बाइबल व्याख्या

नहूम 2

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

दृश्य

रथों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। लाल ढालें, लाल वर्दियाँ, लोहे की चमक जो आग की तरह भड़कती है। नीनवे की गलियों में योद्धा दौड़ रहे हैं, ठोकर खा रहे हैं, फिर उठकर शहरपनाह की ओर भागते हैं। और तभी नहरों के द्वार टूट जाते हैं, पानी राजभवन में घुसता है, और वह अजेय दिखनेवाला महल गलकर बैठ जाता है। रानी को नंगी करके बंदी बनाया जाता है, दासियाँ पंडुकों की तरह विलाप करती हैं, और सोने-चाँदी के ढेर लुटेरों के हाथ में हैं। नाहूम हमें एक फिल्म दिखा रहा है, फ्रेम दर फ्रेम, और उस साम्राज्य के अंत का जिसने सदियों तक दुनिया को कँपाया था।

पाठ

नाहूम 2 नीनवे के पतन का काव्यात्मक चित्रण है। यहोवा असीरिया के इस विशाल नगर पर आक्रमण करनेवाली सेना को भेजते हैं, नगर की दीवारें टूटती हैं, उसका खज़ाना लुट जाता है, और उसके "जवान सिंह" तलवार से मारे जाते हैं। अंत में परमेश्वर स्वयं कहते हैं, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।"

मर्म

यह अध्याय एक बात कहता है जिसे हमारा युग सुनना नहीं चाहता, कि परमेश्वर इतिहास के भीतर न्याय करते हैं। नीनवे कोई प्रतीक नहीं है, यह असल शहर था, टिगरिस नदी के किनारे, जिसकी दीवारें इतनी चौड़ी थीं कि उन पर रथ दौड़ सकते थे। और नाहूम कहते हैं कि वह गिरेगा, और वह गिरा भी, 612 ईसा पूर्व में। परमेश्वर की सहनशीलता अनंत नहीं है। जब कोई साम्राज्य अपनी क्रूरता को अपनी पहचान बना लेता है, जब वह अपने शिकार से अपनी माँद भरता है, तब यहोवा हस्तक्षेप करते हैं। यह "प्रेम का परमेश्वर बनाम न्याय का परमेश्वर" वाला झूठा विभाजन नहीं है। यही प्रेम है, कि उत्पीड़ित की चीख अनसुनी नहीं रहती।

सूत्र

पद 2 एक कुंजी है, "यहोवा याकूब की बड़ाई इस्राएल की बड़ाई के समान ज्यों की त्यों कर रहा है।" नीनवे का पतन इस्राएल की पुनर्स्थापना से जुड़ा है। जब भी परमेश्वर अन्याय को तोड़ते हैं, वे अपने लोगों के लिए स्थान बनाते हैं। यही पैटर्न मसीह में अपनी पूर्णता पाता है, जो क्रूस पर "प्रधानों और अधिकारियों को नंगा करके" उन पर विजय पाते हैं। नाहूम का "सत्यानाश करनेवाला" जो नीनवे पर चढ़ आता है, उस बड़े दिन की छाया है जब मेम्ना स्वयं न्यायी होकर आएगा। जो साम्राज्य अपने बल पर खड़े हैं, वे सब एक दिन "खाली, छूछी और सूनी" हो जाएंगे।

दर्पण

पद 9 पढ़िए, "चाँदी को लूटो, सोने को लूटो, उसके रखे हुए धन की बहुतायत।" नीनवे ने वर्षों तक इकट्ठा किया, और एक दिन में सब चला गया। हम भी बटोरते हैं, अपने बैंक खातों में, अपनी प्रतिष्ठा में, अपने बच्चों की उपलब्धियों में, अपने शरीर में जिसे हम जिम में गढ़ते हैं। और फिर एक फोन कॉल आती है, या रिपोर्ट आती है, या कोई रिश्ता टूटता है, और हमारा "राजभवन गलकर बैठ जाता है।" पद 10 का वर्णन बहुत सटीक है, "मन कच्चा हो गया, और पाँव काँपते हैं।" शरीर जानता है जब सुरक्षा की झूठी दीवार गिरती है। सवाल यह नहीं कि क्या आपकी दीवारें गिरेंगी, सवाल यह है कि जब गिरेंगी, तब क्या नीचे कोई चट्टान होगी।

मुख्य पात्र

इस अध्याय के अंत में परमेश्वर स्वयं बोलते हैं, और वे पाँच शब्दों में सब कुछ कह देते हैं, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।" यह वाक्य कँपानेवाला है। नाहूम के परमेश्वर वह भावुक देवता नहीं हैं जो सब कुछ सह लेते हैं। वे एक सिंह के सामने खड़े हैं, उस असीरियन सिंह के जिसने राष्ट्रों को फाड़ा, और कहते हैं, "बस, अब और नहीं।" इसी परमेश्वर ने योना के समय नीनवे को पश्चाताप का अवसर दिया था। पर पश्चाताप की एक पीढ़ी अगली पीढ़ी की क्रूरता को नहीं रोक सकती। यहोवा धैर्यवान हैं, पर अंधे नहीं। वे सुनते हैं, वे देखते हैं, और अंत में वे बोलते हैं। और जब वे बोलते हैं, तो साम्राज्य हिलते हैं।

प्रश्न

पर एक कठिन प्रश्न बाकी है। पद 7 में "हुसेब नंगी करके बँधुआई में ले ली जाएगी, और उसकी दासियाँ छाती पीटती हुई" रोती हैं। युद्ध में सबसे ज़्यादा दुख उन्हीं को होता है जिन्होंने अत्याचार नहीं किया, दासियाँ, बच्चे, आम स्त्रियाँ। नाहूम इस पर रुककर सफाई नहीं देता। क्या यह न्यायसंगत है? बाइबल इस प्रश्न को मिटाती नहीं। युद्ध का न्याय हमेशा टूटा हुआ न्याय होता है, इसमें निर्दोष भी पिसते हैं। शायद इसीलिए अंतिम न्याय मसीह के हाथ में है, क्योंकि केवल वे ही हर आँसू का हिसाब रखते हैं, अत्याचारी का भी और उसके सेवक का भी। यहाँ हमें मौन रहना सीखना होगा, उत्तर देने से पहले।

अंतर्पाठ

योना की पुस्तक इसकी उलटी छवि है। वहाँ नीनवे पश्चाताप करता है, यहाँ नष्ट होता है। एक ही शहर, दो पीढ़ियाँ, दो अंत। यह गंभीर चेतावनी है, अनुग्रह कभी वंशानुगत नहीं होता। और प्रकाशितवाक्य

Nahum में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Obadiah, Nahum and Zephaniah

Gordon Bridger

The shortest prophets, taken seriously and applied today.

Jonah, Nahum, Habakkuk, Zephaniah

James Bruckner

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Nahum 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नहूम 2 का क्या अर्थ है?
रथों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। लाल ढालें, लाल वर्दियाँ, लोहे की चमक जो आग की तरह भड़कती है। नीनवे की गलियों में योद्धा दौड़ रहे हैं, ठोकर खा रहे हैं, फिर उठकर शहरपनाह की ओर भागते हैं। और तभी नहरों के द्वार टूट जाते हैं, पानी राजभवन में घुसता है, और वह अजेय दिखनेवाला महल गलकर बैठ जाता है। रानी को नंगी करके बंदी बनाया जाता है, दासियाँ पंडुकों की तरह विलाप करती हैं, और सोने-चाँदी के ढेर लुटेरों के हाथ में हैं। नाहूम हमें एक फिल्म दिखा रहा है, फ्रेम दर फ्रेम, और उस साम्राज्य के अंत का जिसने सदियों तक दुनिया को कँपाया था।
नहूम 2 किस विषय में है?
नाहूम 2 नीनवे के पतन का काव्यात्मक चित्रण है। यहोवा असीरिया के इस विशाल नगर पर आक्रमण करनेवाली सेना को भेजते हैं, नगर की दीवारें टूटती हैं, उसका खज़ाना लुट जाता है, और उसके "जवान सिंह" तलवार से मारे जाते हैं। अंत में परमेश्वर स्वयं कहते हैं, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।"
नहूम 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह अध्याय एक बात कहता है जिसे हमारा युग सुनना नहीं चाहता, कि परमेश्वर इतिहास के भीतर न्याय करते हैं। नीनवे कोई प्रतीक नहीं है, यह असल शहर था, टिगरिस नदी के किनारे, जिसकी दीवारें इतनी चौड़ी थीं कि उन पर रथ दौड़ सकते थे। और नाहूम कहते हैं कि वह गिरेगा, और वह गिरा भी, 612 ईसा पूर्व में। परमेश्वर की सहनशीलता अनंत नहीं है। जब कोई साम्राज्य अपनी क्रूरता को अपनी पहचान बना लेता है, जब वह अपने शिकार से अपनी माँद भरता है, तब यहोवा हस्तक्षेप करते हैं। यह "प्रेम का परमेश्वर बनाम न्याय का परमेश्वर" वाला झूठा विभाजन नहीं है। यही प्रेम है, कि उत्पीड़ित की चीख अनसुनी नहीं रहती।
नहूम 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 2 एक कुंजी है, "यहोवा याकूब की बड़ाई इस्राएल की बड़ाई के समान ज्यों की त्यों कर रहा है।" नीनवे का पतन इस्राएल की पुनर्स्थापना से जुड़ा है। जब भी परमेश्वर अन्याय को तोड़ते हैं, वे अपने लोगों के लिए स्थान बनाते हैं। यही पैटर्न मसीह में अपनी पूर्णता पाता है, जो क्रूस पर "प्रधानों और अधिकारियों को नंगा करके" उन पर विजय पाते हैं। नाहूम का "सत्यानाश करनेवाला" जो नीनवे पर चढ़ आता है, उस बड़े दिन की छाया है जब मेम्ना स्वयं न्यायी होकर आएगा। जो साम्राज्य अपने बल पर खड़े हैं, वे सब एक दिन "खाली, छूछी और सूनी" हो जाएंगे।
नहूम 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पद 9 पढ़िए, "चाँदी को लूटो, सोने को लूटो, उसके रखे हुए धन की बहुतायत।" नीनवे ने वर्षों तक इकट्ठा किया, और एक दिन में सब चला गया। हम भी बटोरते हैं, अपने बैंक खातों में, अपनी प्रतिष्ठा में, अपने बच्चों की उपलब्धियों में, अपने शरीर में जिसे हम जिम में गढ़ते हैं। और फिर एक फोन कॉल आती है, या रिपोर्ट आती है, या कोई रिश्ता टूटता है, और हमारा "राजभवन गलकर बैठ जाता है।" पद 10 का वर्णन बहुत सटीक है, "मन कच्चा हो गया, और पाँव काँपते हैं।" शरीर जानता है जब सुरक्षा की झूठी दीवार गिरती है। सवाल यह नहीं कि क्या आपकी दीवारें गिरेंगी, सवाल यह है कि जब गिरेंगी, तब क्या नीचे कोई चट्टान होगी।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Nahum 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

नीनवे का राजा अपने चुने हुए वीरों को बुलाता है, पर वही वीर दौड़ते हुए ठोकर खाते हैं। जो दीवार सदियों से अजेय मानी गई, उसे बचाने के लिए अब हड़बड़ी मची है। ताकत तब भी थी, पर परमेश्वर विरुद्ध था।

तुम भी सोचो, जिस चीज़ पर तुम्हारा भरोसा टिका है, वह उस दिन टिक पाएगी जब प्रभु स्वयं सामने खड़ा हो? सुरक्षा दीवारों में नहीं, उसके साथ चलने में है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 3

पिता, जब चारों ओर ताकत की चमक और हथियारों का शोर डराने लगता है, मुझे याद दिला कि असली सुरक्षा तेरे हाथ में है। मैं न रथों पर भरोसा करूँ, न अपनी हिम्मत पर, सिर्फ तुझ पर। मेरे डरे हुए मन को थाम ले और अपनी शांति से भर दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

नीनवे सालों तक पानी के कुण्ड जैसी थी, जिसमें देश देश की दौलत जमा होती गई। पर जब बाँध टूटा, तो सब बह गया। अफसर चिल्लाते रह गए, "खड़े हो, खड़े हो," मगर "कोई मुँह नहीं मोड़ता।" जो जमा किया था, वही सबसे पहले भागा। तू भी सोच, जो तूने इकट्ठा किया है, क्या वह मुश्किल के दिन तेरे साथ ठहरेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

नीनवे ने वर्षों तक दूसरे देशों को लूटा था, और उसके खज़ाने भर गए थे। पर नहूम कहता है, "चाँदी को लूटो, सोने को लूटो! उसके रखे हुए धन का अन्त नहीं।" जो कभी लूटता था, आज खुद लुट रहा है। जो ढेर तुमने सुरक्षा के लिए जमा किया है, क्या वह सचमुच तुम्हें थाम सकेगा? सोचो, तुम्हारा भरोसा कहाँ टिका है।

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