3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

यूहन्ना 12

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

शाम हो रही थी। बैतनिय्याह नाम के एक छोटे गाँव में। एक घर में दीया जल रहा था। अंदर खाना तैयार था। गरम रोटी की खुशबू आ रही थी। मार्था प्लेटें ला रही थी। लाज़र मेज़ पर बैठा था। और यीशु भी वहीं बैठे थे।

फिर मरियम अंदर आई। धीरे धीरे। उसके हाथों में एक छोटी बोतल थी। उसमें बहुत, बहुत महँगा इत्र था। मरियम झुकी। उसने वह सारा इत्र यीशु के पैरों पर डाला। फिर अपने लंबे बालों से उनके पैर पोंछे।

और तब पूरा घर महक उठा। कोने कोने तक खुशबू फैल गई।

एक आदमी को यह अच्छा नहीं लगा। उसका नाम यहूदा था। वह बोला, "इतना महँगा इत्र! क्यों डाल दिया?" पर यीशु ने कहा, "उसे रहने दो।" मरियम ने बहुत अच्छा किया था। उसने यीशु को अपनी सबसे कीमती चीज़ दी।

इसका क्या अर्थ है?

अगली सुबह हुई। यीशु यरूशलेम शहर की ओर चले। और लोगों ने सुना, "यीशु आ रहे हैं!"

तब लोग दौड़े। बहुत सारे लोग। उन्होंने खजूर की हरी डालियाँ तोड़ीं। बड़ी बड़ी, हरी हरी डालियाँ। वे उन्हें हवा में हिलाने लगे।

और वे ज़ोर से पुकारने लगे, "होशाना! होशाना!" इसका मतलब है, "हमें बचाइए!"

यीशु कैसे आए? बड़े घोड़े पर? नहीं। एक छोटे गधे के बच्चे पर। धीरे धीरे, शांति से। यीशु राजा हैं। पर बहुत नरम राजा। ऐसे राजा जिनके पास तुम बिना डरे जा सकते हो।

जोड़ने वाला धागा

बहुत, बहुत साल पहले परमेश्वर ने कहा था, "मत डर। तेरा राजा गधे के बच्चे पर आ रहा है।" और अब वह सच हो गया। यीशु आ गए।

यीशु ने कहा, "मैं रोशनी हूँ।" जैसे रात में दीया जलता है। तब अंधेरा भाग जाता है। तुम्हें रास्ता दिखता है।

यीशु ने यह भी कहा, "मैं किसी को डाँटने नहीं आया। मैं बचाने आया हूँ।" वे इसीलिए आए थे।

तुम्हारे लिए

मरियम ने यीशु को इत्र दिया। लोगों ने हरी डालियाँ हिलाईं। और तुम?

तुम अपने हाथ ऊपर उठा सकते हो। हिलाओ, जैसे खजूर की डालियाँ! और गाओ, "होशाना! यीशु राजा हैं!"

तुम यीशु को अपना सबसे सुंदर चित्र दे सकते हो। या अपना सबसे प्यारा गाना। यीशु खुश होते हैं। ठीक वैसे, जैसे उस महकते घर में।

और जब रात को अंधेरा हो? तब याद रखो। यीशु रोशनी हैं। वे तुम्हारे पास हैं।

इस पर बात करें

तुम यीशु को क्या देना चाहोगे?

अगर तुम उस भीड़ में होते, तो क्या पुकारते?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु, आप राजा हैं। नरम राजा, गधे के बच्चे पर। होशाना! आप रोशनी हैं। जब अंधेरा हो, आप मेरे पास रहिए। मैं आपको अपना दिल देता हूँ। आमीन।

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यूहन्ना 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यूहन्ना 12 किस विषय में है?
शाम हो रही थी। बैतनिय्याह नाम के एक छोटे गाँव में। एक घर में दीया जल रहा था। अंदर खाना तैयार था। गरम रोटी की खुशबू आ रही थी। मार्था प्लेटें ला रही थी। लाज़र मेज़ पर बैठा था। और यीशु भी वहीं बैठे थे।
यूहन्ना 12 क्या कहता है?
अगली सुबह हुई। यीशु यरूशलेम शहर की ओर चले। और लोगों ने सुना, "यीशु आ रहे हैं!"
यूहन्ना 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु कैसे आए? बड़े घोड़े पर? नहीं। एक छोटे गधे के बच्चे पर। धीरे धीरे, शांति से। यीशु राजा हैं। पर बहुत नरम राजा। ऐसे राजा जिनके पास तुम बिना डरे जा सकते हो।
नन्हे बच्चे यूहन्ना 12 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु ने यह भी कहा, "मैं किसी को डाँटने नहीं आया। मैं बचाने आया हूँ।" वे इसीलिए आए थे।
यूहन्ना 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम यीशु को अपना सबसे सुंदर चित्र दे सकते हो। या अपना सबसे प्यारा गाना। यीशु खुश होते हैं। ठीक वैसे, जैसे उस महकते घर में।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

खजूर की डालियाँ काटना आसान था। रास्ते में बिछाना, ऊँची आवाज़ में पुकारना, "हे इस्राएल के राजा!" यह सब मुफ़्त था। पर उसी हफ़्ते वही सड़कें खाली हो गईं, और वही राजा अकेला क्रूस तक चला।

अपने आप से पूछ: मैं यीशु की जय बोल रहा हूँ, या उस यीशु की जो मेरी उम्मीदों के हिसाब से चले? भीड़ में गाना सस्ता है। पीछे चलना महँगा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 45

यीशु ने यह बात पुकारकर कही, ठीक उस समय जब लोग उन्हें ठुकरा रहे थे: "जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजनेवाले को देखता है।" सोचो, परमेश्वर कैसा है यह जानने के लिए तुम्हें आकाश की ओर टकटकी नहीं लगानी है। यीशु के चेहरे को देखो, जो रोते हैं, छूते हैं, क्षमा करते हैं। तुम्हारे मन में परमेश्वर की जो तस्वीर है, क्या वह यीशु जैसी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

फिलिप्पुस अकेले यीशु के पास नहीं जाता। वह पहले अन्द्रियास को बताता है, और फिर दोनों मिलकर जाते हैं। यूनानी लोग यीशु से मिलना चाहते थे, पर फिलिप्पुस झिझका। शायद उसे लगा कि यह निर्णय अकेले लेना कठिन है।

क्या तुम्हारे जीवन में कोई अन्द्रियास है? कोई जिसके साथ चलकर तुम यीशु के पास किसी को ला सको? कभी कभी विश्वास अकेले नहीं, संगति में मजबूत होता है।

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