3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 इतिहास 28

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाई

राजा दाऊद बूढ़े हो गए थे। एक दिन उन्होंने सब लोगों को बुलाया। बड़े-बड़े हाकिम आए। सैनिक आए। सब जमा हुए यरूशलेम में।

दाऊद खड़े हुए। उनकी आवाज़ थोड़ी काँपी। उन्होंने कहा, "मेरे भाइयों, मेरी सुनो।"

दाऊद के मन में एक इच्छा थी। वे परमेश्वर के लिए एक घर बनाना चाहते थे। एक सुंदर भवन। पर परमेश्वर ने कहा, "नहीं दाऊद, तुम नहीं बनाओगे।" क्यों? क्योंकि दाऊद ने लड़ाइयों में बहुत खून बहाया था।

दाऊद को थोड़ा दुख हुआ। पर वे उदास नहीं रहे। उन्होंने एक और खबर सुनाई, एक खुशी की खबर।

"मेरा बेटा सुलैमान," दाऊद ने कहा, "वही परमेश्वर का घर बनाएगा।" परमेश्वर ने खुद सुलैमान को चुना था। परमेश्वर ने कहा था, "सुलैमान मेरा पुत्र ठहरेगा, और मैं उसका पिता ठहरूँगा।"

इसका मतलब क्या है?

फिर दाऊद सुलैमान की ओर मुड़े। सुलैमान वहीं खड़ा था, सुन रहा था। दाऊद ने प्यार से कहा, "हे मेरे पुत्र सुलैमान, अपने पिता के परमेश्वर को जान। पूरे मन से उसकी सेवा कर।"

दाऊद ने एक नक्शा भी दिया। कागज़ पर बना नक्शा, परमेश्वर के घर का नक्शा। कमरे कहाँ होंगे, दरवाज़े कहाँ होंगे। यह नक्शा परमेश्वर ने खुद दाऊद को दिखाया था।

और फिर सोना। चमकता हुआ सोना। चाँदी भी, चमकती हुई चाँदी। दीवटों के लिए, मेज़ों के लिए, कटोरों के लिए। दाऊद ने सब तौल-तौल कर दिया। हर एक चीज़ नाप कर, ध्यान से।

समान सूत्र

दाऊद ने सुलैमान से कहा, "मत डर। तेरा मन कच्चा न हो।" फिर उन्होंने एक बड़ी बात कही: "यहोवा परमेश्वर तेरे संग है।"

यही परमेश्वर की सबसे प्यारी बात है। वे हमेशा किसी के साथ रहते हैं। बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। यीशु भी लोगों के साथ रहे। उन्होंने भी कहा, "मत डरो, मैं तुम्हारे साथ हूँ।"

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हें कभी कोई बड़ा काम करना पड़ा है? जैसे नया खिलौना जोड़ना, या सीढ़ी चढ़ना? सुलैमान को भी एक बड़ा काम मिला था। बहुत बड़ा। पर वह डरा नहीं, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ थे।

जब भी तुम डरो, याद करो। परमेश्वर तुमसे कहते हैं, "मत डर, मैं तेरे संग हूँ।"

बात करें

तुम्हें क्या करते समय सबसे ज़्यादा डर लगता है?

क्या तुम्हें अच्छा लगता है कि परमेश्वर हमेशा तुम्हारे साथ रहते हैं?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर, आप हमेशा मेरे साथ रहते हैं। जब मुझे डर लगे, मुझे याद दिलाइए। आप मेरे पिता हैं। धन्यवाद यीशु के नाम में। आमीन।

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1 इतिहास 28 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 इतिहास 28 किस विषय में है?
राजा दाऊद बूढ़े हो गए थे। एक दिन उन्होंने सब लोगों को बुलाया। बड़े-बड़े हाकिम आए। सैनिक आए। सब जमा हुए यरूशलेम में।
1 इतिहास 28 क्या कहता है?
दाऊद को थोड़ा दुख हुआ। पर वे उदास नहीं रहे। उन्होंने एक और खबर सुनाई, एक खुशी की खबर।
1 इतिहास 28 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दाऊद ने एक नक्शा भी दिया। कागज़ पर बना नक्शा, परमेश्वर के घर का नक्शा। कमरे कहाँ होंगे, दरवाज़े कहाँ होंगे। यह नक्शा परमेश्वर ने खुद दाऊद को दिखाया था।
नन्हे बच्चे 1 इतिहास 28 से क्या सीख सकते हैं?
यही परमेश्वर की सबसे प्यारी बात है। वे हमेशा किसी के साथ रहते हैं। बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। यीशु भी लोगों के साथ रहे। उन्होंने भी कहा, "मत डरो, मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
1 इतिहास 28 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें अच्छा लगता है कि परमेश्वर हमेशा तुम्हारे साथ रहते हैं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

दाऊद ने यह नहीं कहा कि सुलैमान "मेरी गद्दी" पर बैठेगा, बल्कि "इस्राएल के ऊपर यहोवा के राज्य की गद्दी पर विराजे।" जिस सिंहासन के लिए वह जीवन भर लड़ा, उसे वह अंत में परमेश्वर का कहता है। तेरे हाथ में जो है, घर, काम, जिम्मेदारी, वह भी तेरा नहीं, उसका है। तू बस कुछ समय के लिए उस पर बैठा है। क्या तू ऐसे ही सँभालता है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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