3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 कुरिन्थियों 9

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पौलुस एक आदमी था। वह गाँव-गाँव जाता था। धूप में चलता था। पैरों में धूल लगती थी। वह लोगों को यीशु के बारे में बताता था। सुनो, पौलुस भी काम करता था। किसान खेत में काम करता है। फिर वह खुद फल खाता है। चरवाहा भेड़ों की रखवाली करता है। वह उनका दूध पीता है। सिपाही लड़ता है। उसे भी भोजन मिलता है। पौलुस भी ऐसे खाना पा सकता था। लोग उसे खिला सकते थे। पर पौलुस ने ऐसा नहीं किया। उसने कहा, "मैं मुफ्त में बताऊँगा।" उसे कुछ नहीं चाहिए था। बस लोग यीशु को जान लें, यही चाहता था।

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस सबके लिए बदल जाता था। यहूदी के पास वह यहूदी जैसा बना। कमज़ोर के पास वह कमज़ोर जैसा बना। वह ऐसा क्यों करता था? ताकि और लोग यीशु को जान सकें। पौलुस अपने बारे में नहीं सोचता था। वह दूसरों के बारे में सोचता था। भूखा भी रहा। थका भी हुआ। पर वह रुका नहीं।

एक ही कहानी

सोचो, एक दौड़ होती है। मैदान में बहुत बच्चे दौड़ रहे हैं। धूल उड़ रही है। सब दौड़ते हैं, पर इनाम एक को मिलता है। पौलुस भी ऐसे दौड़ता था। पूरी ताकत से। वह अपने शरीर को भी सिखाता था। जैसे एक पहलवान अभ्यास करता है। दिन-रात मेहनत करता है। पौलुस का इनाम मुरझाने वाला नहीं था। वह इनाम यीशु देते हैं। और यीशु ने भी सब कुछ दिया। अपने बारे में नहीं सोचा। अपनी जान भी दे दी। पौलुस यीशु जैसा बनना चाहता था।

तुम्हारे लिए

तुम भी दौड़ सकते हो। जब तुम अपना खिलौना किसी को देते हो, यह दौड़ना है। जब तुम धीरे बोलते हो, प्यार से, यह दौड़ना है। जब तुम किसी को मदद करते हो, यह दौड़ना है। पौलुस की तरह दौड़ो। धीरे-धीरे, यीशु के पास।

बात करें

अगर तुम्हारे पास एक अच्छी चीज़ है, तुम उसे किसे दे सकते हो? दौड़ते हुए तुम्हें कैसा लगता है, थकान या खुशी?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर, धन्यवाद पौलुस के लिए। वह यीशु के बारे में बताता रहा। मुझे भी सिखाइए दूसरों से प्यार करना। मुझे भी दौड़ना सिखाइए, आपकी ओर। आमीन।

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1 कुरिन्थियों 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 कुरिन्थियों 9 किस विषय में है?
पौलुस एक आदमी था। वह गाँव-गाँव जाता था। धूप में चलता था। पैरों में धूल लगती थी। वह लोगों को यीशु के बारे में बताता था। सुनो, पौलुस भी काम करता था। किसान खेत में काम करता है। फिर वह खुद फल खाता है। चरवाहा भेड़ों की रखवाली करता है। वह उनका दूध पीता है। सिपाही लड़ता है। उसे भी भोजन मिलता है। पौलुस भी ऐसे खाना पा सकता था। लोग उसे खिला सकते थे। पर पौलुस ने ऐसा नहीं किया। उसने कहा, "मैं मुफ्त में बताऊँगा।" उसे कुछ नहीं चाहिए था। बस लोग यीशु को जान लें, यही चाहता था।
1 कुरिन्थियों 9 क्या कहता है?
पौलुस सबके लिए बदल जाता था। यहूदी के पास वह यहूदी जैसा बना। कमज़ोर के पास वह कमज़ोर जैसा बना। वह ऐसा क्यों करता था? ताकि और लोग यीशु को जान सकें। पौलुस अपने बारे में नहीं सोचता था। वह दूसरों के बारे में सोचता था। भूखा भी रहा। थका भी हुआ। पर वह रुका नहीं।
1 कुरिन्थियों 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सोचो, एक दौड़ होती है। मैदान में बहुत बच्चे दौड़ रहे हैं। धूल उड़ रही है। सब दौड़ते हैं, पर इनाम एक को मिलता है। पौलुस भी ऐसे दौड़ता था। पूरी ताकत से। वह अपने शरीर को भी सिखाता था। जैसे एक पहलवान अभ्यास करता है। दिन-रात मेहनत करता है। पौलुस का इनाम मुरझाने वाला नहीं था। वह इनाम यीशु देते हैं। और यीशु ने भी सब कुछ दिया। अपने बारे में नहीं सोचा। अपनी जान भी दे दी। पौलुस यीशु जैसा बनना चाहता था।
नन्हे बच्चे 1 कुरिन्थियों 9 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी दौड़ सकते हो। जब तुम अपना खिलौना किसी को देते हो, यह दौड़ना है। जब तुम धीरे बोलते हो, प्यार से, यह दौड़ना है। जब तुम किसी को मदद करते हो, यह दौड़ना है। पौलुस की तरह दौड़ो। धीरे-धीरे, यीशु के पास।
1 कुरिन्थियों 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम्हारे पास एक अच्छी चीज़ है, तुम उसे किसे दे सकते हो? दौड़ते हुए तुम्हें कैसा लगता है, थकान या खुशी?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस के पास कोई प्रमाणपत्र नहीं था, कोई सिफारिशी चिट्ठी नहीं। उसने कहा, "तुम प्रभु में मेरी प्रेरिताई पर छाप हो।" उसका सबूत कागज़ नहीं, बदले हुए लोग थे।

सोचो, तुम्हारी सेवा का सबूत क्या है? शायद वह कोई नाम या पद नहीं, बल्कि वह एक इंसान है जो तुम्हारे कारण यीशु को जान पाया।

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बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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