3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

सभोपदेशक 11

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

सुबह हुई। सूरज की पहली किरण खेत पर गिरी। एक किसान अपने घर से निकला। उसके हाथ में बीज था, और उसकी टोकरी में रोटी थी। रोटी की खुशबू हवा में फैली। किसान नदी के पास गया। उसने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा। उसने वह टुकड़ा बहते पानी पर डाल दिया। पानी में छपाक की आवाज़ हुई। पानी उसे धीरे धीरे बहा ले गया। किसान मुस्कुराया। उसने सोचा, "शायद यह रोटी किसी भूखे तक पहुँच जाएगी।"

फिर किसान खेत की ओर गया। उसने ऊपर आकाश देखा। बड़े बड़े बादल थे, भारी, पानी से भरे। ठंडी हवा उसके गालों पर बही। दूर एक बड़ा पेड़ हिला, हिला, और गिर गया। पेड़ जहाँ गिरा, वहीं पड़ा रहा। फिर बारिश हुई। टपटप, टपटप, धरती पर पानी गिरा।

किसान नहीं जानता था हवा कहाँ जा रही है। वह नहीं जानता था बादल कब बरसेंगे। पर उसने फिर भी बीज बोया। सुबह उसने बीज बोया। साँझ को भी उसने अपना हाथ नहीं रोका।

इसका अर्थ क्या है?

किसान को कुछ पता नहीं था। पेड़ कब गिरेगा, वह नहीं जानता था। छोटा बच्चा माँ के पेट में कैसे बढ़ता है, वह नहीं जानता था। हवा किस रास्ते चलती है, वह नहीं जानता था। अगर वह सिर्फ हवा को देखता रहता, तो वह कभी बीज नहीं बोता। अगर वह सिर्फ बादलों को देखता रहता, तो वह कभी फसल नहीं काटता। पर एक बात वह जानता था। परमेश्वर सब कुछ करते हैं। परमेश्वर जानते हैं हवा कहाँ जाती है। परमेश्वर जानते हैं कब बादल बरसेंगे। परमेश्वर जानते हैं बीज कब बड़ा होगा।

बड़ी कहानी से जोड़

किसान परमेश्वर पर भरोसा रखता था। वह नहीं जानता था आगे क्या होगा, पर फिर भी उसने बीज बोया। परमेश्वर ने उसे कभी नहीं छोड़ा। यीशु मसीह भी हमें सिखाते हैं, परमेश्वर पर भरोसा रखो। वे हर दिन हमारी देखभाल करते हैं, जैसे उन्होंने उस किसान की की।

तुम्हारे लिए

सूरज की रोशनी अच्छी लगती है, है ना? धूप में खेलना अच्छा लगता है। परमेश्वर ने वह रोशनी बनाई। जब तुम छोटे हो, तुम बहुत खुश रह सकते हो। दौड़ो, हँसो, खेलो। परमेश्वर तुम्हें हर दिन देखते हैं, और वे तुमसे बहुत प्यार करते हैं। तुम भी हर दिन परमेश्वर के साथ चल सकते हो। तुम भी किसान जैसे बन सकते हो। अपना खिलौना किसी दोस्त को दे दो। अपनी रोटी किसी के साथ बाँट दो। तुम नहीं जानते, शायद वह भूखा हो।

बात करें

सुबह किसान ने अपनी रोटी के साथ क्या किया? परमेश्वर हवा और बादलों के बारे में क्या जानते हैं, जो किसान नहीं जानता था?

मिलकर प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद सूरज की रोशनी के लिए। धन्यवाद हवा और बादलों के लिए। आप सब कुछ जानते हैं। हम आप पर भरोसा रखते हैं। हमें भी बाँटना सिखाइए। आमीन।

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सभोपदेशक 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

सभोपदेशक 11 किस विषय में है?
सुबह हुई। सूरज की पहली किरण खेत पर गिरी। एक किसान अपने घर से निकला। उसके हाथ में बीज था, और उसकी टोकरी में रोटी थी। रोटी की खुशबू हवा में फैली। किसान नदी के पास गया। उसने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा। उसने वह टुकड़ा बहते पानी पर डाल दिया। पानी में छपाक की आवाज़ हुई। पानी उसे धीरे धीरे बहा ले गया। किसान मुस्कुराया। उसने सोचा, "शायद यह रोटी किसी भूखे तक पहुँच जाएगी।"
सभोपदेशक 11 क्या कहता है?
फिर किसान खेत की ओर गया। उसने ऊपर आकाश देखा। बड़े बड़े बादल थे, भारी, पानी से भरे। ठंडी हवा उसके गालों पर बही। दूर एक बड़ा पेड़ हिला, हिला, और गिर गया। पेड़ जहाँ गिरा, वहीं पड़ा रहा। फिर बारिश हुई। टपटप, टपटप, धरती पर पानी गिरा।
सभोपदेशक 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किसान नहीं जानता था हवा कहाँ जा रही है। वह नहीं जानता था बादल कब बरसेंगे। पर उसने फिर भी बीज बोया। सुबह उसने बीज बोया। साँझ को भी उसने अपना हाथ नहीं रोका।
नन्हे बच्चे सभोपदेशक 11 से क्या सीख सकते हैं?
किसान को कुछ पता नहीं था। पेड़ कब गिरेगा, वह नहीं जानता था। छोटा बच्चा माँ के पेट में कैसे बढ़ता है, वह नहीं जानता था। हवा किस रास्ते चलती है, वह नहीं जानता था। अगर वह सिर्फ हवा को देखता रहता, तो वह कभी बीज नहीं बोता। अगर वह सिर्फ बादलों को देखता रहता, तो वह कभी फसल नहीं काटता। पर एक बात वह जानता था। परमेश्वर सब कुछ करते हैं। परमेश्वर जानते हैं हवा कहाँ जाती है। परमेश्वर जानते हैं कब बादल बरसेंगे। परमेश्वर जानते हैं बीज कब बड़ा होगा।
सभोपदेशक 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
किसान परमेश्वर पर भरोसा रखता था। वह नहीं जानता था आगे क्या होगा, पर फिर भी उसने बीज बोया। परमेश्वर ने उसे कभी नहीं छोड़ा। यीशु मसीह भी हमें सिखाते हैं, परमेश्वर पर भरोसा रखो। वे हर दिन हमारी देखभाल करते हैं, जैसे उन्होंने उस किसान की की।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

अपनी रोटी जल के ऊपर डाल दे, क्योंकि बहुत दिनों के बाद तू उसे फिर पाएगा।" पानी पर रोटी डालना बेवकूफी जैसा लगता है, कुछ लौटता दिखता ही नहीं। पर सुलैमान कहता है, दे दे, भले ही फल तुरन्त न दिखे। तूने जो भलाई चुपचाप की, जो माफ किया, जो सहारा दिया, वह बहता हुआ लगता है, पर परमेश्वर उसे गिनता है। क्या तू बिना रसीद के देना सीखेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

यदि बादल जल से भरे हों, तो वे पृथ्वी पर उसे बरसा देते हैं; और यदि वृक्ष दक्षिण या उत्तर की ओर गिरे, तो जिस स्थान पर वह गिरता है, वहीं पड़ा रहता है।"

बादल कब बरसेंगे, पेड़ किस ओर गिरेगा, यह तेरे हाथ में नहीं। पर बीज बोना तेरे हाथ में है। जो तू बदल नहीं सकता, उसकी चिंता में बैठा रहेगा, तो जो कर सकता था वह भी छूट जाएगा। आज उठ, बो दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

जवानी एक तोहफ़ा है, और सभोपदेशक इससे इनकार नहीं करता। वह कहता है, "हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों में तेरा मन तुझे आनन्दित करे।" पर उसी साँस में वह जोड़ता है कि परमेश्वर तुझे इन सब बातों का न्याय में ले आएगा।

यह डराने के लिए नहीं, जगाने के लिए है। जी भरकर जी, पर याद रख कि हर हँसी, हर चुनाव किसी की आँखों के सामने हो रहा है जो तुझसे प्रेम करता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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