6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

भजन संहिता 130

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

एक लड़के की कल्पना करो जो गहरे, अंधेरे कुएँ में गिर गया है। पानी उसकी छाती तक है, दीवारें फिसलन भरी हैं, वह ऊपर नहीं चढ़ पा रहा। वह पूरी ताकत से चिल्लाता है, "क्या कोई मेरी सुन रहा है?"

ऐसा ही कुछ भजन लिखनेवाला महसूस करता है। वह कहता है, "हे यहोवा, मैंने गहरे स्थानों में से तुझको पुकारा है!" यह कुआँ पानी का नहीं, उसके अपने दिल का है, जो गलत कामों और शर्म से भरा है। वह विनती करता है, हे प्रभु, मेरी सुन, मेरी गिड़गिड़ाहट पर ध्यान दे।

फिर वह एक डरावना सवाल पूछता है। यदि परमेश्वर हर गलत काम का हिसाब रखें, तो कौन उनके सामने खड़ा रह सकेगा? कोई नहीं। सबसे ताकतवर योद्धा भी नहीं, सबसे समझदार राजा भी नहीं। सब गिर जाएँगे।

पर फिर अचानक अंधेरे कमरे में एक दरवाज़ा खुलता है। "परन्तु तू क्षमा करनेवाला है।" परमेश्वर क्षमा करनेवाले हैं। इसी कारण लोग उनका भय मानते हैं, डर से नहीं, बल्कि चकित होकर, क्योंकि उनकी क्षमा इतनी बड़ी है।

अब भजन लिखनेवाला इंतज़ार की बात करता है। वह कहता है कि पहरुए जितनी बेसब्री से भोर का इंतज़ार करते हैं, वह उससे भी ज़्यादा परमेश्वर की बाट जोहता है। सोचो, रात भर दीवार पर खड़ा पहरेदार, आँखें थकी हुई, बस पहली किरण का इंतज़ार कर रहा है।

अंत में वह सबसे कहता है, इस्राएल, परमेश्वर पर आशा रखो! क्योंकि वे करुणा करनेवाले और पूरा छुटकारा देनेवाले हैं। वे अपने लोगों को उनके सारे पापों से छुड़ाएँगे।

What Does This Mean?

यह भजन हमें सिखाता है कि कभी-कभी हम भी उस गहरे कुएँ जैसा महसूस करते हैं। जब हमसे कुछ गलत हो जाता है, जब हम शर्मिंदा होते हैं, तब लगता है कोई हमारी सुन नहीं रहा। पर भजन लिखनेवाला छुप नहीं जाता। वह सीधे परमेश्वर को पुकारता है। और सबसे बड़ी बात, वह जानता है कि परमेश्वर क्षमा करनेवाले हैं। यह कोई कमज़ोर परमेश्वर नहीं हैं जो आँख मूँद लेते हैं, बल्कि ऐसे परमेश्वर हैं जो सच में माफ करते हैं, पूरी तरह से।

The Common Thread

यह भजन हमें यीशु मसीह की ओर इशारा करता है। यीशु ही वह हैं जिनके द्वारा परमेश्वर हमें गहरे कुएँ से बाहर निकालते हैं। जब यीशु क्रूस पर मरे, तब उन्होंने हमारे सारे गलत कामों का बोझ अपने ऊपर ले लिया। इसलिए अब हम उस भयानक सवाल से नहीं डरते, "कौन खड़ा रह सकेगा?" क्योंकि यीशु के कारण हम खड़े रह सकते हैं। परमेश्वर ने अपना वादा निभाया, वे पूरा छुटकारा देनेवाले हैं।

For You

जब तुमसे कुछ गलत हो जाए, जैसे झूठ बोलना या किसी को दुख देना, तो तुम उस गहरे कुएँ में फँसे जैसा महसूस कर सकते हो। उस समय छुपो मत। परमेश्वर से सीधे बात करो, जैसे भजन लिखनेवाले ने की। कहो, "परमेश्वर, मुझसे गलती हुई है, कृपया मुझे माफ करें।" और फिर, पहरुए की तरह भोर का इंतज़ार करो, भरोसा रखो कि परमेश्वर सुनेंगे और माफ करेंगे।

Talk About It

क्या तुम्हें कभी ऐसा लगा है कि तुम्हारी बात कोई नहीं सुन रहा? तब तुमने क्या किया?

पहरुआ भोर का इंतज़ार कैसे करता है? तुम परमेश्वर का इंतज़ार कैसे कर सकते हो?

Praying Together

प्रभु यीशु, कभी-कभी हम गहरे कुएँ जैसा महसूस करते हैं, जब हमसे गलती हो जाती है। धन्यवाद कि आप हमारी पुकार सुनते हैं और हमें माफ करते हैं। जैसे पहरुआ भोर का इंतज़ार करता है, वैसे ही हमें आप पर भरोसा रखना सिखाइए। आमीन।

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भजन संहिता 130 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

भजन संहिता 130 किस विषय में है?
एक लड़के की कल्पना करो जो गहरे, अंधेरे कुएँ में गिर गया है। पानी उसकी छाती तक है, दीवारें फिसलन भरी हैं, वह ऊपर नहीं चढ़ पा रहा। वह पूरी ताकत से चिल्लाता है, "क्या कोई मेरी सुन रहा है?"
भजन संहिता 130 क्या कहता है?
फिर वह एक डरावना सवाल पूछता है। यदि परमेश्वर हर गलत काम का हिसाब रखें, तो कौन उनके सामने खड़ा रह सकेगा? कोई नहीं। सबसे ताकतवर योद्धा भी नहीं, सबसे समझदार राजा भी नहीं। सब गिर जाएँगे।
भजन संहिता 130 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अब भजन लिखनेवाला इंतज़ार की बात करता है। वह कहता है कि पहरुए जितनी बेसब्री से भोर का इंतज़ार करते हैं, वह उससे भी ज़्यादा परमेश्वर की बाट जोहता है। सोचो, रात भर दीवार पर खड़ा पहरेदार, आँखें थकी हुई, बस पहली किरण का इंतज़ार कर रहा है।
बच्चे भजन संहिता 130 से क्या सीख सकते हैं?
यह भजन हमें सिखाता है कि कभी-कभी हम भी उस गहरे कुएँ जैसा महसूस करते हैं। जब हमसे कुछ गलत हो जाता है, जब हम शर्मिंदा होते हैं, तब लगता है कोई हमारी सुन नहीं रहा। पर भजन लिखनेवाला छुप नहीं जाता। वह सीधे परमेश्वर को पुकारता है। और सबसे बड़ी बात, वह जानता है कि परमेश्वर क्षमा करनेवाले हैं। यह कोई कमज़ोर परमेश्वर नहीं हैं जो आँख मूँद लेते हैं, बल्कि ऐसे परमेश्वर हैं जो सच में माफ करते हैं, पूरी तरह से।
भजन संहिता 130 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुमसे कुछ गलत हो जाए, जैसे झूठ बोलना या किसी को दुख देना, तो तुम उस गहरे कुएँ में फँसे जैसा महसूस कर सकते हो। उस समय छुपो मत। परमेश्वर से सीधे बात करो, जैसे भजन लिखनेवाले ने की। कहो, "परमेश्वर, मुझसे गलती हुई है, कृपया मुझे माफ करें।" और फिर, पहरुए की तरह भोर का इंतज़ार करो, भरोसा रखो कि परमेश्वर सुनेंगे और माफ करेंगे।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

हे यहोवा, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा रखता, तो हे प्रभु, कौन खड़ा रह सकता?" यह सवाल है, जवाब नहीं। और सवाल ही राहत बन जाता है। सोच, अगर परमेश्वर हर बात लिख रखता, तो तेरा नाम भी उस सूची में होता। पर अगली पंक्ति कहती है कि उसके पास क्षमा है। जिस बात से तू आज डर रहा है, वह उसके हाथ में पहले से माफ़ होने को तैयार है।

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