यहेजकेल 41
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी यहेजकेल को हाथ से पकड़ कर ले गया। वे एक बड़े घर के पास पहुँचे। यह घर परमेश्वर का घर था। उसके खम्भे ऊँचे थे। उसका द्वार बड़ा था। आदमी ने एक बाँस लिया। वह मापता गया। यहाँ छः हाथ, वहाँ दस हाथ, वहाँ बीस हाथ। यहेजकेल देखता रहा और सुनता रहा।
वे भीतर गए। और भीतर एक कमरा था, बहुत खास कमरा। आदमी ने कहा, "यह परमपवित्र स्थान है।" यहेजकेल चुप हो गया। यह जगह बहुत पवित्र थी।
घर के चारों ओर छोटी-छोटी कोठरियाँ बनी थीं। एक के ऊपर एक, तीन मंजिल तक। नीचे की कोठरी छोटी थी। ऊपर की कोठरी बड़ी थी। घर जैसे-जैसे ऊपर जाता, चौड़ा होता जाता। लोग सीढ़ियों से ऊपर चढ़ सकते थे।
दीवारों पर कुछ सुंदर चीज़ें खुदी हुई थीं। करूब, यानी पंखों वाले स्वर्गदूत जैसे चित्र। और खजूर के पेड़। एक करूब, फिर एक पेड़, फिर एक करूब, फिर एक पेड़। बार-बार, पूरी दीवार पर। हर करूब के दो मुख थे, एक मुख आदमी का, दूसरा मुख जवान सिंह का। पूरा घर इन चित्रों से भरा था, नीचे से लेकर ऊपर तक।
वहाँ एक मेज भी थी, काठ की बनी। आदमी ने कहा, "यह यहोवा के सम्मुख की मेज है।" यह मेज परमेश्वर के सामने रखी थी।
द्वारों के किवाड़ों पर भी वही करूब और खजूर के पेड़ खुदे थे। चारों ओर, हर जगह। जैसे पूरा घर गा रहा हो, "यह घर खास है, यह घर खास है।"
इसका मतलब क्या है?
यह घर ऐसे ही नहीं बना था। हर हाथ, हर नाप, हर चित्र बहुत ध्यान से बनाया गया था। क्योंकि यह परमेश्वर का घर था। परमेश्वर कोई छोटी बात नहीं हैं। इसलिए उनका घर भी छोटी बात नहीं था। हर कोना, हर दीवार कह रही थी, "यहाँ परमेश्वर रहते हैं। यहाँ ध्यान से आओ।"
समान सूत्र
यीशु मसीह भी एक दिन कहेंगे, "मुझमें परमेश्वर का घर है।" परमेश्वर अब केवल पत्थर के घर में नहीं रहते। वे यीशु में, और उनसे प्यार करनेवालों में रहते हैं। वह घर बहुत सुंदर था, पर यीशु उससे भी बढ़कर हैं।
तेरे लिए
जब तुम गिरजाघर जाते हो, याद करना। वह जगह खास है। वहाँ परमेश्वर से मिलते हैं। धीरे चलना, ध्यान से सुनना, जैसे यहेजकेल ने सुना।
बातचीत के लिए सवाल:
उस घर में दीवारों पर क्या चित्र खुदे थे?
उस मेज़ के बारे में आदमी ने क्या कहा था?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, आपका घर बहुत सुंदर था। आप बहुत खास हैं। हमें भी आपसे मिलना अच्छा लगता है। धन्यवाद कि हम आपके पास आ सकते हैं। आमीन।
यहेजकेल 41 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यहेजकेल 41 किस विषय में है?
यहेजकेल 41 क्या कहता है?
यहेजकेल 41 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे यहेजकेल 41 से क्या सीख सकते हैं?
यहेजकेल 41 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मन्दिर और पवित्रस्थान के दो-दो किवाड़ थे।" इस लम्बी नापजोख के बीच परमेश्वर किवाड़ों का भी ज़िक्र करता है। किवाड़ दो काम करते हैं, वे भीतर आने देते हैं और वे रोकते भी हैं। पवित्रता कोई ठंडी दीवार नहीं, वह एक द्वार है। सोचो, तुम्हारे जीवन में कौन सा किवाड़ है जिसे खोलने से तुम डरते हो, और क्या वह ठीक वही जगह है जहाँ परमेश्वर खड़ा है?
भवन का पूर्व की ओर का सामना और आँगन सौ हाथ चौड़ा था।" सुनने में यह सिर्फ नाप है। पर जो लोग बंधुआई में बैठे थे, उनके लिए हर हाथ एक वादा था। परमेश्वर उसी की नाप लेता है जिसे वह सचमुच बनाने वाला है। और पूर्व की ओर, जहाँ से सूरज उगता है, वहीं से उसका तेज लौटकर आया। तेरे टूटे हुए हिस्से को भी वह नाप रहा है।
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें