व्यवस्थाविवरण 25
छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
धूप बहुत तेज़ थी। खेत में एक बैल काम कर रहा था। वह अनाज पर चल-चल कर दाने निकाल रहा था। बैल भूखा था। उसके मुँह के पास अनाज की खुशबू आ रही थी।
किसान वहाँ खड़ा था। उसने बैल का मुँह नहीं बाँधा। उसने बैल को खाने दिया। थोड़ा-थोड़ा अनाज, जब वह काम करता था। बैल खुश हुआ। उसने दाने चबाए, और फिर से चला। किसान ने उसे प्यार से देखा।
शाम हुई। किसान घर आया। उसके हाथ में एक तराजू था। चमकता हुआ, लोहे का तराजू। वह अपने पड़ोसी को अनाज तौल कर दे रहा था। उसने पूरा-पूरा तौला। एक दाना भी कम नहीं।
इसका क्या अर्थ है?
परमेश्वर यहोवा ये सब बातें देख रहे थे। उन्होंने बैल को देखा, जो खुशी से खा रहा था। उन्होंने तराजू को देखा, जो ठीक-ठीक तौल रहा था।
परमेश्वर कहते हैं, "तेरे बटखरे और नपुए पूरे-पूरे और धर्म के हों।" इसका मतलब है, कम मत तौलना। झूठ मत बोलना। और भूखे बैल का मुँह मत बाँधना।
परमेश्वर को अच्छा लगता है जब कोई सच्चा हो। परमेश्वर को अच्छा लगता है जब कोई दयालु हो, छोटे जानवर पर भी। वे देख रहे हैं। हर जगह। हर समय।
सूत्र
परमेश्वर हमेशा सच्चे और भले रहे हैं। यीशु मसीह भी ऐसे ही थे। वे हमेशा सच बोलते थे। वे कभी किसी को धोखा नहीं देते थे।
जैसे किसान ने बैल का ध्यान रखा, वैसे ही यीशु मसीह हर एक का ध्यान रखते हैं। छोटे का भी। भूखे का भी। परमेश्वर की आँखें प्यार से देखती हैं।
तेरे लिए
जब तू खेलता है, पूरा-पूरा दे। कम मत दे। जब तेरे पास कुछ है, अपने दोस्त को ठीक-ठीक बाँट। अगर तेरे पास कोई जानवर है, उसे प्यार से खाना दे। परमेश्वर देख रहे हैं। वे खुश होते हैं।
बात करें
अगर तेरे पास दो बिस्कुट हों, और तेरे दोस्त के पास एक भी नहीं, तू क्या करेगा?
क्या तुझे लगता है परमेश्वर देखते हैं जब तू सच बोलता है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें देखते हैं। मुझे सच्चा बनाइए। मुझे दयालु बनाइए, सबके साथ। आमीन।
व्यवस्थाविवरण 25 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
व्यवस्थाविवरण 25 किस विषय में है?
व्यवस्थाविवरण 25 क्या कहता है?
व्यवस्थाविवरण 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे व्यवस्थाविवरण 25 से क्या सीख सकते हैं?
व्यवस्थाविवरण 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जिससे कि उसका नाम इस्राएल में से मिट न जाए।" एक मरे हुए आदमी का नाम, जिसकी अब कोई आवाज़ नहीं, कोई ताकत नहीं। फिर भी परमेश्वर ने पूरे समाज को आदेश दिया कि उसे भुलाया न जाए। सोचो, तुम्हें लगता है तुम्हारी कहानी किसी को याद नहीं। पर जो परमेश्वर मिटे हुए नामों की चिंता करता है, वह तुम्हारा नाम भी नहीं भूला।
तब तू उस स्त्री का हाथ काट डालना; उस पर तरस न खाना।" कठोर लगता है। पर सोचो, वह स्त्री अपने पति को बचा रही थी, नीयत अच्छी थी। फिर भी उसने दूसरे की संतान की आशा हमेशा के लिए मिटा दी। अपनों की रक्षा करते हुए भी हमें एक सीमा दी गई है। जिसे तुम प्रेम में बचा रहे हो, उसके लिए किसी और का सम्मान कुचलना जायज़ नहीं होता।
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