, सामने से एक और भीड़ आती दिखी। लोग एक मुर्दे को ले जा रहे थे, एक जवान बेटा, अपनी विधवा माँ का इकलौता पुत्र। अब उसके पास कोई नहीं बचा था।
लूका 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
ये दोनों घटनाएँ दिखाती हैं कि यीशु के पास सच में अधिकार है। उन्हें घर में जाने की भी ज़रूरत नहीं, एक वचन काफी है। उन्हें मौत से भी डर नहीं लगता, वे मौत को भी आज्ञा दे सकते हैं। पर ध्यान दीजिए, यीशु ने यह शोर-शराबे से नहीं किया। उन्होंने रोती हुई माँ को देखा और उनका मन पसीज गया। वे शक्तिशाली हैं, पर ठंडे नहीं। उनकी शक्ति हमेशा प्रेम के साथ आती है।
बच्चे लूका 7 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु ने एक छोटी कहानी सुनाई। एक महाजन के दो कर्ज़दार थे, एक पर पाँच सौ का कर्ज़, दूसरे पर पचास का। उसने दोनों को माफ कर दिया। किसका प्रेम अधिक होगा? वही, जिसे अधिक माफ किया गया। यीशु ने स्त्री से कहा, "तेरे पाप क्षमा हुए... तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है।"
लूका 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
सूबेदार ने कहा था कि यीशु को उसके घर आने की भी ज़रूरत नहीं, बस एक वचन काफी है। आपको क्या लगता है, क्यों उसे इतना भरोसा था?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 43

शिमौन ने बिलकुल ठीक उत्तर दिया: "मेरी समझ में वह, जिसका उसने अधिक छोड़ दिया।" पर गौर कर, सही जवाब उसके होंठों पर था और आँसू उस स्त्री की आँखों में। क्षमा को समझना और क्षमा पाकर पिघल जाना, दो अलग बातें हैं। तेरा हिसाब कहाँ रुका है, सिर्फ़ जानने पर, या प्रेम तक पहुँचा?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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