3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 थिस्सलुनीकियों 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पौलुस एक पत्र लिख रहे थे। मेज़ पर काग़ज़ था, हाथ में कलम थी। पौलुस मुस्कुरा रहे थे। वे अपने दोस्तों को याद कर रहे थे। ये दोस्त बहुत दूर रहते थे। शहर का नाम था थिस्सलुनीके।

पौलुस ने लिखा, "मैं तुम्हारे लिए परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ।" वे हर दिन प्रार्थना में उन्हें याद करते थे। हर दिन। बार-बार।

उन दोस्तों ने परमेश्वर पर भरोसा किया था। वे प्यार से एक दूसरे की मदद करते थे। और वे यीशु के आने का इंतज़ार करते थे। धीरज से इंतज़ार करते थे।

What Does This Mean?

पहले ये दोस्त पत्थर की मूरतों के आगे झुकते थे। मूरतें चुप रहती थीं। वे सुन नहीं सकती थीं। वे देख नहीं सकती थीं। ठंडी और सख़्त पत्थर की मूरतें।

पर फिर कुछ हुआ। इन दोस्तों ने सच्चे परमेश्वर के बारे में सुना। एक परमेश्वर जो जीता है। जो सुनता है। जो बोलता है। वे मूरतों से मुड़ गए। वे जीविते परमेश्वर की ओर फिर गए।

यह बड़ी बात थी। पत्थर से जीवन की ओर मुड़ना। सन्नाटे से एक ऐसी आवाज़ की ओर, जो प्यार से बोलती है।

The Common Thread

पौलुस ने लिखा कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे। परमेश्वर ने उन्हें उठाया। और अब यीशु स्वर्ग में हैं। एक दिन वे फिर से आएँगे। ऊपर से, स्वर्ग से, नीचे आएँगे।

यीशु हमें बचाते हैं। जो डर आ रहा है, उससे बचाते हैं। इसलिए ये दोस्त डरते नहीं थे। वे इंतज़ार करते थे। खुशी से इंतज़ार करते थे, जैसे कोई अपने पापा के घर लौटने का इंतज़ार करता है।

For You

तुम भी परमेश्वर से बात कर सकते हो। सुबह, रात, कभी भी। परमेश्वर तुम्हारी सुनते हैं। वे चुप नहीं रहते, जैसे पत्थर की मूरत।

तुम अपने दोस्तों से भी प्यार से पेश आ सकते हो। छोटी-छोटी बातों में। एक खिलौना बाँटकर। एक गले लगाकर।

और तुम भी यीशु का इंतज़ार कर सकते हो। जैसे कोई खिड़की से बाहर देखता है, यह सोचकर, "वे कब आएँगे?"

Talk About It

तुमने कभी पत्थर की कोई चीज़ छुई है? क्या वह बोल सकती है?

तुम परमेश्वर से क्या कहना चाहते हो, अभी?

Praying Together

प्यारे परमेश्वर, आप जीते हैं। आप सुनते हैं। मुझे आपसे प्यार है। मुझे यीशु के आने का इंतज़ार करना सिखाइए। आमीन।

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1 थिस्सलुनीकियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 थिस्सलुनीकियों 1 किस विषय में है?
पौलुस एक पत्र लिख रहे थे। मेज़ पर काग़ज़ था, हाथ में कलम थी। पौलुस मुस्कुरा रहे थे। वे अपने दोस्तों को याद कर रहे थे। ये दोस्त बहुत दूर रहते थे। शहर का नाम था थिस्सलुनीके।
1 थिस्सलुनीकियों 1 क्या कहता है?
पहले ये दोस्त पत्थर की मूरतों के आगे झुकते थे। मूरतें चुप रहती थीं। वे सुन नहीं सकती थीं। वे देख नहीं सकती थीं। ठंडी और सख़्त पत्थर की मूरतें।
1 थिस्सलुनीकियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस ने लिखा कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे। परमेश्वर ने उन्हें उठाया। और अब यीशु स्वर्ग में हैं। एक दिन वे फिर से आएँगे। ऊपर से, स्वर्ग से, नीचे आएँगे।
नन्हे बच्चे 1 थिस्सलुनीकियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
तुम अपने दोस्तों से भी प्यार से पेश आ सकते हो। छोटी-छोटी बातों में। एक खिलौना बाँटकर। एक गले लगाकर।
1 थिस्सलुनीकियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्यारे परमेश्वर, आप जीते हैं। आप सुनते हैं। मुझे आपसे प्यार है। मुझे यीशु के आने का इंतज़ार करना सिखाइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पौलुस चिट्ठी का पता लिखता है, पर वह पता कोई गली या शहर नहीं: "थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम, जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है।" वे उस शहर में रहते थे जहाँ उन्हें सताया गया, फिर भी उनका असली ठिकाना परमेश्वर था। तेरे हालात तेरा पता नहीं हैं। तू मसीह में है, यही तेरी पहचान है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

थिस्सलुनीकियों ने मूरतों से मुँह फेरा, जीवित परमेश्वर की सेवा में लगे, और साथ ही "स्वर्ग से उसके पुत्र के आने की बाट जोहते" रहे। सेवा और प्रतीक्षा, दोनों एक साथ। तुम्हारा इंतज़ार खाली बैठना नहीं है। जो मरे हुओं में से जी उठा, वही आ रहा है। क्या तुम्हारी आँखें उस दिन पर टिकी हैं, या बस आज की चिंताओं पर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन् सामर्थ्य और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्चय के साथ पहुँचा है।" पौलुस ने केवल बातें नहीं छोड़ीं, उसने अपना जीवन थिस्सलुनीके के लोगों के बीच खोल दिया। इसलिए वह जोड़ता है, "जैसा तुम जानते हो कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे।" तुम जिन्हें मसीह के बारे में बताते हो, क्या वे तुम्हें भी देख पाते हैं?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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