3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक आदमी था। उसका नाम था होशे। परमेश्वर ने होशे से बात की।

परमेश्वर ने कहा, "जाओ, गोमेर से विवाह करो।" होशे गया। उसने गोमेर से विवाह किया।

फिर एक बच्चा हुआ। एक छोटा सा बेटा। परमेश्वर ने कहा, "उसका नाम यिज्रेल रख।" यह नाम याद रखने के लिए था।

फिर एक और बच्चा हुआ। एक छोटी सी बेटी। परमेश्वर ने कहा, "उसका नाम लोरुहामा रख।" इस नाम का अर्थ था, "दया नहीं।"

फिर एक और बेटा हुआ। परमेश्वर ने कहा, "उसका नाम लोअम्मी रख।" इस नाम का अर्थ था, "मेरी प्रजा नहीं।"

क्या अजीब नाम थे! होशे के बच्चे बड़े हो रहे थे। और हर बार जब कोई उनका नाम पुकारता, वह एक बात याद आती। इस्राएल के लोग परमेश्वर से दूर चले गए थे।

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर दुखी थे। जैसे एक पिता दुखी होता है जब उसका बच्चा दूर भाग जाए।

पर परमेश्वर ने एक बात भी कही। एक बहुत अच्छी बात। उन्होंने कहा, "यहूदा के घराने पर मैं दया करूँगा।" दया! फिर से दया!

परमेश्वर कभी अपने लोगों को पूरी तरह नहीं छोड़ते। वे थोड़ी देर के लिए दूर हो सकते हैं। पर परमेश्वर उन्हें भूलते नहीं।

समान सूत्र

परमेश्वर ने एक और बात कही। उन्होंने कहा, "इस्राएलियों की गिनती समुद्र की रेत की सी हो जाएगी।" इतने सारे! रेत के दानों जितने!

और जहाँ कहा गया था, "तुम मेरी प्रजा नहीं हो," वहीं वे कहलाएँगे, "जीवित परमेश्वर के पुत्र।"

क्या सुंदर बात है। "मेरी प्रजा नहीं" से "मेरे बच्चे" बन जाना। यह वैसा ही है जैसे यीशु आते हैं। यीशु हर उस व्यक्ति को अपना बच्चा बनाते हैं जो उनके पास आता है। चाहे वह कितना भी दूर गया हो।

आपके लिए

क्या तुमने कभी किसी को गले लगाया है, जो तुमसे रूठ गया था? फिर भी तुमने उसे प्यार किया?

परमेश्वर वैसे ही हैं। जब हम दूर जाते हैं, वे हमें पुकारते रहते हैं। वे हमें अपने पास बुलाते हैं। वे कहते हैं, "आओ, तुम मेरे बच्चे हो।"

आपस में बात करें

क्या तुम्हें अच्छे नाम पसंद हैं? होशे के बच्चों के नाम अजीब क्यों थे?

परमेश्वर ने कहा कि वे दया करेंगे। दया मिलना कैसा लगता है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें भूलते नहीं। जब हम दूर जाएँ, हमें वापस बुलाइए। हमें अपना बच्चा बनाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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होशे 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 1 किस विषय में है?
परमेश्वर ने कहा, "जाओ, गोमेर से विवाह करो।" होशे गया। उसने गोमेर से विवाह किया।
होशे 1 क्या कहता है?
फिर एक और बेटा हुआ। परमेश्वर ने कहा, "उसका नाम लोअम्मी रख।" इस नाम का अर्थ था, "मेरी प्रजा नहीं।"
होशे 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर परमेश्वर ने एक बात भी कही। एक बहुत अच्छी बात। उन्होंने कहा, "यहूदा के घराने पर मैं दया करूँगा।" दया! फिर से दया!
नन्हे बच्चे होशे 1 से क्या सीख सकते हैं?
और जहाँ कहा गया था, "तुम मेरी प्रजा नहीं हो," वहीं वे कहलाएँगे, "जीवित परमेश्वर के पुत्र।"
होशे 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर वैसे ही हैं। जब हम दूर जाते हैं, वे हमें पुकारते रहते हैं। वे हमें अपने पास बुलाते हैं। वे कहते हैं, "आओ, तुम मेरे बच्चे हो।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

होशे को अपने पहले बेटे का नाम रखना पड़ा "यिज्रेल", उस घाटी का नाम जहाँ येहू ने खून बहाया था। सोचिए, हर बार पिता बेटे को पुकारता और एक पुराना पाप फिर याद आ जाता। परमेश्वर भूलता नहीं, जिसे हमने सालों पहले दबा दिया, वह उसके सामने खुला है। पर उसी नाम का अर्थ है "परमेश्वर बोता है"। जहाँ लहू गिरा था, वहीं वह बीज डालने की सोच रहा था।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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