3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 थिस्सलुनीकियों 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक आदमी था, उसका नाम पौलुस था। पौलुस दूर-दूर जाता था। वह लोगों को परमेश्वर की बातें सुनाता था। एक शहर था, उसका नाम थिस्सलुनीके था। वहाँ पौलुस गया। वहाँ उसने बहुत कष्ट सहा। लोग उससे नाराज़ हुए। फिर भी पौलुस डरा नहीं। उसने साहस से परमेश्वर की बातें सुनाईं।

पौलुस ने कभी झूठ नहीं बोला। उसने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। वह चालाकी नहीं करता था। वह सच बोलता था, क्योंकि परमेश्वर सब कुछ देखते हैं। परमेश्वर उसका दिल जानते थे।

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस उन लोगों से बहुत प्यार करता था। कितना प्यार? सुनो। जैसे एक माँ अपने छोटे बच्चे को गोद में लेती है। जैसे वह उसे धीरे से थपथपाती है। ऐसे ही पौलुस ने उन लोगों के साथ नरमी से बर्ताव किया। वह उनके पास रहा। उसने रात-दिन काम किया, ताकि किसी पर बोझ न बने। वह उनके लिए थका, बहुत थका। पर उसने काम करना नहीं छोड़ा।

समान सूत्र

और सुनो, पौलुस एक पिता जैसा भी था। जैसे एक पापा अपने बच्चे का हाथ पकड़ता है। जैसे वह उसे चलना सिखाता है। जैसे वह कहता है, "इधर आओ, यहाँ मत जाओ।" ऐसे ही पौलुस ने हर एक को समझाया, प्रोत्साहित किया। उसने बताया, परमेश्वर तुम्हें अपने राज्य में बुलाते हैं।

और वह लोग, उन्होंने पौलुस की बात सुनी। उन्होंने समझा, यह सिर्फ पौलुस की बात नहीं। यह परमेश्वर का वचन है। यीशु मसीह भी ऐसे ही आए थे, प्यार से, सच बोलते हुए, कभी झूठ नहीं। पौलुस भी यीशु जैसा बनना चाहता था।

तुम्हारे लिए

पौलुस उन लोगों को बहुत याद करता था। बहुत, बहुत याद करता था। वह चाहता था उनका मुँह फिर से देखना। पर वह दूर था, इसलिए उदास था। तुम भी सोचो, किसे तुम बहुत याद करते हो? अपनी मम्मी को? अपने पापा को? पौलुस कहता है, वे लोग उसकी खुशी थे, उसका मुकुट थे। जब यीशु आएँगे, तब पौलुस उन्हें देखकर बहुत खुश होगा।

तुम भी परमेश्वर की बात सुन सकते हो। जैसे एक बच्चा अपने पापा की बात सुनता है। धीरे से, प्यार से। परमेश्वर तुमसे भी प्यार करते हैं।

बात करो

तुम्हें सबसे ज़्यादा प्यार से कौन गले लगाता है?

पौलुस लोगों को बहुत याद करता था। तुम किसे बहुत याद करते हो?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप हमसे बहुत प्यार करते हैं। जैसे मम्मी-पापा प्यार करते हैं। हमें भी सच बोलना सिखाइए। हमें भी प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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1 थिस्सलुनीकियों 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 थिस्सलुनीकियों 2 किस विषय में है?
एक आदमी था, उसका नाम पौलुस था। पौलुस दूर-दूर जाता था। वह लोगों को परमेश्वर की बातें सुनाता था। एक शहर था, उसका नाम थिस्सलुनीके था। वहाँ पौलुस गया। वहाँ उसने बहुत कष्ट सहा। लोग उससे नाराज़ हुए। फिर भी पौलुस डरा नहीं। उसने साहस से परमेश्वर की बातें सुनाईं।
1 थिस्सलुनीकियों 2 क्या कहता है?
पौलुस उन लोगों से बहुत प्यार करता था। कितना प्यार? सुनो। जैसे एक माँ अपने छोटे बच्चे को गोद में लेती है। जैसे वह उसे धीरे से थपथपाती है। ऐसे ही पौलुस ने उन लोगों के साथ नरमी से बर्ताव किया। वह उनके पास रहा। उसने रात-दिन काम किया, ताकि किसी पर बोझ न बने। वह उनके लिए थका, बहुत थका। पर उसने काम करना नहीं छोड़ा।
1 थिस्सलुनीकियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
और वह लोग, उन्होंने पौलुस की बात सुनी। उन्होंने समझा, यह सिर्फ पौलुस की बात नहीं। यह परमेश्वर का वचन है। यीशु मसीह भी ऐसे ही आए थे, प्यार से, सच बोलते हुए, कभी झूठ नहीं। पौलुस भी यीशु जैसा बनना चाहता था।
नन्हे बच्चे 1 थिस्सलुनीकियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी परमेश्वर की बात सुन सकते हो। जैसे एक बच्चा अपने पापा की बात सुनता है। धीरे से, प्यार से। परमेश्वर तुमसे भी प्यार करते हैं।
1 थिस्सलुनीकियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आप हमसे बहुत प्यार करते हैं। जैसे मम्मी-पापा प्यार करते हैं। हमें भी सच बोलना सिखाइए। हमें भी प्यार करना सिखाइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

पौलुस ने अभी अपने आप को दूध पिलाती माँ कहा था, और अब पिता। पर सबसे कोमल बात यह है, "तुम में से हर एक को समझाते और शान्ति देते और जताते थे।" भीड़ को नहीं, हर एक को अलग से। किसी को समझाने की ज़रूरत थी, किसी को दिलासे की, किसी को सीधी चेतावनी की। क्या तुम लोगों को इतना जानते हो कि पहचान सको उन्हें अभी किस बात की ज़रूरत है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पौलुस दो गवाह बुलाता है, "तुम भी गवाह हो और परमेश्वर भी कि हम तुम विश्वासियों के बीच में कैसी पवित्रता और धार्मिकता और निर्दोषता से रहे।" लोग बाहर देखते हैं, परमेश्वर भीतर। पौलुस दोनों के सामने एक ही आदमी था। सोचो, जो तुम्हें रोज़ देखते हैं, क्या वे तुम्हारे बारे में वही कह सकते हैं जो परमेश्वर जानता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

पौलुस प्रेरित था, वह अधिकार जता सकता था। पर उसने अपने लिए जो चित्र चुना, वह एक माँ का है: "हम तुम्हारे बीच में कोमल स्वभाव के थे, जैसे माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है।" माँ दूध पिलाती है, ताज़ना नहीं देती। सोचो, जिन्हें तुम मसीह के बारे में बताते हो, वे तुम्हारी आवाज़ में क्या सुनते हैं? दबाव, या कोमलता?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

पौलुस लिखता है कि उन्होंने "अन्यजातियों से बातें करने से रोकते हैं, कि वे उद्धार पाएँ, और यों वे सदा अपने पापों का नाप भरते जाते हैं।" कितनी दुखद बात, कि कोई इसलिए नहीं रुकता कि खुद न सुने, बल्कि दूसरों को सुनने से रोके। आज खुद से पूछो, क्या मेरी कड़वाहट, मेरी चुप्पी, मेरा डर किसी और के लिए सुसमाचार का रास्ता बंद तो नहीं कर रहा?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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