2 कुरिन्थियों 4
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बार पौलुस नाम के एक आदमी थे। वे यीशु की बातें सुनाते थे।
पौलुस के पास एक मिट्टी का बर्तन था। छोटा सा, साधारण सा बर्तन। पर उस बर्तन के अंदर कुछ खास था। उसके अंदर रोशनी थी।
पौलुस कहते थे, मेरे अंदर भी ऐसी ही रोशनी है। यह रोशनी यीशु की है।
लोग पौलुस को दुख देते थे। उन्हें गिराते थे। फिर भी पौलुस गिरते नहीं थे। क्यों? क्योंकि अंदर की रोशनी बहुत मज़बूत थी।
यह किसका अर्थ है?
पौलुस का शरीर कभी थक जाता था। कभी दर्द होता था। जैसे बर्तन में छोटी सी दरार आ जाए।
पर पौलुस डरते नहीं थे। वे कहते थे, मेरे अंदर की रोशनी नहीं बुझेगी। यह रोशनी परमेश्वर की है, मेरी नहीं।
परमेश्वर ने एक बार कहा था, अंधकार में रोशनी चमके। और वह रोशनी चमकी। वह रोशनी यीशु मसीह के चेहरे पर थी। वही रोशनी अब पौलुस के हृदय में थी।
समान सूत्र
यह रोशनी यीशु से आती है।
यीशु मरे। फिर परमेश्वर ने उन्हें फिर से जिलाया। पौलुस कहते थे, जैसे यीशु को जिलाया गया, वैसे ही परमेश्वर हमें भी जिलाएँगे।
बाहर से बर्तन पुराना होता जाता है। पर अंदर की रोशनी रोज नई होती जाती है। एक दिन परमेश्वर सब कुछ ठीक कर देंगे। हमेशा के लिए।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे अंदर भी एक दीया जल सकता है। यीशु की रोशनी।
कभी तुम गिर जाते हो। घुटना छिल जाता है। कभी तुम रोते हो।
पर रोशनी नहीं बुझती। क्योंकि परमेश्वर उसे जलाए रखते हैं। वे तुम्हें कभी नहीं छोड़ते।
जो आँखों से दिखता है, वह थोड़े दिन का है। जो नहीं दिखता, वह हमेशा रहता है। परमेश्वर का प्यार नहीं दिखता, पर वह हमेशा रहता है।
बात करें
तुम्हारे अंदर कौन सी रोशनी जलती है?
जब तुम गिर जाओ, तो कौन तुम्हें उठाता है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, मेरे अंदर यीशु की रोशनी रखिए। जब मैं गिरूँ, मुझे उठाइए। आपकी रोशनी कभी न बुझे। आमीन।
2 कुरिन्थियों 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 कुरिन्थियों 4 किस विषय में है?
2 कुरिन्थियों 4 क्या कहता है?
2 कुरिन्थियों 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 2 कुरिन्थियों 4 से क्या सीख सकते हैं?
2 कुरिन्थियों 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
इसलिए जब हम पर ऐसी दया हुई कि हमें यह सेवकाई मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।"
ध्यान दे, पौलुस हिम्मत इसलिए नहीं रखता कि वह मजबूत है, बल्कि इसलिए कि यह काम उसे दया से मिला था। जिसने कलीसिया को सताया था, वही अब सुसमाचार सुनाता है। जब सेवा योग्यता से नहीं, करुणा से मिली हो, तो उसे छोड़ने का हक भी अपने पास नहीं रहता। तू थक गया है? याद कर, तुझे बुलाया किसने था।
पौलुस पिटता है, कैद होता है, टूटता है, और फिर कहता है, "क्योंकि सब वस्तुएँ तुम्हारे लिये हैं।" उसका दुःख उसकी अपनी कहानी नहीं था, वह किसी और तक अनुग्रह पहुँचाने का रास्ता था। सोचो, जो कठिनाई आज तुम्हें बेकार लग रही है, शायद परमेश्वर उसके ज़रिए किसी और के होंठों पर धन्यवाद रख रहा हो।
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