3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 तीमुथियुस 4

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बूढ़ा आदमी था। उसका नाम पौलुस था। उसके हाथ में एक कलम था। मेज़ पर एक पीला कागज़ था। पौलुस बहुत धीरे-धीरे लिख रहा था। वह एक चिट्ठी लिख रहा था। यह चिट्ठी एक जवान लड़के के लिए थी। उसका नाम तीमुथियुस था। पौलुस तीमुथियुस से बहुत प्यार करता था। वह उसका दोस्त था, और उसका शिक्षक भी।

दूर, तीमुथियुस बैठा था। उसके पास एक दीपक जल रहा था। डाकिया आया, और चिट्ठी उसे दे दी। तीमुथियुस ने कागज़ खोला। उसने पढ़ना शुरू किया।

पौलुस ने लिखा था, "सुनो, तीमुथियुस। कुछ लोग कहते हैं, यह खाना मत खाओ। पर मैं तुम्हें सच बताता हूँ। परमेश्वर ने सब खाना बनाया है। रोटी, फल, दूध, सब कुछ अच्छा है। जब तुम खाना खाओ, तो धन्यवाद कहो। परमेश्वर को धन्यवाद दो।"

तीमुथियुस ने यह सुना। उसने मुस्कुराया। मेज़ पर रोटी रखी थी। उसकी खुशबू कितनी अच्छी थी। उसने रोटी उठाई, और कहा, "धन्यवाद, परमेश्वर।"

फिर पौलुस ने और लिखा। "तीमुथियुस, तुम जवान हो। शायद कोई कहे, तुम बहुत छोटे हो। पर डरो मत। तुम प्यार में आगे रहो। तुम विश्वास में आगे रहो। तुम बोलने में, चलने में, आगे रहो। तुम सबके लिए एक अच्छा उदाहरण बनो।" तीमुथियुस ने चिट्ठी सीने से लगाई। पौलुस मुस्कुराया, जब उसने चिट्ठी भेजी।

इसका क्या मतलब है?

पौलुस चाहता था कि तीमुथियुस समझे। परमेश्वर की बनाई हर चीज़ अच्छी है। सोचो, रोटी की खुशबू, फल का रंग, दूध की मिठास। इसलिए हम खाना खाकर धन्यवाद देते हैं। हम खाना डर के साथ नहीं खाते। हम खुशी से खाते हैं। और परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं।

तीमुथियुस छोटा था, पर परमेश्वर ने उसे चुना। छोटे होने से प्यार करना नहीं रुकता। छोटे होने से विश्वास करना नहीं रुकता। छोटे भी बड़ा काम कर सकते हैं। परमेश्वर छोटों को भी बुलाते हैं।

एक ही कहानी की कड़ी

पौलुस ने लिखा, हमारी आशा जीविते परमेश्वर पर है। वे परमेश्वर सबको बचाते हैं। खास कर उन्हें, जो उन पर विश्वास करते हैं। यीशु भी हमें बचाने आए। वे बड़ों से प्यार करते हैं। वे छोटों से भी प्यार करते हैं। यीशु सबसे छोटे बच्चे को भी जानते हैं। वे हर दिन हमारे पास रहते हैं। वे कभी हमें नहीं छोड़ते।

तेरे लिए

आज जब तुम खाना खाओ, धन्यवाद कहो। परमेश्वर को धन्यवाद दो, रोटी के लिए। फल के लिए, दूध के लिए, सब के लिए। और याद रखो, तुम छोटे हो। पर परमेश्वर तुमसे बहुत प्यार करते हैं। तुम्हारी छोटी बाहों से भी बड़ा प्यार दिखता है। तुम भी सच बोल सकते हो। तुम भी दूसरों की मदद कर सकते हो। परमेश्वर तुम्हें भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

बात करें

तुम्हें कौन सा खाना सबसे अच्छा लगता है? क्या तुम उसके लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हो?

क्या किसी ने कभी कहा कि तुम बहुत छोटे हो? यीशु तुमसे प्यार करते हैं, तुम्हें यह पता है?

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद रोटी के लिए। धन्यवाद फल के लिए। मैं छोटा हूँ, पर आप मुझसे प्यार करते हैं। मुझे भी प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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1 तीमुथियुस 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 तीमुथियुस 4 किस विषय में है?
एक बूढ़ा आदमी था। उसका नाम पौलुस था। उसके हाथ में एक कलम था। मेज़ पर एक पीला कागज़ था। पौलुस बहुत धीरे-धीरे लिख रहा था। वह एक चिट्ठी लिख रहा था। यह चिट्ठी एक जवान लड़के के लिए थी। उसका नाम तीमुथियुस था। पौलुस तीमुथियुस से बहुत प्यार करता था। वह उसका दोस्त था, और उसका शिक्षक भी।
1 तीमुथियुस 4 क्या कहता है?
पौलुस ने लिखा था, "सुनो, तीमुथियुस। कुछ लोग कहते हैं, यह खाना मत खाओ। पर मैं तुम्हें सच बताता हूँ। परमेश्वर ने सब खाना बनाया है। रोटी, फल, दूध, सब कुछ अच्छा है। जब तुम खाना खाओ, तो धन्यवाद कहो। परमेश्वर को धन्यवाद दो।"
1 तीमुथियुस 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर पौलुस ने और लिखा। "तीमुथियुस, तुम जवान हो। शायद कोई कहे, तुम बहुत छोटे हो। पर डरो मत। तुम प्यार में आगे रहो। तुम विश्वास में आगे रहो। तुम बोलने में, चलने में, आगे रहो। तुम सबके लिए एक अच्छा उदाहरण बनो।" तीमुथियुस ने चिट्ठी सीने से लगाई। पौलुस मुस्कुराया, जब उसने चिट्ठी भेजी।
नन्हे बच्चे 1 तीमुथियुस 4 से क्या सीख सकते हैं?
तीमुथियुस छोटा था, पर परमेश्वर ने उसे चुना। छोटे होने से प्यार करना नहीं रुकता। छोटे होने से विश्वास करना नहीं रुकता। छोटे भी बड़ा काम कर सकते हैं। परमेश्वर छोटों को भी बुलाते हैं।
1 तीमुथियुस 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
आज जब तुम खाना खाओ, धन्यवाद कहो। परमेश्वर को धन्यवाद दो, रोटी के लिए। फल के लिए, दूध के लिए, सब के लिए। और याद रखो, तुम छोटे हो। पर परमेश्वर तुमसे बहुत प्यार करते हैं। तुम्हारी छोटी बाहों से भी बड़ा प्यार दिखता है। तुम भी सच बोल सकते हो। तुम भी दूसरों की मदद कर सकते हो। परमेश्वर तुम्हें भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

उस वरदान की उपेक्षा न कर, जो तुझ में है, जो भविष्यद्वाणी के द्वारा प्राचीनों के हाथ रखते समय तुझे मिला था।"

वरदान खोने से नहीं, अनदेखा करने से मरता है। तीमुथियुस जवान था, डरा हुआ था, और पौलुस उसे कुछ नया नहीं दे रहा, बस याद दिला रहा है कि तेरे भीतर पहले से कुछ रखा है।

तेरे भीतर भी कुछ है जिसे तू "छोटा सा" कहकर टाल देता है। परमेश्वर ने उसे बेकार नहीं बनाया था।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

पौलुस तीमुथियुस से यह नहीं कहता कि तू सिद्ध हो जा, बल्कि "इन बातों को सोचता रह और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रख, ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो।" उन्नति, यानी बढ़ना। लोग तेरी परिपूर्णता नहीं, तेरा बढ़ना देखेंगे। पर बढ़ना वहीं होता है जहाँ ध्यान बँटा हुआ न हो। आज तेरा मन कितनी जगह टिका है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

पौलुस तीमुथियुस से पहले उपदेश की नहीं, उसकी अपनी चौकसी की बात करता है: "अपनी और अपने उपदेश की चौकसी कर।" पहले अपनी, फिर सिखाने की। जो तू कहता है वह सुनने वालों तक पहुँचता है, पर जो तू है वह और भी गहरे पहुँचता है। आज खुद से पूछ: मेरे शब्द और मेरा जीवन एक ही दिशा में जा रहे हैं क्या?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

यह बात सच है और हर प्रकार से मानने योग्य है।" पौलुस यह वाक्य तब लिखता है जब वह भक्ति के अभ्यास की बात कर रहा होता है। शरीर की कसरत थोड़े काम की, पर भक्ति हर बात में लाभदायक। सोच, क्या तू इस बात को सचमुच "मानने योग्य" समझता है? हम व्यायाम के लिए समय निकाल लेते हैं, पर परमेश्वर के साथ बैठने के लिए नहीं। जो सच है, उसे अपनाना भी पड़ता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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