हबक्कूक 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी था। उसका नाम था हबक्कूक।
वह एक ऊँचे मीनार पर चढ़ गया। बहुत ऊँचे। वह वहाँ खड़ा हो गया। और चुपचाप देखता रहा।
वह परमेश्वर की बात सुनना चाहता था। इसलिए वह रुका रहा। और रुका रहा।
फिर परमेश्वर बोले। उनकी आवाज़ आई।
परमेश्वर ने कहा, "एक पटिया ले लो। उस पर लिख दो। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखो। ताकि कोई भी दौड़ते हुए भी पढ़ सके।"
यह कैसा मज़ेदार है! परमेश्वर चाहते थे कि सब लोग उनकी बात पढ़ सकें। जल्दी से। आसानी से।
परमेश्वर ने कहा, "यह बात ज़रूर पूरी होगी। भले ही देर लगे। पर रुको। मत छोड़ो। यह ज़रूर होगी। इसमें देर नहीं होगी।"
इसका क्या अर्थ है?
परमेश्वर ने एक और बात कही। बहुत सुंदर बात।
उन्होंने कहा, "जो सच्चा है, वह मुझ पर भरोसा रखकर जीएगा।"
फिर परमेश्वर ने उन लोगों की बात की जो घमंडी थे। जो दूसरों का धन छीनते थे। जो पत्थर की मूरतें बनाते थे और उनसे कहते थे, "उठो! जागो!"
पर पत्थर तो बोल नहीं सकता। मूरत तो चल नहीं सकती। उसमें जान ही नहीं है।
परमेश्वर हँसे नहीं, दुखी हुए। उन्होंने कहा, "हाय उन पर।"
फिर परमेश्वर ने एक बड़ी, प्यारी बात कही:
"पृथ्वी मेरी महिमा के ज्ञान से भर जाएगी। जैसे समुद्र पानी से भरा है।"
क्या तुमने कभी समुद्र देखा है? पानी ही पानी, दूर तक। ऐसे ही परमेश्वर की भलाई हर जगह फैलेगी।
सूत्र
परमेश्वर ने कहा, "धर्मी अपने विश्वास से जीएगा।"
यह बात यीशु के बारे में भी है। हम परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं। जैसे हबक्कूक ने रखा। जैसे मीनार पर खड़ा वह आदमी।
यीशु हमें दिखाते हैं, परमेश्वर पर भरोसा करना कितना अच्छा है।
तुम्हारे लिए
अंत में परमेश्वर ने कहा, "मैं अपने पवित्र मंदिर में हूँ। सारी पृथ्वी चुप रहे मेरे सामने।"
चुप रहना। जैसे रात में, जब तुम सोने जाते हो। शांत। चुप।
क्या तुम भी कभी चुप बैठ सकते हो? और परमेश्वर की बात सुन सकते हो? जैसे हबक्कूक ने सुनी?
आपस में बात करो
क्या तुम कभी बहुत देर तक इंतज़ार करते हो? कैसा लगता है?
हबक्कूक मीनार पर चुपचाप खड़ा था। तुम कब चुप रह सकते हो?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, आप बहुत बड़े हैं। हम आप पर भरोसा रखेंगे। जब इंतज़ार करना पड़े, तब भी। हमें चुप रहना सिखाइए। और आपकी आवाज़ सुनना सिखाइए। आमीन।
हबक्कूक 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
हबक्कूक 2 किस विषय में है?
हबक्कूक 2 क्या कहता है?
हबक्कूक 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे हबक्कूक 2 से क्या सीख सकते हैं?
हबक्कूक 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हबक्कूक चिल्ला रहा था, "कब तक?" और परमेश्वर ने तुरंत बाबेल को नहीं हटाया। उसने बस इतना कहा, "देख, उसका मन फूला हुआ है, उसमें सिधाई नहीं है; परन्तु धर्मी अपने विश्वास से जीवित रहेगा।"
ध्यान दे, विश्वास यहाँ कोई भावना नहीं, ठहरने की ताकत है। जब उत्तर देर से आता है, तब तेरा जीना ही तेरा विश्वास बन जाता है। आज तू किस अनुत्तरित प्रार्थना के बीच खड़ा रहना सीख रहा है?
उस पर हाय, जो हत्या करके नगर को बनाता, और कुटिलता करके गढ़ को दृढ़ करता है!" बाबेल की दीवारें ऊँची थीं, पर उनकी नींव में दूसरों का खून था। परमेश्वर इमारत नहीं, नींव देखता है। अपने बनाए हुए को एक बार फिर देखो, तुम्हारी तरक्की में किसी के आँसू तो नहीं मिले? जो दूसरों को गिराकर खड़ा किया जाता है, वह टिकता नहीं।
बाबेल अपने भव्य नगर पर इतरा रहा था, और परमेश्वर ने कहा, "क्या सेनाओं के यहोवा की ओर से यह नहीं होता कि देश देश के लोग परिश्रम करके अग्नि का ईंधन ही हो जाते हैं, और राज्य राज्य के लोग व्यर्थ ही थक जाते हैं?" जो दूसरों के आँसुओं पर खड़ा किया जाता है, वह आग का ईंधन बनता है। अपनी मेहनत को एक बार जाँच लो, तुम किसकी नींव पर चिन रहे हो?
हाय उस पर, जो अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाता है, और उसमें विष मिलाकर उसे मतवाला कर देता है कि उसको नंगा देखे!" बाबेल का पाप सिर्फ लूटना नहीं था, दूसरों को गिराकर उनकी शर्म का तमाशा देखना था। आज भी यही होता है, बस प्याले का रूप बदल गया है। किसी की कमज़ोरी जानकर तुम उसे ढाँपते हो या औरों को दिखाते हो? परमेश्वर वहाँ खड़ा है, जहाँ कोई नंगा किया जा रहा है।
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