फिलेमोन 1
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यह चिट्ठी बाइबल की सबसे छोटी चिट्ठियों में से एक है, और यह किसी बड़ी कलीसिया को नहीं, बल्कि एक आदमी को लिखी गई है। उसका नाम था फिलेमोन।
चिट्ठी लिखने वाला पौलुस है। पर देखो वह अपने बारे में क्या कहता है: "मसीह यीशु का कैदी।" पौलुस सच में जेल में बैठा है। उसके हाथ खाली नहीं हैं, उन पर बेड़ियाँ हैं। और फिर भी वह खुद को किसी राजा का कैदी नहीं कहता, बल्कि मसीह का। उसे लगता है कि वह जेल में है क्योंकि वह यीशु के बारे में बताना बंद नहीं करता।
फिलेमोन एक अमीर आदमी था। उसके घर में कलीसिया इकट्ठी होती थी, यानी विश्वास करने वाले लोग उसके घर में मिलते थे, गाते थे, प्रार्थना करते थे। पौलुस पहले उसकी तारीफ करता है, और वह तारीफ झूठी नहीं है: "तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।" सोचो, जैसे गर्मी में सूखी हुई घास पर पानी पड़ता है और वह फिर हरी हो जाती है। फिलेमोन लोगों के साथ ऐसा ही करता था।
पर पौलुस के पास एक कठिन सवाल भी है। उस ज़माने में अमीर लोगों के घर में दास होते थे, ऐसे नौकर जो अपने मालिक की संपत्ति माने जाते थे। फिलेमोन का एक दास था, उनेसिमुस। वह भाग गया था। और शायद जाते-जाते उसने कुछ नुकसान भी किया था, क्योंकि पौलुस लिखता है, "यदि उसने तेरी कुछ हानि की है, या उस पर तेरा कुछ आता है, तो मेरे नाम पर लिख ले।"
उस भागे हुए उनेसिमुस की मुलाकात कहीं जेल में पौलुस से हुई। और वहाँ कुछ हुआ जो पौलुस बहुत सुंदर शब्दों में कहता है: "मेरे अपने बच्चे उनेसिमुस के लिये जो मुझसे मेरी कैद में जन्मा है।" उनेसिमुस ने यीशु पर विश्वास किया। वह पौलुस का आत्मिक बेटा बन गया, इतना प्यारा कि पौलुस उसे "मेरे हृदय का टुकड़ा" कहता है।
अब पौलुस उसे वापस भेज रहा है। और चिट्ठी में वह फिलेमोन से एक बड़ी बात माँगता है: उनेसिमुस को सज़ा देने वाले मालिक की तरह नहीं, बल्कि भाई की तरह अपना लो। "अब से दास के समान नहीं, वरन् दास से भी उत्तम, अर्थात् भाई के समान।" और इससे भी आगे: "उसे इस प्रकार ग्रहण कर जैसे मुझे।" यानी उनेसिमुस के साथ ऐसा व्यवहार करो जैसे खुद पौलुस दरवाज़े पर खड़ा हो।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पौलुस हुक्म नहीं देता। वह कह सकता था, वह प्रेरित था, उसके पास अधिकार था। पर वह लिखता है कि वह "प्रेम से विनती" करना बेहतर समझता है, क्योंकि वह चाहता है कि फिलेमोन की भलाई "दबाव से नहीं पर आनन्द से हो।"
इसका क्या अर्थ है?
पौलुस दो लोगों के बीच खड़ा है और वह जानता है कि दोनों को चोट लगी है। एक ने भागकर धोखा दिया, दूसरा ठगा हुआ महसूस करता है। और पौलुस कहता है: कर्ज़ मेरे नाम लिख दो। मैं भर दूँगा।
यह क्षमा की तस्वीर है। क्षमा का मतलब यह नहीं कि जो हुआ वह मामूली था। पौलुस कहीं नहीं कहता कि उनेसिमुस ने कुछ गलत नहीं किया। क्षमा का मतलब है कि कोई कीमत चुकाने को तैयार हो जाता है, ताकि रिश्ता टूटा न रहे।
और यह भी सच है कि पौलुस बिल्कुल नहीं जानता कि फिलेमोन क्या करेगा। वह बस भरोसा करता है। चिट्ठी इसी उम्मीद के साथ खत्म होती है। बाइबल हमें नहीं बताती कि आगे क्या हुआ। यह हमें बेचैन कर सकता है, और यह ठीक है।
जोड़ने वाला धागा
"मेरे नाम पर लिख ले, मैं आप भर दूँगा।" ये शब्द पौलुस के हैं, पर वे किसी और की ओर इशारा करते हैं।
क्योंकि यही यीशु मसीह ने किया। हमारा कर्ज़, हमारा सारा गलत, उन्होंने अपने नाम लिख लिया और खुद चुकाया। और तब वे हमें अपने पिता के पास इस तरह लाते हैं जैसे पौलुस उनेसिमुस को भेजता है: "उसे इस प्रकार ग्रहण कर जैसे मुझे।"
इसीलिए यह चिट्ठी "अनुग्रह" शब्द से शुरू होती है और उसी से खत्म होती है। अनुग्रह का मतलब है: परमेश्वर की भलाई, जो कमाई नहीं जाती, जो मुफ्त मिलती है। उनेसिमुस उसे कमा नहीं सकता था। हम भी नहीं। इसलिए वह अनुग्रह है।
तेरे लिए
तेरे साथ भी कभी कोई ऐसा कर सकता है जिससे तुझे सच में चोट लगे। कोई दोस्त तेरा राज़ किसी और को बता दे। कोई तेरी चीज़ तोड़कर मुकर जाए।
तब दो रास्ते खुलते हैं। एक रास्ता है हिसाब याद रखना। दूसरा रास्ता है वह, जो पौलुस फिलेमोन के सामने रखता है: दरवाज़ा खुला रखना।
और तू पौलुस की जगह पर भी हो सकता है। जब कक्षा में दो लोग लड़ रहे हों, तो सबसे आसान है तमाशा देखना। सबसे कठिन है बीच में खड़ा होना और कहना, आओ, बात करें।
एक छोटा-सा सवाल अपने आप से पूछ: अगर कोई मेरे बारे में पौलुस जैसी चिट्ठी लिखता, तो क्या वह लिख पाता कि मेरे कारण किसी का मन "हरा भरा" हुआ?
इस पर बात करो
पौलुस हुक्म देने के बजाय विनती करता है, क्योंकि वह चाहता है कि फिलेमोन की भलाई मजबूरी से न हो। क्या भलाई करने का कारण मायने रखता है, या सिर्फ नतीजा?
बाइबल हमें नहीं बताती कि फिलेमोन ने क्या किया। तुझे क्या लगता है, और यह न जानना तुझे कैसा लगता है?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु यीशु, आपने हमारा कर्ज़ अपने नाम लिख लिया और खुद चुकाया। हमें यह समझने में मदद कीजिए कि अनुग्रह कितना बड़ा है। और जब किसी ने हमें चोट पहुँचाई हो, तब हमें दरवाज़ा खुला रखने का साहस दीजिए। आमीन।
फिलेमोन 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
फिलेमोन 1 किस विषय में है?
फिलेमोन 1 क्या कहता है?
फिलेमोन 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे फिलेमोन 1 से क्या सीख सकते हैं?
फिलेमोन 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस का यह पत्र एक निजी मामला था, एक भागे हुए दास के बारे में। फिर भी वह लिखता है, "और उस कलीसिया को, जो तेरे घर में है।" क्षमा का फैसला अकेले कमरे में नहीं, पूरे विश्वासी परिवार के सामने लिया जाना था।
तेरे घर में भी कोई कलीसिया है? वे लोग जो तेरे निर्णयों को देखते हैं, और जिनके सामने तुझे प्रेम में चलना है?
ओनेसिमुस वही आदमी है जो भागा था, शायद कुछ चुराकर। पर पौलुस फिलेमोन से कहता है, "और अब से दास के समान नहीं, वरन् दास से भी उत्तम, अर्थात् प्रिय भाई के समान।" कागज़ पर वह अब भी दास था, पर मसीह में रिश्ता बदल चुका था। जिससे तुम्हें चोट पहुँची है, क्या तुम उसे भाई कह पाओगे?
पौलुस के पास अधिकार था कि वह आज्ञा दे देता, फिर भी उसने कहा, "प्रेम के कारण विनती करना ही उचित जान पड़ा।" एक बूढ़ा आदमी, जंजीरों में, और फिर भी दबाव डालने के बजाय दिल से मिन्नत करता है। सोच, जहाँ तू सही है और हुक्म चला सकता है, क्या वहाँ प्रेम चुनने का साहस तुझमें है? अधिकार लोगों को झुकाता है, प्रेम उन्हें बदल देता है।
पौलुस को ओनेसिमुस की ज़रूरत थी। जेल में एक अपना आदमी, कितनी बड़ी राहत। फिर भी वह लिखता है, "उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।" चाहता था, पर रखा नहीं। उसने फिलेमोन की मर्ज़ी को अपनी ज़रूरत से ऊपर रखा। प्यार किसी को पकड़कर नहीं रखता, वह पूछता है। तू किसे अपनी ज़रूरत के कारण थामे बैठा है?
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