तीतुस 3
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस अपने पत्र के अंत में तीतुस को कुछ बहुत व्यावहारिक बातें लिखते हैं। तीतुस एक द्वीप पर मंडली की देखभाल कर रहा था, और वहाँ के विश्वासियों को याद दिलाना ज़रूरी था कि वे कैसे जिएँ। पौलुस कहते हैं कि लोग अधिकारियों की आज्ञा मानें, किसी की बुराई न करें, झगड़ालू न हों, बल्कि सबके साथ नम्रता से रहें।
फिर पौलुस कुछ चौंकाने वाला करते हैं। वे कहते हैं, हम भी पहले ऐसे ही थे। निर्बुद्धि, आज्ञा न माननेवाले, भ्रम में पड़े हुए, अपनी इच्छाओं के गुलाम, ईर्ष्या और बैर से भरे हुए। यह कोई सुंदर तस्वीर नहीं है, और पौलुस इसे छिपाते नहीं। वे साफ कहते हैं कि यह उनकी अपनी कहानी भी थी।
लेकिन फिर आता है वह शब्द जो सब कुछ बदल देता है, "पर"। पर जब परमेश्वर की भलाई और मनुष्यों पर उनका प्रेम प्रकट हुआ, तो उन्होंने हमें बचाया। यह हमारे अपने अच्छे कामों की वजह से नहीं हुआ, बल्कि परमेश्वर की दया से, नए जन्म के द्वारा और पवित्र आत्मा के काम से। यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर ने यह आत्मा हमारे ऊपर भरपूरी से उंडेल दिया।
पत्र के आखिरी हिस्से में पौलुस कुछ और सलाह देते हैं, बेकार के झगड़ों से बचने की, एक हठी और फूट डालने वाले व्यक्ति से दूर रहने की, और एक दूसरे की देखभाल करने की। अंत में वे अपने साथियों के नाम लेकर सबको नमस्कार भेजते हैं।
What Does This Mean?
इस अध्याय के बीच में एक शब्द छिपा है जो पूरी बाइबल की सबसे बड़ी कहानी को समेटता है, "अनुग्रह"। अनुग्रह का मतलब है, कुछ ऐसा पाना जिसे कमाया नहीं जा सकता। पौलुस बहुत ईमानदारी से कहते हैं कि हमारा उद्धार हमारे धार्मिक कामों की वजह से नहीं हुआ। यह सुनने में अजीब लग सकता है, क्योंकि हम अक्सर सोचते हैं कि अच्छा बनने से परमेश्वर खुश होते हैं। लेकिन पौलुस उल्टा कहते हैं, पहले परमेश्वर का प्रेम आता है, फिर बदलाव आता है।
यह भी ध्यान देने लायक है कि पौलुस अपने आप को उन बुरे लोगों में गिनते हैं जिनका वर्णन वे तीसरी आयत में करते हैं। एक प्रेरित, जिसने इतने पत्र लिखे और इतनी यात्राएँ कीं, वह भी कहता है, "हम भी पहले ऐसे ही थे"। यह हमें सिखाता है कि कोई भी व्यक्ति अपने आप को इतना अच्छा नहीं समझ सकता कि उसे परमेश्वर की दया की ज़रूरत न हो।
The Common Thread
इस अध्याय के केंद्र में यीशु मसीह खड़े हैं। पौलुस लिखते हैं कि परमेश्वर ने हमें यीशु मसीह के द्वारा पवित्र आत्मा दिया, ताकि हम उनके अनुग्रह से धर्मी ठहरें और अनंत जीवन की आशा के वारिस बनें। यह एक वादा है जो पूरी बाइबल में चलता है, परमेश्वर अपने लोगों को नया बनाना चाहते हैं, बाहर से नहीं बल्कि भीतर से। "नए जन्म का स्नान" जैसे शब्द हमें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर सिर्फ हमारी गलतियों को माफ नहीं करते, वे हमें भीतर से बदलते हैं। यह ठीक वही काम है जो यीशु मसीह ने क्रूस पर और अपने जी उठने के द्वारा शुरू किया।
For You
तुम शायद कभी-कभी सोचते हो कि अच्छा बच्चा या अच्छा दोस्त बनने के लिए तुम्हें बहुत मेहनत करनी होगी, ताकि परमेश्वर तुमसे खुश रहें। यह अध्याय कुछ और कहता है। परमेश्वर पहले तुमसे प्रेम करते हैं, तुम्हारे अच्छे बनने से पहले। यह प्रेम ही है जो तुम्हें बदलने की ताकत देता है।
इसका मतलब यह नहीं कि अच्छे काम बेकार हैं। पौलुस चाहता है कि विश्वासी भले कामों में लगे रहें, न कि झगड़े और बेकार बहस में। शायद इस हफ्ते तुम किसी के बारे में बुरा बोलने से बच सको, या किसी झगड़े में नम्रता दिखा सको। यह कोई नियम पूरा करना नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रेम का जवाब देना है।
Talk About It
अगर हमारा उद्धार अच्छे कामों से नहीं होता, तो फिर अच्छे काम करने का क्या मतलब रह जाता है?
क्या तुम्हें कभी किसी ऐसे व्यक्ति के साथ नम्रता से रहना मुश्किल लगा है जो तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता?
Praying Together
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने हमें प्यार किया इससे पहले कि हम अच्छे बनें। हमें दिखाइए कि आपकी दया कितनी बड़ी है, और हमें नम्रता और प्रेम से जीना सिखाइए। हमें अपने पवित्र आत्मा से नया बनाते रहिए। यीशु मसीह के नाम में, आमेन।
तीतुस 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
तीतुस 3 किस विषय में है?
तीतुस 3 क्या कहता है?
तीतुस 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे तीतुस 3 से क्या सीख सकते हैं?
तीतुस 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस पहले कहता है कि सबके साथ नम्रता से पेश आओ, और फिर उसका कारण बताता है: "क्योंकि हम भी पहले निर्बुद्धि, और आज्ञा न माननेवाले, और भटके हुए थे।" जिस इंसान पर तू आज चिढ़ रहा है, कभी तू भी ठीक वैसा ही था। भूल जाना बहुत आसान है। पर जिस दिन अपना पुराना चेहरा याद आ जाए, उस दिन ज़बान अपने आप नरम पड़ जाती है।
पत्री खत्म होते होते पौलुस नाम नहीं गिनाता, बस इतना कहता है, "जो विश्वास के कारण हम से प्रेम रखते हैं, उन्हें नमस्कार कहना।" यह वह प्रेम है जो न खून से आया, न फायदे से, बल्कि मसीह पर एक ही भरोसे से। क्रेते के उस दूर बैठे तीतुस को याद दिलाया गया कि वह अकेला नहीं है। आज तुम किसे यह याद दिला सकते हो?
अनुग्रह की गहरी बातों के तुरंत बाद पौलुस यह लिखता है, "क्योंकि मैंने वहीं जाड़ा काटने का निश्चय किया है।" जाड़ा, यात्रा, किसको कहाँ भेजना है। विश्वास सिर्फ ऊँचे सत्यों में नहीं, ठंड की तैयारी में भी जिया जाता है। और देख, तीतुस अकेला नहीं छोड़ा गया, कोई उसकी जगह आ रहा है। तेरा काम तुझ पर टिका नहीं है।
किसी को बदनाम न करें, झगड़ालू न हों, कोमल स्वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें।" पौलुस अगली ही आयत में कारण बताता है: हम भी कभी वैसे ही थे, भटके हुए। जिस इंसान के बारे में तू आज कड़वी बात कहने जा रहा है, कल तू खुद उसी जगह खड़ा था। दया इसलिए नहीं कि वह अच्छा है, बल्कि इसलिए कि तुझ पर दया हुई।
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