7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मत्ती 10

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यीशु अपने बारह चेलों को बुलाते हैं और उन्हें एक खास काम के लिए भेजते हैं। वे उन्हें अधिकार देते हैं कि वे बीमारों को चंगा करें, कोढ़ियों को शुद्ध करें और बुरी आत्माओं को निकालें। यह बारह चेलों के नाम भी यहाँ लिखे हैं, जिनमें पतरस, यूहन्ना, और यहूदा इस्करियोती भी शामिल है, जो बाद में यीशु को पकड़वाएगा। यीशु उन्हें पहले इस्राएल के लोगों के पास भेजते हैं, यह कहकर कि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। वे उन्हें सिखाते हैं कि रास्ते में कुछ भी अतिरिक्त न ले जाएँ, न पैसा, न अतिरिक्त कपड़े, क्योंकि जो उन्हें आश्रय देगा वह उनकी ज़रूरतें पूरी करेगा।

फिर यीशु एकदम सच बोलते हैं। वे कहते हैं कि यह काम आसान नहीं होगा। लोग उन्हें नहीं सुनेंगे, कुछ उन्हें सताएँगे, और परिवार के भीतर भी झगड़ा हो सकता है। यीशु यहाँ तक कहते हैं कि वे शांति नहीं बल्कि तलवार लेकर आए हैं, यानी उनके कारण परिवारों में अलगाव भी हो सकता है। लेकिन साथ ही यीशु भरोसा दिलाते हैं कि परमेश्वर उनकी एक-एक चिंता जानते हैं, यहाँ तक कि उनके सिर के बाल भी गिने हुए हैं। इसलिए डरने की ज़रूरत नहीं।

What Does This Mean?

यह अध्याय दिखाता है कि यीशु के पीछे चलना कोई आसान रास्ता नहीं है। यीशु अपने चेलों को झूठी उम्मीद नहीं देते। वे साफ कहते हैं, "मैं तुम्हें भेड़ों की तरह भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ।" यानी यह काम खतरे से भरा है। फिर भी वे उन्हें भेजते हैं, क्योंकि यह काम ज़रूरी है, लोगों को यह बताना कि परमेश्वर का राज्य पास आ गया है।

यहाँ एक बड़ा शब्द आता है, "सेंत-मेंत"। यीशु कहते हैं, "तुम ने सेंत-मेंत पाया है, सेंत-मेंत दो।" इसका मतलब है, जो अच्छाई चेलों को मुफ्त में मिली है, वही उन्हें बिना कुछ माँगे दूसरों तक पहुँचानी है। यह विश्वास किसी व्यापार जैसा नहीं है, जहाँ कुछ पाने के लिए कुछ देना पड़े। यह एक उपहार है जो आगे बढ़ाया जाता है।

यीशु यह भी कहते हैं कि डरने की बात शरीर की तकलीफ नहीं बल्कि यह है कि हम परमेश्वर से दूर हो जाएँ। यह एक कठिन बात है, और यह ठीक भी है कि इस पर सोचा जाए। यीशु हमें डराना नहीं चाहते, बल्कि यह दिखाना चाहते हैं कि परमेश्वर की नज़र में क्या सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

The Common Thread

यीशु अपने चेलों को अपने ही काम में शामिल करते हैं। जो यीशु करते थे, वही अधिकार वे चेलों को भी देते हैं। यह दिखाता है कि यीशु अकेले काम नहीं करना चाहते, वे चाहते हैं कि उनके लोग भी इस खुशखबरी को आगे फैलाएँ। जब यीशु कहते हैं, "जो कोई तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है," तो वे खुद को और अपने चेलों को एक गहरे रिश्ते में बाँधते हैं। यह एक वादा है, जो कोई भी उनके नाम से भेजे गए किसी को अपनाता है, वह असल में परमेश्वर को अपनाता है। बाइबल की पूरी कहानी में परमेश्वर हमेशा लोगों के बीच काम करने के लिए किसी को भेजते रहे हैं, और यहाँ यीशु यह सिलसिला आगे बढ़ाते हैं।

For You

शायद तुम्हारे जीवन में अभी यीशु के बारे में बोलना डर लगने जैसा हो सकता है, स्कूल में, दोस्तों के बीच। यह अध्याय झूठी तसल्ली नहीं देता कि सब आसान होगा। पर यह भी याद दिलाता है कि परमेश्वर तुम्हें छोटी-छोटी बातों में भी देखते हैं, तुम्हारी परवाह करते हैं। तुम गौरैया से कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो। अगली बार जब तुम्हें सच बोलने में डर लगे, याद रखना कि तुम अकेले नहीं हो।

Talk About It

यीशु कहते हैं कि वे शांति नहीं बल्कि तलवार लेकर आए हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है, और यह तुम्हें कैसा लगता है?

यीशु कहते हैं, "सेंत-मेंत पाया है, सेंत-मेंत दो।" इसका मतलब तुम्हारे अपने शब्दों में क्या है?

Praying Together

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमारी हर छोटी-बड़ी बात जानते हैं। जब डर लगे, हमें याद दिलाइए कि आप हमारे साथ हैं। हमें हिम्मत दीजिए कि हम यीशु के बारे में सच बोल सकें, और हमें दूसरों को वही प्रेम दिखाने में मदद कीजिए जो हमें आपसे मुफ्त में मिला है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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मत्ती 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मत्ती 10 किस विषय में है?
यीशु अपने बारह चेलों को बुलाते हैं और उन्हें एक खास काम के लिए भेजते हैं। वे उन्हें अधिकार देते हैं कि वे बीमारों को चंगा करें, कोढ़ियों को शुद्ध करें और बुरी आत्माओं को निकालें। यह बारह चेलों के नाम भी यहाँ लिखे हैं, जिनमें पतरस, यूहन्ना, और यहूदा इस्करियोती भी शामिल है, जो बाद में यीशु को पकड़वाएगा। यीशु उन्हें पहले इस्राएल के लोगों के पास भेजते हैं, यह कहकर कि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। वे उन्हें सिखाते हैं कि रास्ते में कुछ भी अतिरिक्त न ले जाएँ, न पैसा, न अतिरिक्त कपड़े, क्योंकि जो उन्हें आश्रय देगा वह उनकी ज़रूरतें पूरी करेगा।
मत्ती 10 क्या कहता है?
यह अध्याय दिखाता है कि यीशु के पीछे चलना कोई आसान रास्ता नहीं है। यीशु अपने चेलों को झूठी उम्मीद नहीं देते। वे साफ कहते हैं, "मैं तुम्हें भेड़ों की तरह भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ।" यानी यह काम खतरे से भरा है। फिर भी वे उन्हें भेजते हैं, क्योंकि यह काम ज़रूरी है, लोगों को यह बताना कि परमेश्वर का राज्य पास आ गया है।
मत्ती 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु यह भी कहते हैं कि डरने की बात शरीर की तकलीफ नहीं बल्कि यह है कि हम परमेश्वर से दूर हो जाएँ। यह एक कठिन बात है, और यह ठीक भी है कि इस पर सोचा जाए। यीशु हमें डराना नहीं चाहते, बल्कि यह दिखाना चाहते हैं कि परमेश्वर की नज़र में क्या सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
बच्चे मत्ती 10 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम्हारे जीवन में अभी यीशु के बारे में बोलना डर लगने जैसा हो सकता है, स्कूल में, दोस्तों के बीच। यह अध्याय झूठी तसल्ली नहीं देता कि सब आसान होगा। पर यह भी याद दिलाता है कि परमेश्वर तुम्हें छोटी-छोटी बातों में भी देखते हैं, तुम्हारी परवाह करते हैं। तुम गौरैया से कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो। अगली बार जब तुम्हें सच बोलने में डर लगे, याद रखना कि तुम अकेले नहीं हो।
मत्ती 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यीशु कहते हैं, "सेंत-मेंत पाया है, सेंत-मेंत दो।" इसका मतलब तुम्हारे अपने शब्दों में क्या है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

यीशु ने चेलों को बिना थैली, बिना रोटी भेजा, पर खाली हाथ नहीं। उनके पास देने को आशीष थी: "और जब घर में प्रवेश करो तो उस घर को आशीष देना।" जिस घर में वे मेहमान बनकर जा रहे थे, उसी घर को वे पहले कुछ देते हैं। सोचो, आज तुम जिस दरवाज़े से भीतर जाओगे, वहाँ तुम्हारा पहला शब्द क्या होगा? माँग या आशीष?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

अपने बटुओं में न तो सोना, और न चाँदी, और न ताँबा रखना।" यीशु अपने शिष्यों को खाली जेब के साथ भेजते हैं। कोई बचत नहीं, कोई योजना B नहीं। सिर्फ़ उस पिता पर भरोसा जो भेज रहा है। सोचो, तुम्हारी सुरक्षा कहाँ टिकी है? जिस दिन हाथ खाली होंगे, उसी दिन पता चलेगा कि परमेश्वर कितना भरा हुआ है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

यीशु अपने चेलों को खाली हाथ भेजते हैं: "न मार्ग के लिये झोली, न दो कुर्ते, न जूते, न लाठी लो, क्योंकि मजदूर को अपना भोजन मिलना चाहिए।" कोई सुरक्षा नहीं, सिर्फ़ भरोसा। और ध्यान दे, प्रभु ने यह नहीं कहा कि भूखे रहोगे। उसने कहा, तुम्हारी रोटी मेरी ज़िम्मेदारी है। तेरी झोली में जो जमा है, वह विश्वास है या डर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 32

यीशु ने यह बात तब कही जब वे अपने चेलों को भेड़ियों के बीच भेजे जा रहे थे। यानी "मान लेना" कोई आसान बात नहीं थी, उसकी कीमत थी। "इसलिए जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के सामने मान लूँगा।" सोचो, जिस जगह तुम चुप रह जाते हो, वहीं वह तुम्हारे नाम को पिता के सामने बोलने को तैयार खड़ा है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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