3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 2

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बार की बात है। आसमान में परमेश्वर थे। वे बहुत ऊँचे बैठे थे। और वे धरती को देख रहे थे।

परमेश्वर ने एक आदमी को बुलाया। उसका नाम आमोस था। परमेश्वर ने आमोस से कहा, "जाओ, लोगों को मेरी बात सुनाओ।"

परमेश्वर ने पहले मोआब देश की बात की। वहाँ के लोगों ने बुरा काम किया था। फिर परमेश्वर ने यहूदा देश की बात की। वे भी परमेश्वर की बात नहीं मानते थे।

फिर परमेश्वर ने इस्राएल की बात की। सुनो, ध्यान से सुनो।

इस्राएल में गरीब लोग रहते थे। उनके पास कुछ नहीं था। सिर्फ एक जोड़ी जूती। कुछ लोगों ने उन गरीबों को दुखी किया। उनकी चीज़ें छीन लीं। परमेश्वर ने यह देखा। परमेश्वर को बहुत दुख हुआ।

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर को गरीब लोग बहुत प्यारे हैं। जब कोई गरीब को दुखी करता है, परमेश्वर देखते हैं। कुछ भी छिपा नहीं रहता।

परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को याद दिलाया, "मैं तुम्हें मिस्र से निकाल लाया। मैं तुम्हारे साथ चालीस साल जंगल में रहा।" परमेश्वर ने उनकी देखभाल की थी। पर लोग भूल गए।

परमेश्वर कहते हैं, जैसे गाड़ी भारी पूलों से दबती है, वैसे ही अब सब कुछ भारी हो जाएगा। कोई भी भाग नहीं सकेगा। न तेज़ दौड़नेवाला, न ताकतवर सिपाही।

एक ही धागा

परमेश्वर हमेशा गरीब और कमज़ोर लोगों की तरफ देखते हैं। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु भी गरीबों से प्यार करते थे। यीशु ने उनके साथ खाना खाया। यीशु ने उन्हें छुआ, उनसे बात की।

परमेश्वर का दिल तब भी वही था, और आज भी वही है। वे चाहते हैं कि हम भी दूसरों का ध्यान रखें।

तुम्हारे लिए

सोचो, तुम्हारे पास क्या है? खिलौने? जूते? खाना?

क्या तुम्हारे पास किसी ऐसे दोस्त के लिए कुछ है, जिसके पास कम है? तुम उसे अपना कुछ दे सकते हो। एक खिलौना। थोड़ी सी मिठाई।

परमेश्वर देख रहे हैं। और परमेश्वर खुश होते हैं, जब हम छोटों का ध्यान रखते हैं।

बात करें

अगर तुम्हारे पास दो चीज़ें हों, और तुम्हारे दोस्त के पास कुछ न हो, तो तुम क्या करोगे?

परमेश्वर को कौन से लोग सबसे प्यारे लगते हैं?

आइए मिलकर प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, आप गरीबों से प्यार करते हैं। मुझे भी सिखाइए, अपने दोस्तों के साथ बाँटना। मुझे दयालु बनाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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आमोस 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 2 किस विषय में है?
एक बार की बात है। आसमान में परमेश्वर थे। वे बहुत ऊँचे बैठे थे। और वे धरती को देख रहे थे।
आमोस 2 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर ने इस्राएल की बात की। सुनो, ध्यान से सुनो।
आमोस 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को याद दिलाया, "मैं तुम्हें मिस्र से निकाल लाया। मैं तुम्हारे साथ चालीस साल जंगल में रहा।" परमेश्वर ने उनकी देखभाल की थी। पर लोग भूल गए।
नन्हे बच्चे आमोस 2 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर का दिल तब भी वही था, और आज भी वही है। वे चाहते हैं कि हम भी दूसरों का ध्यान रखें।
आमोस 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम्हारे पास दो चीज़ें हों, और तुम्हारे दोस्त के पास कुछ न हो, तो तुम क्या करोगे?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

धनुर्धारी खड़ा न रह सकेगा, और फुर्ती से दौड़नेवाला न बचेगा, और न घोड़े पर सवार अपना प्राण बचा सकेगा।" जिन पर इस्राएल को सबसे ज़्यादा भरोसा था, वही सबसे पहले गिरे। तेरी भी कोई ताकत होगी, कोई हुनर, कोई बचत, कोई रिश्ता, जिसके भरोसे तू चैन से सोता है। पूछ अपने आप से, अगर वह कल न रहे, तो क्या परमेश्वर काफ़ी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

फिर मैं तुम को मिस्र देश से निकाल लाया, और जंगल में चालीस वर्ष तक लिए फिरता रहा।" परमेश्वर सिर्फ़ निकालकर छोड़ नहीं देता, वह चालीस साल साथ चलता है। पर आमोस यह याद इसलिए दिला रहा है क्योंकि इस्राएल भूल चुका था। सोचो, तुम्हारे जीवन का वह जंगल जहाँ वह तुम्हें उठाए फिरा, क्या तुम अब भी उसका ज़िक्र करते हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

यरूशलेम के भवन, वही जगह जहाँ परमेश्वर का मन्दिर खड़ा था। फिर भी आमोस कहता है, "इसलिए मैं यहूदा में आग भेजूँगा, और वह यरूशलेम के भवनों को भस्म कर देगी।" जो आग पड़ोसी जातियों पर गिरी थी, वही अब अपने ही लोगों पर। सच यह है कि परमेश्वर के करीब होने का नाम नहीं, उसकी बात मानना बचाता है। तेरी कौन सी आदत है जिसे तू इसलिए पाले हुए है क्योंकि तू सोचता है, मैं तो विश्वासी हूँ, मुझे कुछ नहीं होगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

आसपास की जातियों पर दोष लगा था क्रूरता का, खून का, निर्दयता का। पर यहूदा पर? "उन्होंने यहोवा की व्यवस्था को तुच्छ जाना और उसकी विधियों को नहीं माना।" उनके पास परमेश्वर का वचन था, और वही उनके विरुद्ध गवाही बन गया।

और ध्यान दे, जो झूठ उन्हें भटकाता रहा, वह उनके पुरखाओं से चला आ रहा था। हर विरासत में मिली बात सच्ची नहीं होती। तेरी खुली बाइबिल तुझे धन्य बनाती है या जवाबदेह, यह इस पर है कि तू उसे मानता है या बस रखता है।

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