13 वर्ष और उससे बड़े किशोर के लिए

आमोस 2

किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

आमोस अध्याय 2 में परमेश्वर अपना न्याय आगे बढ़ाते हैं। पहले वे मोआब पर दोष लगाते हैं, क्योंकि उसने एदोम के राजा की हड्डियों को जलाकर चूना बना दिया था, मरे हुए के प्रति भी ऐसी क्रूरता। फिर यहूदा की बारी आती है। ध्यान दीजिए, यहूदा पर युद्ध-अपराध का आरोप नहीं है, बल्कि कुछ भीतरी है, “उन्होंने यहोवा की व्यवस्था को तुच्छ जाना और मेरी विधियों को नहीं माना।” उन्होंने परमेश्वर का वचन सुना, और उसे किनारे रख दिया।

फिर आता है इस्राएल, और यहाँ भाषा लंबी और तीखी हो जाती है। निर्दोष को रुपये के लिए बेचना, दरिद्र को जूतियों की कीमत पर बेचना, कंगालों के सिर की धूल तक का लालच करना, यानी गरीब के पास जो थोड़ा-बहुत सम्मान बचा था वह भी छीन लेना। पिता-पुत्र एक ही स्त्री के पास जाना, और यह सब मंदिर की वेदियों के पास, बंधक रखे कपड़ों पर सोते हुए, जुर्माने के पैसों से खरीदी शराब पीते हुए। यह धार्मिक समाज है जो भक्ति का दिखावा करते हुए अंदर से सड़ चुका है।

फिर परमेश्वर कुछ अनपेक्षित करते हैं, वे पीछे मुड़कर देखते हैं। एमोरियों को नष्ट करके, मिस्र से निकालकर, चालीस वर्ष जंगल में साथ चलकर, नबी और नाज़ीर उठाकर, उन्होंने इस्राएल के साथ जो किया वह सब याद दिलाते हैं। और फिर एक तीखा सवाल, “क्या यह सब सच नहीं है?” यानी, मेरी भलाई का कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन इस्राएल ने नाज़ीरों को शराब पिलाई और नबियों का मुँह बंद किया, यानी जो लोग परमेश्वर की आवाज़ बनकर आए थे, उन्हें चुप करा दिया। इसलिए अंत में चित्र आता है एक भरी गाड़ी का, जो अनाज के बोझ से दबी जा रही है। दौड़नेवाला नहीं बचेगा, बलवान का बल काम नहीं देगा, वीर नंगा होकर भागेगा।

What Does This Mean?

यह अध्याय एक भ्रम तोड़ता है, धार्मिकता और नैतिकता एक चीज़ नहीं हैं। इस्राएल मंदिर जाता था, भेंट चढ़ाता था, त्योहार मनाता था, और साथ ही गरीबों को कुचल रहा था। परमेश्वर यह नहीं कहते कि उनकी पूजा खराब थी क्योंकि संगीत गलत था या रस्में गलत थीं। वे कहते हैं कि उनकी पूजा झूठी थी क्योंकि उनका जीवन उसके विपरीत था। वेदी के पास बंधक के कपड़ों पर सोना, यह तस्वीर भयानक है, क्योंकि व्यवस्था में साफ लिखा था कि गरीब का कपड़ा रात होने से पहले लौटा दिया जाए। उन्होंने नियम को अपने आराम के लिए मोड़ लिया, और फिर उसी वेदी पर भेंट चढ़ाई।

और सबसे गहरी बात यह है, परमेश्वर का गुस्सा उनकी भलाई की याद के ठीक बाद आता है। यह कोई दूर का, उदासीन न्यायाधीश नहीं है। यह वह है जिसने उन्हें मिस्र से निकाला, जंगल में खिलाया, नबी भेजे। और उन्होंने उस आवाज़ को ही चुप करा दिया। पाप सबसे खतरनाक तब होता है जब वह प्यार करने वाले के मुँह पर ताला लगा देता है।

The Common Thread

यह अध्याय अंततः सूली की ओर इशारा करता है, हालाँकि आमोस के समय यह किसी ने नहीं सोचा होगा। परमेश्वर यहाँ कह रहे हैं कि व्यवस्था का उल्लंघन और गरीब का शोषण, दोनों एक ही जड़ से निकलते हैं, मनुष्य का हृदय परमेश्वर से दूर है। नबियों की आवाज़ बार-बार दबाई गई, और अंत में सबसे बड़े नबी, परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह को भी चुप कराने की कोशिश की गई, सूली पर चढ़ाकर। इस्राएल ने सोचा कि वेदी पर भेंट चढ़ाने से परमेश्वर संतुष्ट हो जाएंगे, जबकि उनका जीवन दूसरों को कुचल रहा था। यीशु ने अंततः वह किया जो कोई भेंट नहीं कर सकती थी, उन्होंने स्वयं को दे दिया ताकि हमारा झूठा धर्म और हमारा सच्चा पाप, दोनों का हिसाब चुक सके। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर धार्मिक दिखावे से नहीं, बल्कि न्याय और सच्चे हृदय से प्रसन्न होते हैं, और यीशु में वही न्याय और वही दया एक साथ पूरी होती है।

For You

तुम शायद किसी के कपड़े बंधक नहीं रखते, लेकिन यह सवाल पूछने लायक है, तुम्हारा विश्वास और तुम्हारा रोज़मर्रा का व्यवहार कितने जुड़े हैं। क्या तुम रविवार को एक इंसान हो और बाकी हफ्ते कोई और, जहाँ कमज़ोर दोस्त का मज़ाक उड़ाना, किसी को सोशल मीडिया पर बाहर करना, या किसी की मजबूरी का फायदा उठाना सामान्य लगता है। इस्राएल का पाप यही था, धर्म एक खाना था, और ज़िंदगी कुछ और। परमेश्वर दोनों को एक साथ देखना चाहते हैं। और यह भी याद रखो, जब कोई तुम्हें सच बताने की कोशिश करे, माता-पिता, पादरी, कोई दोस्त, तो उसे चुप कराना आसान है लेकिन खतरनाक भी। नबियों को चुप कराना इस्राएल के पतन की शुरुआत थी।

Talk About It

क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा क्षेत्र है जहाँ तुम्हारा विश्वास और तुम्हारा व्यवहार मेल नहीं खाते?

कभी किसी ने तुम्हें कोई सच्ची बात कही हो जो सुनना मुश्किल था, तुमने उसके साथ क्या किया, सुना या चुप करा दिया?

Praying Together

प्रभु, आप हमारी पूजा और हमारे जीवन दोनों को देखते हैं। हमें माफ़ करें जब हम दिखावे से संतुष्ट हो जाते हैं और भीतर से सच्चे नहीं रहते। हमें साहस दें कि हम कमज़ोरों का साथ दें, और नम्रता दें कि जब कोई हमें सच बताए तो हम उसे सुनें। यीशु के नाम में, आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

आमोस 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 2 किस विषय में है?
आमोस अध्याय 2 में परमेश्वर अपना न्याय आगे बढ़ाते हैं। पहले वे मोआब पर दोष लगाते हैं, क्योंकि उसने एदोम के राजा की हड्डियों को जलाकर चूना बना दिया था, मरे हुए के प्रति भी ऐसी क्रूरता। फिर यहूदा की बारी आती है। ध्यान दीजिए, यहूदा पर युद्ध-अपराध का आरोप नहीं है, बल्कि कुछ भीतरी है, “उन्होंने यहोवा की व्यवस्था को तुच्छ जाना और मेरी विधियों को नहीं माना।” उन्होंने परमेश्वर का वचन सुना, और उसे किनारे रख दिया।
आमोस 2 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर कुछ अनपेक्षित करते हैं, वे पीछे मुड़कर देखते हैं। एमोरियों को नष्ट करके, मिस्र से निकालकर, चालीस वर्ष जंगल में साथ चलकर, नबी और नाज़ीर उठाकर, उन्होंने इस्राएल के साथ जो किया वह सब याद दिलाते हैं। और फिर एक तीखा सवाल, “क्या यह सब सच नहीं है?” यानी, मेरी भलाई का कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन इस्राएल ने नाज़ीरों को शराब पिलाई और नबियों का मुँह बंद किया, यानी जो लोग परमेश्वर की आवाज़ बनकर आए थे, उन्हें चुप करा दिया। इसलिए अंत में चित्र आता है एक भरी गाड़ी का, जो अनाज के बोझ से दबी जा रही है। दौड़नेवाला नहीं बचेगा, बलवान का बल काम नहीं देगा, वीर नंगा होकर भागेगा।
आमोस 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
और सबसे गहरी बात यह है, परमेश्वर का गुस्सा उनकी भलाई की याद के ठीक बाद आता है। यह कोई दूर का, उदासीन न्यायाधीश नहीं है। यह वह है जिसने उन्हें मिस्र से निकाला, जंगल में खिलाया, नबी भेजे। और उन्होंने उस आवाज़ को ही चुप करा दिया। पाप सबसे खतरनाक तब होता है जब वह प्यार करने वाले के मुँह पर ताला लगा देता है।
किशोर आमोस 2 से क्या सीख सकते हैं?
तुम शायद किसी के कपड़े बंधक नहीं रखते, लेकिन यह सवाल पूछने लायक है, तुम्हारा विश्वास और तुम्हारा रोज़मर्रा का व्यवहार कितने जुड़े हैं। क्या तुम रविवार को एक इंसान हो और बाकी हफ्ते कोई और, जहाँ कमज़ोर दोस्त का मज़ाक उड़ाना, किसी को सोशल मीडिया पर बाहर करना, या किसी की मजबूरी का फायदा उठाना सामान्य लगता है। इस्राएल का पाप यही था, धर्म एक खाना था, और ज़िंदगी कुछ और। परमेश्वर दोनों को एक साथ देखना चाहते हैं। और यह भी याद रखो, जब कोई तुम्हें सच बताने की कोशिश करे, माता-पिता, पादरी, कोई दोस्त, तो उसे चुप कराना आसान है लेकिन खतरनाक भी। नबियों को चुप कराना इस्राएल के पतन की शुरुआत थी।
आमोस 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी किसी ने तुम्हें कोई सच्ची बात कही हो जो सुनना मुश्किल था, तुमने उसके साथ क्या किया, सुना या चुप करा दिया?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

धनुर्धारी खड़ा न रह सकेगा, और फुर्ती से दौड़नेवाला न बचेगा, और न घोड़े पर सवार अपना प्राण बचा सकेगा।" जिन पर इस्राएल को सबसे ज़्यादा भरोसा था, वही सबसे पहले गिरे। तेरी भी कोई ताकत होगी, कोई हुनर, कोई बचत, कोई रिश्ता, जिसके भरोसे तू चैन से सोता है। पूछ अपने आप से, अगर वह कल न रहे, तो क्या परमेश्वर काफ़ी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

फिर मैं तुम को मिस्र देश से निकाल लाया, और जंगल में चालीस वर्ष तक लिए फिरता रहा।" परमेश्वर सिर्फ़ निकालकर छोड़ नहीं देता, वह चालीस साल साथ चलता है। पर आमोस यह याद इसलिए दिला रहा है क्योंकि इस्राएल भूल चुका था। सोचो, तुम्हारे जीवन का वह जंगल जहाँ वह तुम्हें उठाए फिरा, क्या तुम अब भी उसका ज़िक्र करते हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

यरूशलेम के भवन, वही जगह जहाँ परमेश्वर का मन्दिर खड़ा था। फिर भी आमोस कहता है, "इसलिए मैं यहूदा में आग भेजूँगा, और वह यरूशलेम के भवनों को भस्म कर देगी।" जो आग पड़ोसी जातियों पर गिरी थी, वही अब अपने ही लोगों पर। सच यह है कि परमेश्वर के करीब होने का नाम नहीं, उसकी बात मानना बचाता है। तेरी कौन सी आदत है जिसे तू इसलिए पाले हुए है क्योंकि तू सोचता है, मैं तो विश्वासी हूँ, मुझे कुछ नहीं होगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

आसपास की जातियों पर दोष लगा था क्रूरता का, खून का, निर्दयता का। पर यहूदा पर? "उन्होंने यहोवा की व्यवस्था को तुच्छ जाना और उसकी विधियों को नहीं माना।" उनके पास परमेश्वर का वचन था, और वही उनके विरुद्ध गवाही बन गया।

और ध्यान दे, जो झूठ उन्हें भटकाता रहा, वह उनके पुरखाओं से चला आ रहा था। हर विरासत में मिली बात सच्ची नहीं होती। तेरी खुली बाइबिल तुझे धन्य बनाती है या जवाबदेह, यह इस पर है कि तू उसे मानता है या बस रखता है।

छोटे बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?

हमारे पास छोटे बच्चों (3 से 5 वर्ष) और प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए अलग संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें