3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

गलातियों 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक आदमी था। उसका नाम था पौलुस। पौलुस मेज़ पर बैठा था। उसके हाथ में कलम थी, सामने कागज़ था। वह एक चिट्ठी लिख रहा था। यह चिट्ठी दूर देश के दोस्तों के लिए थी। वे परमेश्वर के लोग थे, गलातिया में रहते थे।

पौलुस ने लिखा, यीशु मसीह जीवित हैं। परमेश्वर पिता ने उन्हें मरे हुओं में से जिलाया। पौलुस ने लिखा, परमेश्वर तुम्हें अनुग्रह दें। परमेश्वर तुम्हें शांति भी दें। यीशु मसीह ने अपने आपको दे दिया। उन्होंने यह हमारे पापों के लिए किया।

पर पौलुस पहले ऐसा नहीं था। पहले वह बहुत बुरा था, बहुत कठोर था। वह यीशु से प्यार करनेवालों को ढूंढता था। वह उन्हें पकड़ता, और उन्हें दुख देता था। उसकी आँखों में गुस्सा था। उसके कदम तेज़ और भारी थे। वह सोचता था, मैं सही काम कर रहा हूँ। पर वह गलत था, बहुत गलत था।

इसका क्या अर्थ है?

फिर एक दिन, सब कुछ बदल गया। परमेश्वर ने पौलुस को बुलाया, प्यार से बुलाया। पौलुस का कठोर दिल अचानक नरम हो गया। उसकी आँखों से आँसू बहे, पर खुशी के आँसू। अब वह डरा नहीं, अब वह भागा नहीं। अब वह यीशु से प्यार करने लगा।

पौलुस अरब देश गया। फिर वह दमिश्क को लौट आया। तीन साल बाद वह यरूशलेम गया। वहाँ वह पतरस से मिला। वह पंद्रह दिन उसके साथ रहा। उसने याकूब को भी देखा। फिर वह सीरिया और किलिकिया गया।

जिन कलीसियाओं ने उसे कभी नहीं देखा था, उन्होंने भी सुना। उन्होंने सुना, जो पहले सताता था, अब सुसमाचार सुनाता है। सब हैरान रह गए, और खुश भी हुए। वे परमेश्वर की महिमा करने लगे।

समान सूत्र

यीशु मसीह ने अपने आपको हमारे लिए दे दिया। उन्होंने यह हमारे पापों के लिए किया। ताकि हम इस बुरे संसार से छूट जाएँ। पौलुस को यह अच्छी खबर किसी मनुष्य ने नहीं सिखाई। यीशु मसीह ने खुद उसे यह दिखाया। यही अच्छी खबर है, हर जगह के लिए। यीशु मसीह की महिमा सदा सदा रहे।

आपके लिए

क्या तुम कभी किसी पर गुस्सा होते हो? क्या तुमसे कभी कोई गलती हो जाती है? परमेश्वर ने पौलुस के कठोर दिल को बदल दिया। परमेश्वर तुम्हारे दिल को भी बदल सकते हैं। वे तुमसे बहुत प्यार करते हैं। वे तुम्हें भी नरम दिल दे सकते हैं।

बातचीत करें

पौलुस पहले कैसा था, और बाद में कैसा हो गया? परमेश्वर ने पौलुस का दिल कैसे बदला?

साथ मिलकर प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, आपने पौलुस के कठोर दिल को नरम किया। मेरा दिल भी नरम कीजिए। मुझे भी यीशु से प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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गलातियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

गलातियों 1 किस विषय में है?
एक आदमी था। उसका नाम था पौलुस। पौलुस मेज़ पर बैठा था। उसके हाथ में कलम थी, सामने कागज़ था। वह एक चिट्ठी लिख रहा था। यह चिट्ठी दूर देश के दोस्तों के लिए थी। वे परमेश्वर के लोग थे, गलातिया में रहते थे।
गलातियों 1 क्या कहता है?
पर पौलुस पहले ऐसा नहीं था। पहले वह बहुत बुरा था, बहुत कठोर था। वह यीशु से प्यार करनेवालों को ढूंढता था। वह उन्हें पकड़ता, और उन्हें दुख देता था। उसकी आँखों में गुस्सा था। उसके कदम तेज़ और भारी थे। वह सोचता था, मैं सही काम कर रहा हूँ। पर वह गलत था, बहुत गलत था।
गलातियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस अरब देश गया। फिर वह दमिश्क को लौट आया। तीन साल बाद वह यरूशलेम गया। वहाँ वह पतरस से मिला। वह पंद्रह दिन उसके साथ रहा। उसने याकूब को भी देखा। फिर वह सीरिया और किलिकिया गया।
नन्हे बच्चे गलातियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु मसीह ने अपने आपको हमारे लिए दे दिया। उन्होंने यह हमारे पापों के लिए किया। ताकि हम इस बुरे संसार से छूट जाएँ। पौलुस को यह अच्छी खबर किसी मनुष्य ने नहीं सिखाई। यीशु मसीह ने खुद उसे यह दिखाया। यही अच्छी खबर है, हर जगह के लिए। यीशु मसीह की महिमा सदा सदा रहे।
गलातियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पौलुस पहले कैसा था, और बाद में कैसा हो गया? परमेश्वर ने पौलुस का दिल कैसे बदला?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

पौलुस दो बार वही बात कहता है: "जैसा हम पहले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूँ।" वह भूल नहीं गया था। जो बात दिल के बहुत करीब होती है, उसे एक बार कहकर छोड़ा नहीं जाता। यह गुस्सा नहीं, चिंता है, कि कहीं तू उस सुसमाचार से हट न जाए जिसने तुझे मुक्त किया। जिस बात को तूने ग्रहण किया, उसे थामे रह।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस अपनी सबसे शर्मनाक बात को छिपाता नहीं। वह लिखता है, "तुमने तो सुना है कि यहूदी मत में मेरा पूर्वकाल का चरित्र कैसा था, कि मैं परमेश्वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था।" जिस अतीत को वह मिटाना चाहता, अनुग्रह ने उसे गवाही बना दिया। तेरे जीवन का वह हिस्सा जिसे तू किसी को बताना नहीं चाहता, क्या मसीह उसे भी अपनी दया दिखाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

पौलुस लिखता है, "परन्तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला।" यही याकूब कभी यीशु पर विश्वास नहीं करता था। जिस घर में वह पला, वहीं उसने मसीह को न पहचाना। पर अब वह कलीसिया का खम्भा है। तेरे घर में भी कोई है जो अब तक दूर लगता है? याकूब की कहानी तुझसे कहती है, कहानी अभी खत्म नहीं हुई।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पौलुस पत्री के शुरू में ही मसीह के क्रूस की बात लाता है: "उसने अपने आपको हमारे पापों के लिये दे दिया, कि हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए।" उसने कुछ दिया नहीं, अपने आपको दिया। और छुटकारा केवल आगे के लिये नहीं, आज के इस संसार के बीच से है। जिस दबाव, डर और झूठ में तू आज फँसा है, मसीह उसी से तुझे निकालना चाहता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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