नहूम 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
बहुत, बहुत समय पहले एक बड़ा शहर था। उसका नाम था नीनवे।
नीनवे के चारों ओर दीवारें थीं। ऊँची दीवारें। मोटी दीवारें। इतनी ऊँची कि ऊपर देखने पर टोपी गिर जाती।
शहर के भीतर बहुत सैनिक रहते थे। उनकी ढालें लाल थीं। चमकीली, लाल ढालें। उनके कपड़े भी लाल थे।
और उनके रथ! सुनो। पहिए गड़गड़ाते थे। धूल उड़ती थी। रथ सड़कों पर दौड़ते थे। बहुत तेज़। बिजली जैसे तेज़। लोहा आग की तरह चमकता था।
नीनवे के लोग सोचते थे: हम सबसे बड़े हैं। हमसे कोई नहीं जीत सकता।
पर नीनवे एक और चीज़ की तरह था। शेर की माँद की तरह।
क्या तुमने शेर की आवाज़ सुनी है? गरर्र। शेर पकड़ता है। शेर छीनता है। शेर अपनी माँद भर लेता है।
ऐसे ही नीनवे के लोग करते थे। वे दूसरों के पास जाते थे। और उनकी चाँदी छीन लेते थे। और उनका सोना छीन लेते थे। वे परमेश्वर के लोगों के पास भी गए। उन्होंने उनके अंगूर की डालियाँ तोड़ दीं। परमेश्वर के लोग रोए।
इसका अर्थ क्या है?
और परमेश्वर ने देखा।
परमेश्वर सब कुछ देखते हैं। वे रोना भी सुनते हैं।
फिर परमेश्वर ने बोला। ज़ोर से, साफ़ आवाज़ में। उन्होंने नीनवे से कहा: "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।"
और तब कुछ हुआ। नदी के फाटक खुल गए। पानी आया। बहुत पानी। पानी शहर में बह गया। ऊँची दीवारें पानी को रोक न सकीं।
सैनिक भागे। "खड़े हो! खड़े हो!" कोई चिल्लाया। पर कोई नहीं रुका।
और फिर? फिर नीनवे खाली हो गया। एकदम खाली और सूना।
कोई रथ नहीं गड़गड़ाया। कोई शेर नहीं गरजा। बिलकुल चुप।
परमेश्वर सबसे बलवान हैं। दीवारों से भी। रथों से भी। शेरों से भी।
जोड़नेवाला धागा
और परमेश्वर के लोग? उनके अंगूर टूट गए थे। वे दुखी थे।
पर परमेश्वर ने उन्हें भुलाया नहीं। कभी नहीं।
परमेश्वर ने कहा: मैं उन्हें फिर बड़ा बनाऊँगा। जैसे पहले था, वैसा ही।
परमेश्वर हमेशा अपने लोगों के पास लौटते हैं। बाद में वे स्वयं आए। छोटे बालक बनकर। उनका नाम यीशु है।
यीशु शेर की तरह छीनते नहीं। यीशु देते हैं। यीशु बच्चों को गोद में उठाते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे पास भी चीज़ें हैं। एक गुड़िया। एक गेंद। एक मीठा बिस्कुट।
कभी-कभी हम शेर जैसे बन जाते हैं। हम छीनते हैं। "यह मेरा है!" और दूसरा बच्चा रोता है।
परमेश्वर उस रोने को सुनते हैं। हर बार।
पर परमेश्वर तुमसे नाराज़ होकर दूर नहीं जाते। तुम उनसे कह सकते हो: मुझे माफ़ कर दीजिए।
और कल? कल तुम अपना बिस्कुट तोड़ सकते हो। और आधा दे सकते हो।
बातचीत करो
परमेश्वर ने नीनवे के ऊँची दीवारों वाले शहर से क्या कहा?
तुम्हारे पास कौन सी चीज़ है जो तुम किसी और के साथ बाँट सकते हो?
मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
आप सबसे बलवान हैं।
आप सब देखते हैं। आप रोना भी सुनते हैं।
मुझे छीनना बहुत अच्छा लगता है। मुझे माफ़ कर दीजिए।
मुझे बाँटना सिखाइए।
धन्यवाद कि आप मुझसे प्रेम करते हैं।
आमीन।
नहूम 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहूम 2 किस विषय में है?
नहूम 2 क्या कहता है?
नहूम 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे नहूम 2 से क्या सीख सकते हैं?
नहूम 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
नीनवे का राजा अपने चुने हुए वीरों को बुलाता है, पर वही वीर दौड़ते हुए ठोकर खाते हैं। जो दीवार सदियों से अजेय मानी गई, उसे बचाने के लिए अब हड़बड़ी मची है। ताकत तब भी थी, पर परमेश्वर विरुद्ध था।
तुम भी सोचो, जिस चीज़ पर तुम्हारा भरोसा टिका है, वह उस दिन टिक पाएगी जब प्रभु स्वयं सामने खड़ा हो? सुरक्षा दीवारों में नहीं, उसके साथ चलने में है।
नीनवे सालों तक पानी के कुण्ड जैसी थी, जिसमें देश देश की दौलत जमा होती गई। पर जब बाँध टूटा, तो सब बह गया। अफसर चिल्लाते रह गए, "खड़े हो, खड़े हो," मगर "कोई मुँह नहीं मोड़ता।" जो जमा किया था, वही सबसे पहले भागा। तू भी सोच, जो तूने इकट्ठा किया है, क्या वह मुश्किल के दिन तेरे साथ ठहरेगा?
नीनवे ने वर्षों तक दूसरे देशों को लूटा था, और उसके खज़ाने भर गए थे। पर नहूम कहता है, "चाँदी को लूटो, सोने को लूटो! उसके रखे हुए धन का अन्त नहीं।" जो कभी लूटता था, आज खुद लुट रहा है। जो ढेर तुमने सुरक्षा के लिए जमा किया है, क्या वह सचमुच तुम्हें थाम सकेगा? सोचो, तुम्हारा भरोसा कहाँ टिका है।
नीनवे के रथ, उसके जवान सिंह, उसके दूत जिनकी आवाज़ से जातियाँ काँपती थीं। और परमेश्वर कहता है, "मैं तेरे विरुद्ध हूँ।" इससे भारी वाक्य कोई नहीं। जो ताकत दूसरों को डराकर खड़ी होती है, उसका अंत धुआँ है। सोच, तेरी मजबूती किस पर टिकी है? उस पर, जो तेरे साथ है, या उस पर, जिससे लोग डरते हैं?
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें