3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

एज्रा 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत दूर एक बड़ा देश था। नाम था फारस। वहाँ एक राजा रहता था। उसका नाम था कुस्रू।

राजा के पास बड़ा महल था। ऊँची दीवारें। चमकीला सोना। पर राजा के मन में कुछ हुआ।

परमेश्वर ने राजा के मन को छुआ। हल्के से, चुपचाप। जैसे कोई हवा दिल को सहलाती है।

राजा उठा। उसने एक चिट्ठी लिखवाई। पूरे देश में भेजी।

चिट्ठी में लिखा था: "स्वर्ग के परमेश्वर ने मुझे यह पूरी पृथ्वी दी है। अब उन्होंने मुझसे कहा, यरूशलेम में मेरे लिए एक घर बनवा।"

लोग यह सुनकर रुक गए। चुप हो गए। फिर धीरे-धीरे हिलने लगे।

यहूदा और बिन्यामीन के परिवार खड़े हुए। याजक खड़े हुए। लेवीय खड़े हुए। सब यरूशलेम जाने को तैयार हुए।

उनके पड़ोसियों ने भी मदद की। किसी ने चाँदी दी। किसी ने सोना दिया। किसी ने ऊँट और बकरियाँ दी। बहुत सारी चीज़ें, अपने-अपने मन से।

फिर राजा ने कुछ खास निकाला। पुराने चमकीले कटोरे और परात। ये वही पात्र थे जो पहले परमेश्वर के घर में रखे थे। बहुत साल पहले एक और राजा उन्हें ले गया था। दूर, अपने देवता के मंदिर में।

अब कुस्रू ने उन्हें फिर से निकाला। गिना। एक एक करके। तीस सोने के परात, चाँदी के हज़ार परात, और भी बहुत कुछ। पाँच हज़ार चार सौ पात्र, चमचमाते हुए।

शेशबस्सर नाम के एक आदमी ने सब गिनकर लिया। उसने उन्हें सावधानी से उठाया। और यरूशलेम की ओर चल पड़ा।

इसका अर्थ क्या है?

सोचो, राजा कुस्रू यहोवा को नहीं जानता था। वह इस्राएल का नहीं था। पर परमेश्वर ने फिर भी उसके मन को हिलाया।

परमेश्वर बड़े राजाओं के मन को भी छू सकते हैं। चुपचाप। जैसे उंगली से हल्का धक्का।

और परमेश्वर अपने लोगों को नहीं भूले। कई साल वे दूर रहे, बंदी बनकर। पर परमेश्वर ने रास्ता बनाया। घर जाने का रास्ता।

समान सूत्र

परमेश्वर ने पहले ही यिर्मयाह के मुँह से यह वचन कहा था। और वह वचन पूरा हुआ। ठीक वैसे ही जैसे परमेश्वर ने कहा था।

परमेश्वर हमेशा अपनी बात रखते हैं। जो वे कहते हैं, वह होता है।

बहुत साल बाद, परमेश्वर ने एक और वचन पूरा किया। उन्होंने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु भी घर लाने आए। हमें परमेश्वर के पास वापस लाने आए।

जैसे शेशबस्सर पात्रों को यरूशलेम ले गया, वैसे ही यीशु हमें परमेश्वर के पास ले जाते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम्हारे मन में भी कभी कुछ हल्का सा हलचल होती है? जैसे कोई चुपचाप कहता है, यह करो।

शायद वह परमेश्वर होते हैं। जैसे उन्होंने राजा कुस्रू के मन को छुआ।

जब तुम्हारे मन में अच्छी बात आए, प्रार्थना करने का, माँ को गले लगाने का, तो उसे सुनो। परमेश्वर बोल सकते हैं, बहुत हल्के से।

बात करें

राजा कुस्रू के मन में परमेश्वर ने क्या किया?

तुम्हें कैसे पता चलता है कि परमेश्वर तुमसे कुछ कहना चाहते हैं?

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, आप राजाओं के मन को भी छू सकते हैं। मेरे मन को भी छुइए। मुझे अपनी आवाज़ सुनने में मदद करें। यीशु के नाम में, आमीन।

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एज्रा 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

एज्रा 1 किस विषय में है?
बहुत दूर एक बड़ा देश था। नाम था फारस। वहाँ एक राजा रहता था। उसका नाम था कुस्रू।
एज्रा 1 क्या कहता है?
यहूदा और बिन्यामीन के परिवार खड़े हुए। याजक खड़े हुए। लेवीय खड़े हुए। सब यरूशलेम जाने को तैयार हुए।
एज्रा 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सोचो, राजा कुस्रू यहोवा को नहीं जानता था। वह इस्राएल का नहीं था। पर परमेश्वर ने फिर भी उसके मन को हिलाया।
नन्हे बच्चे एज्रा 1 से क्या सीख सकते हैं?
जैसे शेशबस्सर पात्रों को यरूशलेम ले गया, वैसे ही यीशु हमें परमेश्वर के पास ले जाते हैं।
एज्रा 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, आप राजाओं के मन को भी छू सकते हैं। मेरे मन को भी छुइए। मुझे अपनी आवाज़ सुनने में मदद करें। यीशु के नाम में, आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

जो लौटकर नहीं जा रहे थे, उन्होंने ही जानेवालों के हाथ मजबूत किए। "उनके आस-पास के सब रहनेवालों ने... उनकी सहायता की।" चाँदी, सोना, पशु, सब कुछ ऐसे लोगों के हाथ में जो शायद फिर कभी न दिखें। परमेश्वर का काम अकेले बुलाए हुए लोग नहीं करते, पीछे रहनेवाले देनेवाले भी करते हैं। तेरा हिस्सा शायद जाना नहीं, थामना है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

सब लोग यरूशलेम नहीं लौटे। कुछ बाबेल में ही रह गए। पर कुस्रू का आदेश उन्हें भुलाता नहीं: "उस स्थान के मनुष्य चाँदी, सोना, धन और पशु देकर उसकी सहायता करें।" जो जा नहीं सकता, वह देकर साथ चल सकता है। परमेश्वर का भवन उन हाथों से भी बनता है जो कभी उसकी दीवार को छूते नहीं। तू आज किसके कदमों को अपनी भेंट से मजबूत कर रहा है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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