योना 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बड़ी मछली थी। बहुत बड़ी। उसके पेट में योना था। अंदर अंधेरा था। बहुत गीला भी। योना डरा हुआ था।
चारों तरफ पानी था। ऊपर पानी, नीचे पानी। लहरें उस पर से बहती गईं। एक के बाद एक। योना के सिर में सिवार लिपट गया था। गीला, चिपचिपा सिवार।
योना सोचता था, "क्या मैं फिर मंदिर देख पाऊँगा?" उसका दिल घबराया। पानी उसके गले तक आ गया था। साँस लेना कठिन हो गया था।
तब योना ने कुछ किया। उसने आँखें बंद की। उसने यहोवा को याद किया।
इसका मतलब क्या है?
योना ने पुकारा, "यहोवा, मेरी सुन लो!" धीरे से नहीं। पेट के अंदर से। अंधेरे में से।
और यहोवा ने सुन ली। सच में सुन ली। योना अंधेरे में अकेला नहीं था। परमेश्वर वहाँ भी उसके पास थे।
योना ने कहा, "आपने मेरे प्राणों को गड्ढे में से उठाया।" वह रोया। फिर धीरे धीरे शांत हुआ। उसने कहा, "मैं आपको धन्यवाद दूँगा।"
एक ही सूत्र
योना गहरे पानी में गया। बहुत गहरे। फिर वह बाहर आया, जीवित। यीशु भी एक दिन गहरे में गए। मरकर कब्र में। फिर वे भी बाहर आए, जीवित। परमेश्वर ने दोनों को बचाया।
तुम्हारे लिए
कभी तुम भी डरते हो। अंधेरे में, या जब कुछ बुरा होता है। तब तुम भी कह सकते हो, "परमेश्वर, मेरी सुन लो!" वे तुम्हें भी सुनते हैं, जैसे उन्होंने योना को सुना।
योना ने कहा, "उद्धार यहोवा ही से होता है।" इसका मतलब है, परमेश्वर बचाते हैं। हम खुद को नहीं बचा सकते।
फिर क्या हुआ? यहोवा ने मछली से बात की। मछली ने योना को बाहर थूक दिया। सूखी जमीन पर! योना फिर से रेत पर खड़ा हुआ। सूरज की रोशनी में। ताज़ी हवा में। वह मुस्कुराया।
बात करते हैं
योना अंधेरे में था। तुम्हें कब अंधेरा लगता है?
योना ने परमेश्वर को पुकारा। तुम कब परमेश्वर को पुकार सकते हो?
मिलकर प्रार्थना करें
प्रभु, आप मेरी सुनते हैं। जैसे आपने योना की सुनी। जब मैं डरूँ, तो मुझे याद दिलाइए। आप मेरे पास हैं। आमीन।
योना 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योना 2 किस विषय में है?
योना 2 क्या कहता है?
योना 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे योना 2 से क्या सीख सकते हैं?
योना 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जल ने मुझे यहाँ तक घेर लिया कि मेरे प्राण निकलने लगे; गहरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था।"
योना को सिर पर लिपटी सिवार तक याद है। डूबते हुए आदमी को ऐसी छोटी बात याद रहती है, क्योंकि वहीं उसकी आँखें खुलीं। तेरी सबसे गहरी जगह भी इतनी गहरी नहीं कि वहाँ से प्रार्थना ऊपर न पहुँचे। मछली के पेट से निकली आवाज़ भी परमेश्वर सुनता है।
मछली के पेट के अँधेरे में योना कहता है, "जो व्यर्थ मूरतों पर मन लगाते हैं, वे अपने करुणानिधान को छोड़ देते हैं।" पर सोच, यह बात वह अपने ही बारे में कह रहा है। उसकी मूरत पत्थर की नहीं थी, उसकी अपनी ज़िद थी, यह सोच कि नीनवे दया के लायक नहीं। तेरी वह ज़िद कौन सी है, जो तुझे परमेश्वर की करुणा से दूर खींच रही है?
मछली के पेट में बैठकर योना कहता है, "मैंने अपने संकट के कारण यहोवा की दुहाई दी, और उसने मेरी सुन ली।" ध्यान दे, वह अभी बाहर नहीं आया है। हालात नहीं बदले, पर वह जानता है कि उसकी आवाज़ सुनी गई। कभी-कभी परमेश्वर का पहला उत्तर बाहर निकलना नहीं, बल्कि यह भरोसा होता है कि अंधेरे में भी तेरी पुकार अनसुनी नहीं गई। तू अभी किस पेट के भीतर से पुकार रहा है?
मछली के पेट में, अंधेरे में, योना कहता है, "जब मेरा प्राण मूर्छित होने लगा, तब मैंने यहोवा को स्मरण किया।" ध्यान दे, उसे परमेश्वर तब याद आया जब सब खत्म होने लगा। शर्म की बात? हो सकता है। पर देख, वहाँ से उठी प्रार्थना भी मंदिर तक पहुँच गई। तेरी देर से की गई पुकार भी उसके कानों तक पहुँचती है।
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