3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 कुरिन्थियों 12

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बार एक छोटा सा हाथ था। वह बहुत उदास था।

हाथ ने कहा, "मैं आँख नहीं हूँ। तो शायद मैं देह का नहीं हूँ।"

क्या यह सच है? नहीं।

एक कान भी उदास था। कान ने कहा, "मैं आँख नहीं हूँ। तो शायद मैं देह का नहीं हूँ।"

क्या यह सच है? नहीं।

सोचो, अगर पूरी देह सिर्फ आँख होती। तो सुनना कैसे होता? कुछ नहीं सुनाई देता। और अगर पूरी देह सिर्फ कान होती, तो सूँघना कैसे होता? कुछ भी नहीं।

परमेश्वर ने हाथ को हाथ बनाया। परमेश्वर ने पाँव को पाँव बनाया। परमेश्वर ने आँख को आँख बनाया, और कान को कान बनाया। हर एक अंग अलग है। और हर एक अंग ज़रूरी है।

इसका क्या मतलब है?

आँख हाथ से नहीं कह सकती, "मुझे तेरी ज़रूरत नहीं।" सिर पाँवों से नहीं कह सकता, "मुझे तेरी ज़रूरत नहीं।" हर अंग को दूसरे अंग की ज़रूरत होती है।

अगर एक अंग को दर्द होता है, तो सारी देह को दर्द होता है। और अगर एक अंग खुश होता है, तो सारी देह खुश होती है। वे एक साथ रहते हैं। वे एक दूसरे की परवाह करते हैं।

सामरी सूत्र

पौलुस कहते हैं, यह एक देह है, और यह मसीह की तरह है।

जो लोग यीशु में विश्वास करते हैं, वे सब मिलकर मसीह की देह हैं। कोई हाथ जैसा है, कोई पाँव जैसा है, कोई आँख जैसा है। सब अलग हैं। और सब ज़रूरी हैं।

एक ही पवित्र आत्मा सबको वरदान देते हैं। किसी को अच्छी बातें सिखाने का वरदान, किसी को बीमार लोगों को अच्छा करने का वरदान, किसी को मदद करने का वरदान। सब अलग वरदान, पर एक ही पवित्र आत्मा।

तुम्हारे लिए

तुम भी इस देह का एक हिस्सा हो। शायद तुम बहुत छोटे हो। पर तुम ज़रूरी हो।

जब तुम किसी को गले लगाते हो, तुम हाथ की तरह हो। जब तुम किसी की बात सुनते हो, तुम कान की तरह हो। जब तुम किसी दुखी दोस्त के पास बैठते हो, तुम भी उसके साथ दुखी होते हो।

तुम कोई और नहीं बनना है। तुम सिर्फ वही बनो, जो परमेश्वर ने तुम्हें बनाया है।

बातचीत के लिए

तुम्हारी देह में कौन सा अंग तुम्हें सबसे पसंद है?

जब तुम्हारा दोस्त उदास होता है, तो तुम क्या कर सकते हो?

संगति में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आपने मुझे बनाया।

आपने मेरे हाथ बनाए, मेरे पाँव बनाए, मेरी आँखें बनाई।

धन्यवाद कि मैं ज़रूरी हूँ।

मुझे मेरे दोस्तों से प्यार करने में मदद करें।

आमीन।

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1 कुरिन्थियों 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 कुरिन्थियों 12 किस विषय में है?
हाथ ने कहा, "मैं आँख नहीं हूँ। तो शायद मैं देह का नहीं हूँ।"
1 कुरिन्थियों 12 क्या कहता है?
सोचो, अगर पूरी देह सिर्फ आँख होती। तो सुनना कैसे होता? कुछ नहीं सुनाई देता। और अगर पूरी देह सिर्फ कान होती, तो सूँघना कैसे होता? कुछ भी नहीं।
1 कुरिन्थियों 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
आँख हाथ से नहीं कह सकती, "मुझे तेरी ज़रूरत नहीं।" सिर पाँवों से नहीं कह सकता, "मुझे तेरी ज़रूरत नहीं।" हर अंग को दूसरे अंग की ज़रूरत होती है।
नन्हे बच्चे 1 कुरिन्थियों 12 से क्या सीख सकते हैं?
जो लोग यीशु में विश्वास करते हैं, वे सब मिलकर मसीह की देह हैं। कोई हाथ जैसा है, कोई पाँव जैसा है, कोई आँख जैसा है। सब अलग हैं। और सब ज़रूरी हैं।
1 कुरिन्थियों 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी इस देह का एक हिस्सा हो। शायद तुम बहुत छोटे हो। पर तुम ज़रूरी हो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

यदि सारी देह आँख ही होती तो सुनना कहाँ होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूँघना कहाँ होता?"

पौलुस मज़ाक नहीं कर रहा, वह दर्द को छू रहा है। कलीसिया में कोई तुझसे बेहतर बोलता है, बेहतर गाता है, और तू चुपचाप सोचता है कि तेरी जगह कहाँ है। पर सोच, अगर सब वही होते जो तुझे प्रभावशाली लगता है, तो देह अपाहिज होती। परमेश्वर ने तुझे कम नहीं बनाया, अलग बनाया। तेरी सेवा छोटी नहीं, बस दूसरी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

अब तुम मिलकर मसीह की देह हो, और अलग-अलग उसके अंग हो।" पौलुस यह उस कलीसिया से कह रहा है जो वरदानों पर आपस में लड़ रही थी। ध्यान दो, उसने नहीं कहा कि तुम देह जैसे हो। तुम देह हो। जब तुम मंडली से दूर रहते हो, कोई कुर्सी खाली नहीं रहती, मसीह की देह का एक अंग गायब रहता है। तुम्हारी कमी महसूस होती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

कान को किसी ने बाहर नहीं निकाला. वह खुद कहता है, "मैं आँख नहीं, इसलिए शरीर का नहीं." तुलना ही उसे अलग कर देती है.

शायद तू भी किसी को देखकर सोचता है, उसकी सेवा बड़ी है, मेरी कुछ भी नहीं. पर पौलुस पूछता है, "तो क्या वह इस कारण शरीर का नहीं?" तेरा अपनापन इस पर नहीं टिका कि तू किसी और जैसा बन जाए.

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

परन्तु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्मा करता है, और जिसे जो चाहता है बाँट देता है।" कुरिन्थुस की कलीसिया में लोग वरदानों को लेकर एक दूसरे से तुलना कर रहे थे। पौलुस उन्हें याद दिलाता है, चुनाव तुम्हारा नहीं था। जो तुम्हारे हाथ में है, वह आत्मा की सोची समझी पसंद है, तुम्हारे लिए। तो फिर किसी और का हिस्सा देखकर मन क्यों छोटा करना?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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