3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

एक औरत का प्यार

व्याख्या

एक घर में बड़ी मेज थी। उस मेज पर अच्छा खाना था। यीशु वहाँ बैठे थे। एक आदमी ने उन्हें बुलाया था। उसका नाम शमौन था।

तभी दरवाज़े से एक स्त्री अंदर आई। उसके हाथ में एक छोटा बर्तन था। उसमें खुशबूदार इत्र था। वह धीरे-धीरे यीशु के पैरों के पास आई।

वह रोने लगी। उसके आँसू यीशु के पैरों पर गिरे। टप, टप, टप। फिर उसने अपने बाल खोले। उन्हीं बालों से उसने यीशु के पैर पोंछे। और फिर उसने उनके पैरों को बार-बार चूमा। आखिर में उसने वह सारा इत्र उनके पैरों पर डाल दिया।

पूरा कमरा उस इत्र की खुशबू से भर गया।

शमौन यह देख रहा था। उसने मन में सोचा, यह स्त्री अच्छी नहीं है। वह अपने में बुड़बुड़ाया।

इसका मतलब क्या है?

यीशु जानते थे शमौन क्या सोच रहा है। उन्होंने एक छोटी सी बात कही।

उन्होंने कहा, एक आदमी के पास दो लोग उधार लिए हुए थे। एक ने बहुत पैसे लिए थे। दूसरे ने थोड़े पैसे लिए थे। दोनों के पास चुकाने को कुछ नहीं था। तो उस आदमी ने दोनों को माफ कर दिया।

यीशु ने पूछा, कौन उससे ज़्यादा प्यार करेगा?

शमौन ने कहा, जिसका ज़्यादा माफ हुआ, वही।

यीशु ने कहा, तुमने ठीक कहा।

समान सूत्र

फिर यीशु ने स्त्री की तरफ देखा। उन्होंने कहा, मैं तुम्हारे घर आया। तुमने मेरे पैर धोने को पानी भी नहीं दिया। पर इसने अपने आँसुओं से मेरे पैर धोए। तुमने मुझे चूमा नहीं। पर इसने मेरे पैर चूमना नहीं छोड़ा।

यीशु ने कहा, इसके पाप, जो बहुत थे, माफ हुए। इसलिए इसने बहुत प्रेम किया।

फिर यीशु ने उस स्त्री को देखा। उन्होंने धीरे से कहा, तेरे पाप माफ हुए। तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है। शांति से जा।

यीशु ऐसे ही हैं। वे किसी को भी दूर नहीं करते। वे रोती हुई स्त्री के पैरों तक झुकते हैं। वे माफ करते हैं, बहुत सारा माफ करते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम भी यीशु के पास आ सकते हो, जैसे यह स्त्री आई। तुम उनसे बात कर सकते हो। तुम उन्हें बता सकते हो जो तुम्हारे दिल में है। यीशु तुम्हें दूर नहीं धकेलेंगे। वे तुम्हें प्यार से देखेंगे।

बातचीत के लिए:

उस स्त्री ने यीशु के पैरों पर क्या-क्या किया?

यीशु ने उस स्त्री से क्या कहा?

साथ में प्रार्थना

प्रिय यीशु, वह स्त्री आपके पास आई। आपने उसे माफ कर दिया। मुझे भी आपके पास आना अच्छा लगता है। मुझे भी प्यार से देखिए। आमीन।

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लूका 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 7 किस विषय में है?
एक घर में बड़ी मेज थी। उस मेज पर अच्छा खाना था। यीशु वहाँ बैठे थे। एक आदमी ने उन्हें बुलाया था। उसका नाम शमौन था।
लूका 7 क्या कहता है?
वह रोने लगी। उसके आँसू यीशु के पैरों पर गिरे। टप, टप, टप। फिर उसने अपने बाल खोले। उन्हीं बालों से उसने यीशु के पैर पोंछे। और फिर उसने उनके पैरों को बार-बार चूमा। आखिर में उसने वह सारा इत्र उनके पैरों पर डाल दिया।
लूका 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु जानते थे शमौन क्या सोच रहा है। उन्होंने एक छोटी सी बात कही।
नन्हे बच्चे लूका 7 से क्या सीख सकते हैं?
फिर यीशु ने स्त्री की तरफ देखा। उन्होंने कहा, मैं तुम्हारे घर आया। तुमने मेरे पैर धोने को पानी भी नहीं दिया। पर इसने अपने आँसुओं से मेरे पैर धोए। तुमने मुझे चूमा नहीं। पर इसने मेरे पैर चूमना नहीं छोड़ा।
लूका 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
फिर यीशु ने उस स्त्री को देखा। उन्होंने धीरे से कहा, तेरे पाप माफ हुए। तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है। शांति से जा।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 50

वह बिन बुलाए उस घर में आई थी, और सारा कमरा उसके बारे में फुसफुसा रहा था। पर यीशु ने भीड़ से बहस नहीं की, उसने सीधे उस स्त्री से कहा, "तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।" इत्र नहीं, आँसू नहीं, उसका भरोसा ही उसे बचा गया। जो कमरा तुझे दोषी ठहराता है, क्या तू उसकी आवाज़ से ज़्यादा मसीह की आवाज़ सुन पाता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 43

शिमौन ने बिलकुल ठीक उत्तर दिया: "मेरी समझ में वह, जिसका उसने अधिक छोड़ दिया।" पर गौर कर, सही जवाब उसके होंठों पर था और आँसू उस स्त्री की आँखों में। क्षमा को समझना और क्षमा पाकर पिघल जाना, दो अलग बातें हैं। तेरा हिसाब कहाँ रुका है, सिर्फ़ जानने पर, या प्रेम तक पहुँचा?

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