1 यूहन्ना 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बार यूहन्ना नाम के एक बूढ़े दादा जी थे। वे परमेश्वर से बहुत प्यार करते थे। उन्होंने छोटे बच्चों को एक चिट्ठी लिखी।
चिट्ठी में उन्होंने कहा, "मेरे प्रिय बालकों।" कितना प्यारा नाम, है ना?
दादा यूहन्ना ने लिखा, कभी हम गलत काम कर बैठते हैं। तब क्या होगा? क्या परमेश्वर हमसे नाराज़ हो जाएँगे?
नहीं। यूहन्ना ने लिखा, यीशु मसीह हमारे लिए वहाँ खड़े हैं। पिता के पास। हमारे लिए बात करते हैं। जैसे कोई बड़ा भाई छोटे भाई का हाथ पकड़ ले।
यीशु ने हमारे लिए अपनी जान दी। इसलिए हमारे पाप माफ़ हो सकते हैं। सारे जगत के लोगों के पाप भी।
इसका अर्थ क्या है?
सोचो, एक कमरा है। बहुत अंधेरा। कुछ भी दिखता नहीं।
फिर कोई दीया जलाता है। अंधेरा भाग जाता है। उजाला आ जाता है।
यूहन्ना कहते हैं, यीशु ऐसे ही उजाले हैं। जो यीशु के पास रहता है, वह उजाले में रहता है।
और उजाले में रहने का एक निशान है। कौन सा निशान? प्यार।
जो अपने भाई से प्यार करता है, वह उजाले में है। जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अंधेरे में है। अंधेरे में चलने वाला नहीं जानता कहाँ जा रहा है।
सामान्य सूत्र
दादा यूहन्ना ने बालकों को याद दिलाया, "तुम्हारे पाप उसके नाम से क्षमा हुए।"
किसके नाम से? यीशु मसीह के नाम से।
यह परमेश्वर की सबसे बड़ी प्रतिज्ञा है। यीशु आए। यीशु ने प्यार किया। यीशु ने अपनी जान दी। और अब जो कोई यीशु के पास आता है, उसे अनन्त जीवन मिलता है।
यूहन्ना ने लिखा, यह प्रतिज्ञा सच्ची है, अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा।
तुम्हारे लिए
अब सोचो, तुम्हारे घर में उजाला है या अंधेरा?
जब तुम अपने भाई या बहन से प्यार करते हो, खिलौना बाँटते हो, गले लगाते हो, तब तुम उजाले में चलते हो।
यीशु तुमसे कहते हैं, मेरे पास आओ। मैं तुम्हारा उजाला हूँ। मैं तुम्हारे पाप माफ़ करता हूँ।
क्या तुम यीशु के पास रहना चाहते हो? उजाले में रहना चाहते हो?
बातचीत के लिए
यीशु ने तुम्हारे लिए क्या किया, जो उन्होंने पिता के पास तुम्हारे लिए कहा?
तुम आज किससे प्यार दिखा सकते हो, ताकि तुम उजाले में चलो?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
धन्यवाद कि यीशु मेरे लिए बात करते हैं।
धन्यवाद कि आप मेरे पाप माफ़ करते हैं।
मुझे उजाले में रखिए। मुझे प्यार करना सिखाइए।
यीशु के नाम में, आमीन।
1 यूहन्ना 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 यूहन्ना 2 किस विषय में है?
1 यूहन्ना 2 क्या कहता है?
1 यूहन्ना 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 1 यूहन्ना 2 से क्या सीख सकते हैं?
1 यूहन्ना 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिटती जाती हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।"
ध्यान दे, सिर्फ संसार नहीं, उसकी चाहत भी मिट जाती है। जिस चीज़ के लिए तू दस साल पहले रोया था, आज उसका नाम भी याद नहीं। तेरी आज की बेचैनी भी एक दिन ऐसे ही ठंडी पड़ जाएगी।
फिर सवाल यह है: तेरे जीवन में ऐसा क्या है जो उस दिन भी बचा रहेगा?
हे प्रियो, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, परन्तु वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हारे पास है।" यूहन्ना बूढ़ा हो चुका है, और उसके पास कहने को कुछ नया नहीं। बस वही बात, प्रेम करो। हम अक्सर कोई नई गहराई, नया अनुभव ढूँढ़ते हैं, जबकि जो पहले दिन सुना था वही अब तक जिया नहीं गया। क्या सचमुच तुम्हें नई बात चाहिए, या पुरानी बात पर लौटना?
जो कोई पुत्र का इन्कार करता है, उसके पास पिता भी नहीं; जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।" यूहन्ना यहाँ कोई गणित नहीं समझा रहा, वह दिल की बात कह रहा है। बहुत लोग कहते हैं, परमेश्वर तो एक ही है, यीशु की क्या जरूरत? पर पिता को जानने का दरवाजा पुत्र ही है। जिसे तू मानता है, उसी से तेरा रिश्ता तय होता है। आज तेरे लिए यीशु कौन है?
यूहन्ना यह उन लोगों को लिख रहा था जिनके बीच से कुछ शिक्षक निकल गए थे और कह रहे थे कि सच्चा ज्ञान उनके पास है। उनके जवाब में यूहन्ना कहता है, "और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है।" यानी जो तुझे चाहिए, वह तेरे भीतर पहले से है। किसी की चिकनी चुपड़ी बातों से डरने की ज़रूरत नहीं। पर सोच, क्या तू उस भीतर की आवाज़ को सुनने के लिए कभी शांत बैठता भी है?
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