7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यूहन्ना 12

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

छः दिन बाद फसह का पर्व था। यीशु बैतनिय्याह के एक घर में खाने बैठे हैं, और उनके साथ मेज़ पर लाज़र बैठा है, वही लाज़र जिसे कुछ ही समय पहले उन्होंने कब्र से बुलाया था। ज़रा सोचो: एक आदमी जो मर चुका था, अब रोटी तोड़ रहा है। मार्था सेवा कर रही है, जैसा वह हमेशा करती है।

और तब मरियम कुछ ऐसा करती है जिससे पूरा कमरा चुप हो जाता है। वह जटामासी का आधा सेर बहुमूल्य इत्र लाती है, उसे यीशु के पाँवों पर उलट देती है और अपने बालों से उनके पाँव पोंछती है। घर की हवा में सुगन्ध भर जाती है। यहूदा इस्करियोती कहता है कि यह पैसों की बरबादी है, तीन सौ दीनार गरीबों को दिए जा सकते थे। सुनने में यह बात नेक लगती है। पर यूहन्ना हमें साफ़ बताता है कि यहूदा को गरीबों की चिन्ता नहीं थी, वह थैली में से चोरी करता था। यीशु मरियम का बचाव करते हैं: "उसे मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रहने दे।" यीशु जानते हैं कि वे मरने जा रहे हैं। मरियम शायद पूरी तरह नहीं जानती, पर उसका प्रेम ठीक समय पर आया।

बाहर भीड़ इकट्ठी हो रही है। लोग यीशु को देखना चाहते हैं और लाज़र को भी। और प्रधान याजक क्या सोचते हैं? वे लाज़र को भी मार डालने की सम्मति करते हैं। ईश्वर के चमत्कार का जवाब वे और मौत से देना चाहते हैं। यह कठोर सच है, और यूहन्ना उसे छिपाता नहीं।

अगले दिन यीशु यरूशलेम में आते हैं। लोग खजूर की डालियाँ लेकर निकलते हैं और चिल्लाते हैं, "होशाना! धन्य इस्राएल का राजा।" वे एक ऐसे राजा की आशा कर रहे हैं जो रोमियों को भगा देगा। लेकिन यीशु घोड़े पर नहीं, गदहे के बच्चे पर बैठकर आते हैं। चेले तब यह नहीं समझे; बाद में उन्हें समझ आया कि यह पहले से लिखा हुआ था।

कुछ यूनानी लोग फिलिप्पुस से कहते हैं, "हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं।" यीशु का उत्तर अजीब लगता है। वे गेहूँ के दाने की बात करते हैं: दाना अकेला पड़ा रहे तो अकेला ही रहता है, पर ज़मीन में गिरकर मर जाए तो बहुत फल लाता है। वे अपनी मौत की बात कर रहे हैं। और फिर वे कहते हैं, "अब मेरा जी व्याकुल हो रहा है।" यीशु डरते नहीं छिपाते। वे सचमुच घबराते हैं, और फिर भी पीछे नहीं हटते। आकाश से आवाज़ आती है, पर कुछ लोगों को वह बादल की गरज लगती है।

अन्त में यीशु पुकारकर कहते हैं कि वे ज्योति बनकर आए हैं, और वे जगत को दोषी ठहराने नहीं, बचाने आए हैं।

इसका क्या अर्थ है?

इस अध्याय में दो गन्ध हैं: इत्र की मीठी सुगन्ध और मौत की छाया। दोनों एक ही घर में हैं।

मरियम ने जो किया वह हिसाब से बेतुका था। इतना कीमती इत्र, एक ही बार में। पर प्रेम कैलकुलेटर से नहीं चलता। और ध्यान दो: यहूदा की बात ज़्यादा समझदार लगती थी। अच्छी लगने वाली बातें कहना और अच्छा दिल रखना, ये दो अलग चीज़ें हैं।

एक बात मुश्किल है। पद 40 कहता है कि परमेश्वर ने उनकी आँखें अंधी और मन कठोर किया। मैं तुम्हें ईमानदारी से बताता हूँ: यह मुझे भी पूरी तरह समझ नहीं आता। यूहन्ना उसी सांस में यह भी लिखता है कि कई लोगों ने विश्वास किया, पर डर के कारण खुलकर नहीं माना, क्योंकि उन्हें लोगों की प्रशंसा परमेश्वर की प्रशंसा से प्यारी लगी। परमेश्वर के रहस्य और इंसान की ज़िम्मेदारी, दोनों यहाँ साथ खड़े हैं। तुम्हारे सवाल यहाँ गलत नहीं हैं।

जोड़ने वाला धागा

यीशु गदहे पर बैठे, यह संयोग नहीं था। सदियों पहले लिखा था: "हे सिय्योन की बेटी, मत डर; देख, तेरा राजा गदहे के बच्चे पर चढ़ा हुआ चला आता है।" परमेश्वर का वादा पूरा हो रहा था, पर उस तरह नहीं जैसा लोगों ने सोचा था।

यीशु कहते हैं कि जब वे "ऊँचे पर चढ़ाए" जाएँगे, तब सबको अपने पास खींचेंगे। यूहन्ना समझाता है कि यह क्रूस की बात है। यही परमेश्वर की बड़ी कहानी का धागा है: वह राजा जो जीतने के लिए मरता है, वह दाना जो ज़मीन में गिरकर बहुत फल लाता है।

तुम्हारे लिये

तुम्हारी उम्र में लोग क्या सोचते हैं, यह बहुत मायने रखने लगता है। इसीलिए वे यहूदी सरदार तुमसे इतने दूर नहीं हैं। वे यीशु पर विश्वास करते थे, मगर चुपचाप, क्योंकि खुलकर मानना महँगा पड़ता।

तो एक सवाल: क्या तुम्हारे स्कूल में या दोस्तों के बीच कोई जानता है कि तुम यीशु के पीछे चलते हो? और मरियम की तरह, क्या कुछ ऐसा है जो तुम्हारे लिए कीमती है और जो तुम उन्हें देना चाहोगे, तुम्हारा समय, तुम्हारा हुनर, तुम्हारा पैसा?

इस पर बात करो

यहूदा की बात सुनने में सही लगी, पर उसका दिल सही नहीं था। हम कैसे पहचानें कि हमारा दिल सचमुच सही है?

यीशु कहते हैं, "अब मेरा जी व्याकुल हो रहा है।" तुम्हें यह जानकर कैसा लगता है कि यीशु भी घबराए थे?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु, आप गदहे पर बैठकर आए, नम्र और सच्चे राजा। धन्यवाद कि आप दोषी ठहराने नहीं, बचाने आए। मेरे सवालों को सुन लीजिए, और मुझे इतनी हिम्मत दीजिए कि मैं दूसरों के डर से आपको छिपाऊँ नहीं। आमीन।

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यूहन्ना 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यूहन्ना 12 किस विषय में है?
छः दिन बाद फसह का पर्व था। यीशु बैतनिय्याह के एक घर में खाने बैठे हैं, और उनके साथ मेज़ पर लाज़र बैठा है, वही लाज़र जिसे कुछ ही समय पहले उन्होंने कब्र से बुलाया था। ज़रा सोचो: एक आदमी जो मर चुका था, अब रोटी तोड़ रहा है। मार्था सेवा कर रही है, जैसा वह हमेशा करती है।
यूहन्ना 12 क्या कहता है?
अगले दिन यीशु यरूशलेम में आते हैं। लोग खजूर की डालियाँ लेकर निकलते हैं और चिल्लाते हैं, "होशाना! धन्य इस्राएल का राजा।" वे एक ऐसे राजा की आशा कर रहे हैं जो रोमियों को भगा देगा। लेकिन यीशु घोड़े पर नहीं, गदहे के बच्चे पर बैठकर आते हैं। चेले तब यह नहीं समझे; बाद में उन्हें समझ आया कि यह पहले से लिखा हुआ था।
यूहन्ना 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
इस अध्याय में दो गन्ध हैं: इत्र की मीठी सुगन्ध और मौत की छाया। दोनों एक ही घर में हैं।
बच्चे यूहन्ना 12 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु गदहे पर बैठे, यह संयोग नहीं था। सदियों पहले लिखा था: "हे सिय्योन की बेटी, मत डर; देख, तेरा राजा गदहे के बच्चे पर चढ़ा हुआ चला आता है।" परमेश्वर का वादा पूरा हो रहा था, पर उस तरह नहीं जैसा लोगों ने सोचा था।
यूहन्ना 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तो एक सवाल: क्या तुम्हारे स्कूल में या दोस्तों के बीच कोई जानता है कि तुम यीशु के पीछे चलते हो? और मरियम की तरह, क्या कुछ ऐसा है जो तुम्हारे लिए कीमती है और जो तुम उन्हें देना चाहोगे, तुम्हारा समय, तुम्हारा हुनर, तुम्हारा पैसा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

खजूर की डालियाँ काटना आसान था। रास्ते में बिछाना, ऊँची आवाज़ में पुकारना, "हे इस्राएल के राजा!" यह सब मुफ़्त था। पर उसी हफ़्ते वही सड़कें खाली हो गईं, और वही राजा अकेला क्रूस तक चला।

अपने आप से पूछ: मैं यीशु की जय बोल रहा हूँ, या उस यीशु की जो मेरी उम्मीदों के हिसाब से चले? भीड़ में गाना सस्ता है। पीछे चलना महँगा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 45

यीशु ने यह बात पुकारकर कही, ठीक उस समय जब लोग उन्हें ठुकरा रहे थे: "जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजनेवाले को देखता है।" सोचो, परमेश्वर कैसा है यह जानने के लिए तुम्हें आकाश की ओर टकटकी नहीं लगानी है। यीशु के चेहरे को देखो, जो रोते हैं, छूते हैं, क्षमा करते हैं। तुम्हारे मन में परमेश्वर की जो तस्वीर है, क्या वह यीशु जैसी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

फिलिप्पुस अकेले यीशु के पास नहीं जाता। वह पहले अन्द्रियास को बताता है, और फिर दोनों मिलकर जाते हैं। यूनानी लोग यीशु से मिलना चाहते थे, पर फिलिप्पुस झिझका। शायद उसे लगा कि यह निर्णय अकेले लेना कठिन है।

क्या तुम्हारे जीवन में कोई अन्द्रियास है? कोई जिसके साथ चलकर तुम यीशु के पास किसी को ला सको? कभी कभी विश्वास अकेले नहीं, संगति में मजबूत होता है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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