2 कुरिन्थियों 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
एक बार मूसा नाम का एक आदमी पहाड़ पर गया। वहाँ वह परमेश्वर से मिला। परमेश्वर ने उससे बात की।
जब मूसा नीचे उतरा, तो उसका चेहरा चमक रहा था। बहुत तेज चमक रहा था। लोग उसे देख नहीं पाते थे। इतना तेज था वह चमक।
तो मूसा ने अपने चेहरे पर एक कपड़ा डाल लिया। एक परदा। ताकि लोग उसकी आँखों में देख सकें।
पर वह चमक धीरे धीरे कम होती गई। और परदा वहीं का वहीं रहा।
What Does This Mean?
पौलुस नाम के एक आदमी ने यह कहानी फिर से सुनाई। उसने कहा, आज भी कुछ लोगों के दिल पर एक परदा है। जैसे मूसा के चेहरे पर था।
वे परमेश्वर की बातें सुनते हैं, पर ठीक से देख नहीं पाते। जैसे किसी ने आँखों पर कपड़ा बाँध दिया हो।
पर एक अच्छी बात है। पौलुस कहता है, जब कोई प्रभु की ओर मुँह फेरता है, तब वह परदा उतर जाता है। बिल्कुल उतर जाता है।
The Common Thread
यीशु मसीह के कारण परदा उठ जाता है। अब हमें अपना चेहरा ढकने की जरूरत नहीं है। हम खुले चेहरे से देख सकते हैं।
पौलुस कहता है, प्रभु का तेज हमारे चेहरे पर भी आता है। जैसे दर्पण में चेहरा दिखता है, वैसे ही यीशु का उजाला हम पर पड़ता है।
और वह उजाला धीरे धीरे बुझता नहीं। वह और भी चमकता जाता है।
For You
सोचो, तुम्हारे चेहरे पर सूरज की रोशनी पड़ी है। गरम गरम। अच्छी लगती है, है ना?
यीशु का उजाला भी ऐसा ही है। जब तुम यीशु की ओर देखते हो, तो कोई परदा नहीं रहता। तुम उन्हें सीधे देख सकते हो।
तुम्हें डरने की जरूरत नहीं। तुम्हारे मुँह पर कोई कपड़ा नहीं है। तुम खुले चेहरे से यीशु के पास आ सकते हो।
तुम्हें क्या अच्छा लगता है, गरम सूरज की रोशनी या ठंडी छाया?
क्या तुम यीशु की ओर देखना चाहते हो, बिना कोई परदा लगाए?
Talk About It
मूसा के चेहरे पर परदा क्यों था?
अब हमारे चेहरे पर परदा क्यों नहीं है?
Praying Together
प्रिय यीशु, धन्यवाद कि हम आपको सीधे देख सकते हैं। कोई परदा नहीं है। अपना उजाला मेरे चेहरे पर भी डालो। आमीन।
2 कुरिन्थियों 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 कुरिन्थियों 3 किस विषय में है?
2 कुरिन्थियों 3 क्या कहता है?
2 कुरिन्थियों 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 2 कुरिन्थियों 3 से क्या सीख सकते हैं?
2 कुरिन्थियों 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
क्योंकि जब वह सेवा जिससे दोषी ठहरते हैं, तेजोमय थी, तो वह सेवा जिससे धार्मिकता मिलती है, अवश्य ही और भी तेजोमय होगी।"
सोच, जो व्यवस्था तुझे दोषी ठहराती थी, उसका भी अपना तेज था। मूसा का चेहरा उसी से चमका था। तो फिर जो तुझे निर्दोष ठहराती है, वह कृपा कितनी अधिक चमकीली होगी!
पर अक्सर हम अपने दोष को ज़्यादा साफ़ देखते हैं और क्षमा को धुंधला। आज उलट कर देख।
मूसा का चेहरा ऐसा चमका था कि लोग उसकी ओर देख न सके। फिर भी पौलुस कहता है, "क्योंकि जो तेजोमय था, वह भी इस बढ़ते हुए तेज के कारण कुछ तेजोमय न ठहरा।" जैसे सूरज निकलते ही दीये की लौ फीकी लगने लगती है। तेरे जीवन में भी कुछ है जिसे तू सबसे चमकीला मानता है। मसीह के पास ला, और देख वह कितना छोटा पड़ जाता है। अच्छा फीका पड़ता है, ताकि सर्वोत्तम दिखाई दे।
मूसा ने अपना मुँह ढक लिया था, क्योंकि वह तेज मिटता जा रहा था। पर तुझसे कहा गया है: "हम सब के उघड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप" दिखता है। कोई परदा नहीं, कोई छिपाव नहीं। और बदलाव एक ही रात में नहीं, "अंश-अंश करके" होता है। तू आज भी उसी को निहारता रह, धीरे-धीरे तेरा चेहरा उसकी झलक देने लगेगा।
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