3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

योना 4

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

कहानी क्या कहती है

योना बहुत गुस्सा था। बहुत, बहुत गुस्सा। उसका मुँह लाल हो गया था।

क्यों? नीनवे शहर के लोग बुरे थे। परमेश्वर ने कहा था कि वे सज़ा पाएँगे। पर लोग रोए। उन्होंने कहा, "हमें माफ़ करो।" और परमेश्वर ने उन्हें माफ़ कर दिया।

योना यह नहीं चाहता था। योना चाहता था कि लोग सज़ा पाएँ।

योना शहर से बाहर गया। वह एक पहाड़ी पर बैठ गया। धूप बहुत तेज़ थी। बहुत गरम। योना ने पत्तों से एक छोटा सा छप्पर बनाया। वह उसकी छाया में बैठ गया।

तब परमेश्वर ने कुछ अच्छा किया। परमेश्वर ने एक पौधा उगाया। एक बड़ा, हरा पौधा। उसके पत्ते बड़े थे। योना के सिर के ऊपर छाया हो गई। ठंडी, अच्छी छाया।

योना बहुत खुश हुआ। "वाह!" उसने कहा। "यह पौधा कितना अच्छा है!"

पर अगली सुबह… एक छोटा कीड़ा आया। बहुत छोटा। उसने पौधे को काटा। और पौधा सूख गया। बिलकुल सूख गया।

फिर सूरज निकला। और गरम हवा चली। बहुत गरम। योना का सिर तपने लगा।

योना फिर गुस्सा हुआ। "मेरा पौधा! मेरा प्यारा पौधा!"

तब परमेश्वर ने योना से बात की। धीरे से। प्यार से।

"योना," परमेश्वर ने कहा। "तुझे इस छोटे पौधे पर तरस आता है। तूने इसे नहीं उगाया। यह एक रात में आया, एक रात में गया। पर तू रोता है।"

"और नीनवे में? वहाँ एक लाख बीस हज़ार लोग रहते हैं। छोटे बच्चे भी। बहुत सारे जानवर भी। क्या मुझे उन पर तरस न आए?"

इसका क्या मतलब है

परमेश्वर का दिल बहुत बड़ा है। बहुत, बहुत बड़ा।

परमेश्वर हर एक व्यक्ति से प्यार करते हैं। बुरे लोगों से भी। दूर देश के लोगों से भी। हर बच्चे से भी। जानवरों से भी।

योना को यह समझना मुश्किल था। पर परमेश्वर उसे प्यार से समझा रहे थे।

बड़ी कहानी

बहुत साल बाद, प्रभु यीशु आए। यीशु ने भी हर एक से प्यार किया। छोटे बच्चों से। बीमार लोगों से। उन लोगों से भी जिन्हें कोई पसंद नहीं करता था।

यीशु का दिल परमेश्वर के दिल जैसा है। बहुत बड़ा। सबके लिए जगह।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हें कभी किसी पर गुस्सा आता है? शायद तुम्हारे भाई पर? या दोस्त पर?

परमेश्वर कहते हैं, "मेरा दिल बड़ा है। तुम्हारा दिल भी बड़ा हो सकता है।"

तुम भी प्यार कर सकते हो। जैसे परमेश्वर करते हैं।

बात करो

तुम्हें कब गुस्सा आता है? क्या तुम मुझे बता सकते हो?

परमेश्वर योना के पौधे से भी ज़्यादा किस चीज़ से प्यार करते थे?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आपका दिल बहुत बड़ा है। आप सबसे प्यार करते हैं। मेरा दिल भी बड़ा कीजिए। मुझे प्यार करना सिखाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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योना 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

योना 4 किस विषय में है?
योना बहुत गुस्सा था। बहुत, बहुत गुस्सा। उसका मुँह लाल हो गया था।
योना 4 क्या कहता है?
योना बहुत खुश हुआ। "वाह!" उसने कहा। "यह पौधा कितना अच्छा है!"
योना 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
"योना," परमेश्वर ने कहा। "तुझे इस छोटे पौधे पर तरस आता है। तूने इसे नहीं उगाया। यह एक रात में आया, एक रात में गया। पर तू रोता है।"
नन्हे बच्चे योना 4 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत साल बाद, प्रभु यीशु आए। यीशु ने भी हर एक से प्यार किया। छोटे बच्चों से। बीमार लोगों से। उन लोगों से भी जिन्हें कोई पसंद नहीं करता था।
योना 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर योना के पौधे से भी ज़्यादा किस चीज़ से प्यार करते थे?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

योना कहता है, "इसलिए अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।" ध्यान दे, यह निराशा हार के कारण नहीं थी। नीनवे बच गया था, और यही उसे असहनीय लगा। परमेश्वर की दया उसके दुश्मनों तक पहुँची, और वह जीना ही नहीं चाहता था। तुझे किसकी क्षमा खटकती है? जिस व्यक्ति को तू माफ़ होते नहीं देखना चाहता, उसी के लिए शायद परमेश्वर तुझसे बात कर रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

योना नीनवे पर दया देखकर क्रोधित हुआ, पर एक पेड़ की छाया पाकर "बहुत आनन्दित हुआ।" पूरी किताब में वह पहली बार खुश होता है, और वजह है उसके सिर पर पड़ी ठंडी छाया, न कि बचाए गए हज़ारों लोग।

सोचो, तुम्हें आखिरी बार किस बात से इतनी खुशी हुई? अपनी सुविधा से, या किसी और पर मिली दया से?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

योना नगर के भीतर जाकर लोगों के साथ रोया नहीं, वह बाहर बैठ गया। "वहाँ उसने अपने लिए एक छप्पर बनाया, और उसकी छाया में बैठकर देखता रहा कि नगर का क्या होगा।" अपने लिए छाया, और दूसरों के लिए विनाश की प्रतीक्षा। कहीं तुम भी किसी के गिरने का इंतज़ार तो नहीं कर रहे, आराम से बैठकर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

योना गुस्से में है, और परमेश्वर उसे डाँटता नहीं। वह बस पूछता है, "क्या तेरा क्रोध करना उचित है?" एक सवाल, जो योना को अपने ही दिल के भीतर झाँकने पर मजबूर करता है। सोचो, तुम्हारे गुस्से के बीच भी परमेश्वर तुमसे बात करना छोड़ता नहीं। वह पूछता है, ताकि तुम खुद देख सको कि तुम किस पर नाराज़ हो, और क्यों।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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