3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

यिर्मयाह 21

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा सिदकिय्याह महल में बैठा था। बाहर बहुत शोर था। ढाल की आवाज़। तलवार की आवाज़। बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर अपनी सेना लेकर आया था। वह शहर को घेर रहा था। राजा सिदकिय्याह डर गया। बहुत डर गया।

उसने दो आदमी भेजे। एक का नाम पशहूर था। दूसरे का नाम सपन्याह था। वे यिर्मयाह के पास गए। यिर्मयाह परमेश्वर की बात सुनने वाला आदमी था। राजा ने कहा, "यिर्मयाह से पूछो, परमेश्वर हमारी मदद करेंगे क्या?"

यिर्मयाह ने परमेश्वर की आवाज़ सुनी। परमेश्वर ने कहा। और उसका उत्तर कठिन था। परमेश्वर ने कहा, इस बार मैं तुम्हारे साथ नहीं लड़ूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध लड़ूँगा।

इसका क्या मतलब है?

फिर परमेश्वर ने एक बात कही। सुनो, ध्यान से। परमेश्वर ने कहा, मैं तुम्हारे सामने दो रास्ते रखता हूँ। एक रास्ता जीवन का था। एक रास्ता मृत्यु का था।

जो शहर में ही रहेगा, वह मर जाएगा। पर जो शहर से बाहर निकल कर दुश्मन के पास जाएगा, वह जीवित रहेगा। कठिन बात थी। पर सच्ची बात थी।

परमेश्वर ने राजा के घराने से भी कहा। उसने कहा, सुबह-सुबह न्याय करो। जो कोई सताया हुआ है, उसे छुड़ाओ। नहीं तो आग भड़केगी। और वह आग बुझेगी नहीं।

एक ही धागा

परमेश्वर ने जीवन का रास्ता और मृत्यु का रास्ता दिखाया। बहुत साल बाद, यीशु आए। यीशु ने कहा, मैं ही रास्ता हूँ। मैं ही जीवन हूँ। जो मेरे पास आता है, वह जीवित रहता है।

परमेश्वर तब भी बोलते थे। परमेश्वर आज भी बोलते हैं। वे चाहते हैं हम उनकी बात सुनें। वे चाहते हैं हम सही रास्ता चुनें।

तुम्हारे लिए

कभी तुम भी डर जाते हो। अंधेरे में। या जब कोई तेज़ आवाज़ होती है। तब क्या करना है? परमेश्वर से बात करना। उनसे कहना, "मैं डर गया हूँ।"

और एक बात और। जब कोई गिर जाए, तो उसे उठाना। जब कोई रोए, तो उसकी मदद करना। यही सही रास्ता है। यही जीवन का रास्ता है।

आपस में बात करें

जब तुम डरते हो, तब तुम किससे बात करते हो?

तुम अपने किसी दोस्त की मदद कैसे कर सकते हो, जब वह दुखी हो?

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, कभी-कभी मैं डर जाता हूँ। पर आप मेरी बात सुनते हैं। मुझे सही रास्ता दिखाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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यिर्मयाह 21 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यिर्मयाह 21 किस विषय में है?
राजा सिदकिय्याह महल में बैठा था। बाहर बहुत शोर था। ढाल की आवाज़। तलवार की आवाज़। बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर अपनी सेना लेकर आया था। वह शहर को घेर रहा था। राजा सिदकिय्याह डर गया। बहुत डर गया।
यिर्मयाह 21 क्या कहता है?
यिर्मयाह ने परमेश्वर की आवाज़ सुनी। परमेश्वर ने कहा। और उसका उत्तर कठिन था। परमेश्वर ने कहा, इस बार मैं तुम्हारे साथ नहीं लड़ूँगा। मैं तुम्हारे विरुद्ध लड़ूँगा।
यिर्मयाह 21 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
जो शहर में ही रहेगा, वह मर जाएगा। पर जो शहर से बाहर निकल कर दुश्मन के पास जाएगा, वह जीवित रहेगा। कठिन बात थी। पर सच्ची बात थी।
नन्हे बच्चे यिर्मयाह 21 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने जीवन का रास्ता और मृत्यु का रास्ता दिखाया। बहुत साल बाद, यीशु आए। यीशु ने कहा, मैं ही रास्ता हूँ। मैं ही जीवन हूँ। जो मेरे पास आता है, वह जीवित रहता है।
यिर्मयाह 21 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी तुम भी डर जाते हो। अंधेरे में। या जब कोई तेज़ आवाज़ होती है। तब क्या करना है? परमेश्वर से बात करना। उनसे कहना, "मैं डर गया हूँ।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

सिदकिय्याह ने खुद आकर नहीं पूछा, उसने दूत भेजे। और यिर्मयाह का उत्तर शुरू होता है, "तुम सिदकिय्याह से कहो।" परमेश्वर तब भी बोलता है, पर वह बात वैसी नहीं जैसी राजा चाहता था। सोचो, क्या तुम भी संकट में ही उससे पूछते हो, और वही सुनना चाहते हो जो तुमने पहले से तय कर रखा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

सिदकिय्याह ने वर्षों यिर्मयाह की एक न सुनी, पर जब नबूकदनेस्सर की सेना फाटक तक आ पहुँची, तब उसने याजक भेजकर कहलाया, "हमारे लिये यहोवा से पूछ।" संकट ने उसकी जबान खोल दी, पर मन नहीं बदला। सोच, कहीं तेरी प्रार्थना भी सिर्फ आपातकाल का दरवाजा तो नहीं? परमेश्वर तुझसे संकट से पहले भी बात करना चाहता है।

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