नहूम 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
नीनवे बहुत बड़ा और शक्तिशाली शहर था, अश्शूर देश की राजधानी। इसी शहर ने इस्राएल और यहूदा के लोगों को वर्षों तक सताया था, उन्हें डराया, लूटा, और गुलाम बनाया था। अब नहूम कहता है कि एक विनाश करनेवाली सेना नीनवे की ओर बढ़ रही है। शहर के लोगों को चेतावनी दी जाती है, "गढ़ को दृढ़ कर; अपनी कमर कस; अपना बल बढ़ा दे।" पर यह चेतावनी बहुत देर से आई है।
फिर नहूम बड़े ध्यान से बताता है कि हमला कैसा दिखता है। सैनिकों की ढालें लाल हैं, रथ आग जैसे चमकते हैं, वे बिजली की गति से सड़कों में दौड़ते हैं। सैनिक शहरपनाह की ओर भागते हुए लड़खड़ाते और गिरते हैं। नहरों के फाटक खुल जाते हैं, और राजमहल डर के मारे पिघल जाता है। रानी को नंगी करके बंदी बनाकर ले जाया जाता है, और उसकी दासियाँ पिंडुकियों की तरह छाती पीटकर रोती हैं। नीनवे, जो कभी पानी से भरे तालाब जैसा भरा-पूरा शहर था, अब खाली हो जाता है। लोग भाग रहे हैं, और कोई मुड़कर पीछे नहीं देखता।
लुटेरे चांदी और सोना लूटते हैं, पर इतना धन लूटने के बाद भी शहर खाली, सूना, वीरान रह जाता है। नहूम नीनवे की तुलना सिंह की मांद से करता है, जहाँ सिंह अपने बच्चों और सिंहनियों के लिए शिकार लाकर भर देता था। पर अब वह मांद उजड़ चुकी है। अध्याय के अंत में परमेश्वर स्वयं बोलते हैं, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।"
इसका क्या अर्थ है?
नीनवे केवल एक ताकतवर शहर नहीं था, वह एक सिंह जैसा था जो कमजोर देशों को फाड़कर खा जाता था। नहूम की भाषा हमें बताती है कि परमेश्वर ऐसी क्रूरता और अन्याय को चुपचाप नहीं देखते रहते। जो शक्तिशाली दूसरों को कुचलते हैं, उनके सामने भी एक दिन कोई खड़ा होगा। यह अध्याय पढ़ना आसान नहीं है, इसमें रोना है, डर है, तबाही है। पर नहूम इसे छिपाता नहीं। सच्चाई यह है कि अन्याय के परिणाम होते हैं, और परमेश्वर वह देखते हैं जिसे इंसान भूल जाना चाहते हैं। यह सोचकर हमें भी ठहरना चाहिए, क्यों परमेश्वर इतने धीरज से रुके रहे, फिर अचानक न्याय करने लगे? यह सवाल पाठ अपने आप पूरी तरह नहीं सुलझाता।
बड़ी कहानी से नाता
नहूम 2:2 में एक छोटा सा वाक्य छिपा है, "यहोवा याकूब की बड़ाई इस्राएल की बड़ाई के समान ज्यों की त्यों कर रहा है।" इसका मतलब है कि नीनवे का पतन केवल बदला नहीं है, बल्कि परमेश्वर अपने वाचा के लोगों, याकूब और इस्राएल, को फिर से सम्मान देने का वादा निभा रहे हैं। वाचा यानी वह ठोस वादा जो परमेश्वर ने अपने लोगों से किया था कि वे उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर अन्याय को अनदेखा नहीं करते, पर साथ ही अपने लोगों की परवाह भी करते हैं। बाद में यीशु मसीह में हम देखते हैं कि परमेश्वर ने न्याय और प्रेम दोनों को एक साथ रखा, क्रूस पर उन्होंने खुद वह दंड सहा जो हमें मिलना था, ताकि जो लोग नीनवे जैसे कठोर हैं, वे भी बदल सकें और क्षमा पा सकें।
तुम्हारे लिए
क्या तुमने कभी किसी को दूसरों पर रौब जमाते देखा है, स्कूल में, मोहल्ले में, या कहीं और? नीनवे की कहानी हमें याद दिलाती है कि ताकत का घमंड आखिरकार गिर जाता है। पर यह सवाल केवल दूसरों के बारे में नहीं, अपने बारे में भी सोचने का है, कहीं मैं भी किसी छोटे पर सिंह जैसा हावी तो नहीं होता? परमेश्वर उन्हें देखते हैं जिन्हें कुचला जाता है, और वे उन्हें भी देखते हैं जो कुचलते हैं। दोनों के लिए उनके पास कुछ कहना है।
बात करें
नहूम इतने विस्तार से नीनवे के डर और तबाही का वर्णन क्यों करता है, तुम्हें क्या लगता है?
क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर आज भी अन्याय करनेवालों के विरुद्ध खड़े होते हैं? कैसे?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, आप न्यायी हैं और आप कमजोरों को देखते हैं। हमें सिखाइए कि हम अपनी ताकत का उपयोग किसी को कुचलने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से करें। धन्यवाद कि यीशु मसीह में आपने प्रेम और न्याय दोनों दिखाए। आमीन।
नहूम 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहूम 2 किस विषय में है?
नहूम 2 क्या कहता है?
नहूम 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे नहूम 2 से क्या सीख सकते हैं?
नहूम 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
नीनवे का राजा अपने चुने हुए वीरों को बुलाता है, पर वही वीर दौड़ते हुए ठोकर खाते हैं। जो दीवार सदियों से अजेय मानी गई, उसे बचाने के लिए अब हड़बड़ी मची है। ताकत तब भी थी, पर परमेश्वर विरुद्ध था।
तुम भी सोचो, जिस चीज़ पर तुम्हारा भरोसा टिका है, वह उस दिन टिक पाएगी जब प्रभु स्वयं सामने खड़ा हो? सुरक्षा दीवारों में नहीं, उसके साथ चलने में है।
नीनवे सालों तक पानी के कुण्ड जैसी थी, जिसमें देश देश की दौलत जमा होती गई। पर जब बाँध टूटा, तो सब बह गया। अफसर चिल्लाते रह गए, "खड़े हो, खड़े हो," मगर "कोई मुँह नहीं मोड़ता।" जो जमा किया था, वही सबसे पहले भागा। तू भी सोच, जो तूने इकट्ठा किया है, क्या वह मुश्किल के दिन तेरे साथ ठहरेगा?
नीनवे ने वर्षों तक दूसरे देशों को लूटा था, और उसके खज़ाने भर गए थे। पर नहूम कहता है, "चाँदी को लूटो, सोने को लूटो! उसके रखे हुए धन का अन्त नहीं।" जो कभी लूटता था, आज खुद लुट रहा है। जो ढेर तुमने सुरक्षा के लिए जमा किया है, क्या वह सचमुच तुम्हें थाम सकेगा? सोचो, तुम्हारा भरोसा कहाँ टिका है।
नीनवे के रथ, उसके जवान सिंह, उसके दूत जिनकी आवाज़ से जातियाँ काँपती थीं। और परमेश्वर कहता है, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।" इससे भारी वाक्य कोई नहीं। जो ताकत दूसरों को डराकर खड़ी होती है, उसका अंत धुआँ है। सोच, तेरी मजबूती किस पर टिकी है? उस पर, जो तेरे साथ है, या उस पर, जिससे लोग डरते हैं?
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