3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

फिलेमोन 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक कमरा था। बहुत अँधेरा कमरा। दीवारें पत्थर की, ठंडी। ज़मीन पर थोड़ा सूखा भूसा पड़ा था।

वहाँ एक बूढ़ा आदमी बैठा था। उसका नाम पौलुस था। उसके हाथों में लोहे की जंजीरें थीं। छन… छन… करती थीं।

पौलुस कैद में था। जेल में। क्यों? क्योंकि वह सब को यीशु के बारे में बताता था।

पौलुस के पास कागज़ था। और कलम भी। पौलुस चिट्ठी लिख रहा था।

उसके पास एक और आदमी बैठा था। उसका नाम उनेसिमुस था। उनेसिमुस चुपचाप बैठा था। वह डर रहा था। बहुत डर रहा था।

उनेसिमुस अपने घर से भाग गया था। बहुत दूर भाग गया था। उसके मालिक का नाम फिलेमोन था।

अब उनेसिमुस को घर जाना था। और वह डरता था। "फिलेमोन मुझ पर गुस्सा होगा," उसने सोचा।

पौलुस ने उनेसिमुस के कंधे पर हाथ रखा। "डरो मत," पौलुस ने कहा। "मैं तेरे लिये चिट्ठी लिख रहा हूँ।"

इसका अर्थ क्या है?

पौलुस लिखता है। धीरे-धीरे लिखता है।

"प्यारे फिलेमोन। मैं तेरे लिये परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ। तू यीशु से प्रेम करता है। तेरा मन बहुत अच्छा है।"

"अब सुन। मैं उनेसिमुस को तेरे पास भेज रहा हूँ। वह मेरे अपने बच्चे जैसा है।"

"उसे गुस्से से मत देख। उसे नौकर जैसा मत रख। उसे भाई जैसा रख।"

और फिर पौलुस कुछ और लिखता है। कुछ बहुत सुंदर।

"अगर उनेसिमुस ने तेरा कुछ नुकसान किया है, तो मेरे नाम पर लिख ले। मैं, पौलुस, आप भर दूँगा।"

पौलुस कहता है: उसकी कमी मैं पूरी करूँगा।

जोड़नेवाला धागा

चिट्ठी मुड़ गई। उनेसिमुस ने उसे कसकर पकड़ लिया।

और वह चल पड़ा। लंबा रास्ता। धूप गरम थी। पैरों पर धूल थी। दिल धक-धक करता था।

फिर एक दरवाज़ा। फिलेमोन का दरवाज़ा। खट… खट…

दरवाज़ा खुला।

और फिलेमोन ने अपनी बाँहें खोल दीं। "आ जा! मेरे भाई!"

जानते हो, यीशु भी ऐसा ही करते हैं। हमने भी बहुत कुछ गलत किया है। पर यीशु ने कहा: "मैं भर दूँगा।"

और परमेश्वर अपनी बाँहें खोलते हैं। और कहते हैं: "आ जा। तू मेरा है।"

तुम्हारे लिये

कभी-कभी कोई तुम्हारा खिलौना तोड़ देता है। या तुम्हें धक्का देता है। तब गुस्सा आता है, ना?

और तुम भी कभी गलत करते हो। तब डर लगता है।

पर सुनो। परमेश्वर गुस्से से दरवाज़ा बंद नहीं करते। वे बाँहें खोलते हैं।

और तुम भी अपनी छोटी बाँहें खोल सकते हो। किसी के लिये। आज ही।

इस पर बात करो

उनेसिमुस दरवाज़े के सामने खड़ा था। तुम्हें लगता है, उसका दिल कैसा लग रहा था?

तुम आज किसके लिये अपनी बाँहें खोल सकते हो?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु, धन्यवाद।

आप गुस्सा नहीं करते। आप बाँहें खोलते हैं।

मुझे भी अच्छा बनाइए।

आमीन।

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फिलेमोन 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

फिलेमोन 1 किस विषय में है?
एक कमरा था। बहुत अँधेरा कमरा। दीवारें पत्थर की, ठंडी। ज़मीन पर थोड़ा सूखा भूसा पड़ा था।
फिलेमोन 1 क्या कहता है?
उसके पास एक और आदमी बैठा था। उसका नाम उनेसिमुस था। उनेसिमुस चुपचाप बैठा था। वह डर रहा था। बहुत डर रहा था।
फिलेमोन 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
"प्यारे फिलेमोन। मैं तेरे लिये परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ। तू यीशु से प्रेम करता है। तेरा मन बहुत अच्छा है।"
नन्हे बच्चे फिलेमोन 1 से क्या सीख सकते हैं?
और वह चल पड़ा। लंबा रास्ता। धूप गरम थी। पैरों पर धूल थी। दिल धक-धक करता था।
फिलेमोन 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी-कभी कोई तुम्हारा खिलौना तोड़ देता है। या तुम्हें धक्का देता है। तब गुस्सा आता है, ना?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस का यह पत्र एक निजी मामला था, एक भागे हुए दास के बारे में। फिर भी वह लिखता है, "और उस कलीसिया को, जो तेरे घर में है।" क्षमा का फैसला अकेले कमरे में नहीं, पूरे विश्वासी परिवार के सामने लिया जाना था।

तेरे घर में भी कोई कलीसिया है? वे लोग जो तेरे निर्णयों को देखते हैं, और जिनके सामने तुझे प्रेम में चलना है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

ओनेसिमुस वही आदमी है जो भागा था, शायद कुछ चुराकर। पर पौलुस फिलेमोन से कहता है, "और अब से दास के समान नहीं, वरन् दास से भी उत्तम, अर्थात् प्रिय भाई के समान।" कागज़ पर वह अब भी दास था, पर मसीह में रिश्ता बदल चुका था। जिससे तुम्हें चोट पहुँची है, क्या तुम उसे भाई कह पाओगे?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

पौलुस के पास अधिकार था कि वह आज्ञा दे देता, फिर भी उसने कहा, "प्रेम के कारण विनती करना ही उचित जान पड़ा।" एक बूढ़ा आदमी, जंजीरों में, और फिर भी दबाव डालने के बजाय दिल से मिन्नत करता है। सोच, जहाँ तू सही है और हुक्म चला सकता है, क्या वहाँ प्रेम चुनने का साहस तुझमें है? अधिकार लोगों को झुकाता है, प्रेम उन्हें बदल देता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस को ओनेसिमुस की ज़रूरत थी। जेल में एक अपना आदमी, कितनी बड़ी राहत। फिर भी वह लिखता है, "उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।" चाहता था, पर रखा नहीं। उसने फिलेमोन की मर्ज़ी को अपनी ज़रूरत से ऊपर रखा। प्यार किसी को पकड़कर नहीं रखता, वह पूछता है। तू किसे अपनी ज़रूरत के कारण थामे बैठा है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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