3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

कुलुस्सियों 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पौलुस बहुत दूर था। एक छोटे कमरे में बैठा था। कमरे में एक छोटी मोमबत्ती जल रही थी। बाहर अंधेरा था, और सब चुप था। उसके हाथ में कागज़ था। और एक कलम। कलम से खर-खर की आवाज़ आती थी।

पौलुस ने कुलुस्से के लोगों को कभी नहीं देखा था। उनका चेहरा भी नहीं देखा था। फिर भी वह उनसे प्यार करता था। बहुत प्यार करता था। हर दिन वह उनके लिए मेहनत करता था। हर दिन वह उनके लिए परमेश्वर से बात करता था। फिर उसने एक पत्र लिखना शुरू किया।

उसने लिखा, "मैं चाहता हूँ तुम्हारा दिल मज़बूत हो।" वह चाहता था कि सब लोग प्यार से एक साथ बंधे रहें। जैसे धागे मिलकर एक गरम कंबल बनाते हैं। और वह चाहता था, वे यीशु को अच्छी तरह जान लें। यीशु में एक खज़ाना छिपा है, कहा पौलुस। एक बड़ा खज़ाना। बुद्धि का खज़ाना। ज्ञान का खज़ाना।

पौलुस को डर था। उसे डर था कि कोई उन्हें धोखा दे। मीठी मीठी बातों से, जो सच नहीं हैं। इसलिए उसने लिखा, "चौकस रहो!"

इसका क्या अर्थ है?

फिर पौलुस ने एक तस्वीर बनाई। उसने सोचा एक बड़े पेड़ के बारे में। पेड़ की जड़ें मिट्टी में गहरी जाती हैं। बहुत गहरी। इसलिए जब तेज़ हवा चले, जब तूफ़ान आए, पेड़ नहीं गिरता। वह मज़बूत खड़ा रहता है।

पौलुस ने कहा, "तुम भी यीशु में ऐसे ही जड़ पकड़ो।" बढ़ते जाओ, जैसे पेड़ बढ़ता है। और धन्यवाद करते रहो, हर दिन। यही सबसे ज़रूरी बात थी। यीशु को मज़बूती से पकड़े रहना।

एक ही कड़ी

कुछ लोग कहते थे, "यह मत छुओ। वह मत खाओ।" नियम ही नियम, हर तरफ़ नियम। पर पौलुस ने कहा, ये नियम तो बस परछाईं हैं। धूप में तुम्हारी परछाईं ज़मीन पर पड़ती है, लंबी और काली। पर परछाईं तुम नहीं हो। असली तुम कुछ और हो।

असली चीज़ यीशु है। पौलुस ने लिखा, यीशु में परमेश्वर पूरी तरह रहते हैं। यीशु क्रूस पर मरे। उन्होंने हमारे सब अपराध क्षमा कर दिए, हर एक अपराध। फिर परमेश्वर ने उन्हें मरे हुओं में से जिला दिया। और जो यीशु पर विश्वास करते हैं, वे भी उनके साथ नए सिरे से जीते हैं।

आपके लिए

तुम भी यीशु को पकड़ सकते हो। जैसे एक छोटा पेड़ अपनी जड़ें गहरी करता है, वैसे ही तुम हर दिन यीशु को थोड़ा और जान सकते हो। हर दिन परमेश्वर का धन्यवाद करो, भले खाने के लिए, भले सोने के लिए, भले खेलने के लिए। जब कोई तुम्हें उलझाने वाली बातें कहे, याद रखो: यीशु असली है। यीशु सबसे बड़ा है।

बात करें

तुम्हारी जड़ें कहाँ गहरी होनी चाहिए? क्या तुम आज परमेश्वर को धन्यवाद दे सकते हो?

साथ मिलकर प्रार्थना करें

प्रभु यीशु, मुझे आपमें जड़ पकड़ने दीजिए। मुझे आपको और जानने दीजिए। धन्यवाद कि आप असली हैं। आमीन।

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कुलुस्सियों 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

कुलुस्सियों 2 किस विषय में है?
पौलुस बहुत दूर था। एक छोटे कमरे में बैठा था। कमरे में एक छोटी मोमबत्ती जल रही थी। बाहर अंधेरा था, और सब चुप था। उसके हाथ में कागज़ था। और एक कलम। कलम से खर-खर की आवाज़ आती थी।
कुलुस्सियों 2 क्या कहता है?
उसने लिखा, "मैं चाहता हूँ तुम्हारा दिल मज़बूत हो।" वह चाहता था कि सब लोग प्यार से एक साथ बंधे रहें। जैसे धागे मिलकर एक गरम कंबल बनाते हैं। और वह चाहता था, वे यीशु को अच्छी तरह जान लें। यीशु में एक खज़ाना छिपा है, कहा पौलुस। एक बड़ा खज़ाना। बुद्धि का खज़ाना। ज्ञान का खज़ाना।
कुलुस्सियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर पौलुस ने एक तस्वीर बनाई। उसने सोचा एक बड़े पेड़ के बारे में। पेड़ की जड़ें मिट्टी में गहरी जाती हैं। बहुत गहरी। इसलिए जब तेज़ हवा चले, जब तूफ़ान आए, पेड़ नहीं गिरता। वह मज़बूत खड़ा रहता है।
नन्हे बच्चे कुलुस्सियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
कुछ लोग कहते थे, "यह मत छुओ। वह मत खाओ।" नियम ही नियम, हर तरफ़ नियम। पर पौलुस ने कहा, ये नियम तो बस परछाईं हैं। धूप में तुम्हारी परछाईं ज़मीन पर पड़ती है, लंबी और काली। पर परछाईं तुम नहीं हो। असली तुम कुछ और हो।
कुलुस्सियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी यीशु को पकड़ सकते हो। जैसे एक छोटा पेड़ अपनी जड़ें गहरी करता है, वैसे ही तुम हर दिन यीशु को थोड़ा और जान सकते हो। हर दिन परमेश्वर का धन्यवाद करो, भले खाने के लिए, भले सोने के लिए, भले खेलने के लिए। जब कोई तुम्हें उलझाने वाली बातें कहे, याद रखो: यीशु असली है। यीशु सबसे बड़ा है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे हुए हैं।" पौलुस यह उन लोगों को लिख रहा था जिन्हें कोई समझा रहा था कि मसीह के अलावा भी कुछ और चाहिए। पर खज़ाना कहीं और नहीं, मसीह में छिपा है। छिपा हुआ, यानी खोजना पड़ेगा। तू जिस उत्तर के लिए इधर उधर भटक रहा है, क्या तूने उसे उसके पास बैठकर ढूँढ़ा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्त धन्यवाद करते रहो।"

जड़ें नीचे जाती हैं, दिखती नहीं। पर उन्हीं की वजह से पेड़ आँधी में खड़ा रहता है। तेरा विश्वास भी वहीं मजबूत होता है जहाँ कोई नहीं देखता।

और ध्यान दे, पौलुस अंत में धन्यवाद जोड़ता है। जो मसीह में गहरा जड़ा है, उसकी शिकायतें कम और कृतज्ञता ज़्यादा हो जाती है। आज तेरे मुँह से क्या ज़्यादा निकल रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पौलुस अभी अभी कह चुका था कि मसीह में "ज्ञान और बुद्धि के सारे भण्डार छिपे हुए हैं," और फिर तुरन्त चेतावनी देता है, "यह मैं इसलिए कहता हूँ कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे।" धोखा हमेशा भद्दा नहीं लगता, वह मीठा लगता है, समझदार लगता है। बचाव तर्क नहीं, मसीह की गहरी पहचान है। जिसे तू सचमुच जानता है, उसकी नकल तुझे धोखा नहीं दे पाएगी।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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