3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

यहूदा 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

सुनो, एक कहानी। बहुत समय पहले एक आदमी था। उसका नाम था यहूदा। यहूदा प्रभु यीशु से बहुत प्रेम करता था।

यहूदा दूर रहता था। उसके दोस्त और दूर रहते थे। वह उनसे मिल नहीं सकता था। तो यहूदा ने क्या किया? उसने एक चिट्ठी लिखी।

वह मेज पर बैठा। उसने कागज़ लिया। उसने कलम ली। और वह लिखने लगा।

"मेरे प्यारे दोस्तों," उसने लिखा। "परमेश्वर आपसे बहुत प्रेम करते हैं। प्रभु यीशु आपको सम्भाल कर रखते हैं। जैसे एक पिता अपने बच्चे को गोद में रखता है। ऐसे ही।"

यहूदा मुस्कुराया। वह और लिखने लगा। "परमेश्वर की दया आप पर हो। और शान्ति। और प्रेम। बहुत, बहुत ज़्यादा।"

What Does This Mean?

यहूदा की चिट्ठी में एक बहुत सुन्दर बात है। सुनो ध्यान से।

परमेश्वर आपको प्यार करते हैं। बहुत। बहुत बहुत।

और प्रभु यीशु? वे आपको कस के पकड़े रहते हैं। जैसे माँ का हाथ। जब आप चलते हैं, माँ का हाथ पकड़े रहती हैं ना? गिरने नहीं देती।

प्रभु यीशु भी ऐसे ही करते हैं। वे आपको सम्भालते हैं। हर दिन। हर रात।

The Common Thread

परमेश्वर की एक बहुत बड़ी कहानी है। इस बड़ी कहानी में एक नाम है। प्रभु यीशु।

प्रभु यीशु स्वर्ग से आए। छोटे बच्चे बनकर। फिर बड़े हुए। और उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारा हूँ। मैं तुम्हें सम्भालूँगा।"

यहूदा ने अपनी चिट्ठी में यही लिखा। "प्रभु यीशु आपको पकड़े हुए हैं।" और यह बात आज भी सच है। आपके लिए भी।

आप परमेश्वर के प्यारे बच्चे हैं। बुलाए हुए। चुने हुए। प्यार किए हुए।

For You

अपने हाथ को देखो। छोटे-छोटे हाथ।

अब सोचो। परमेश्वर के हाथ बहुत बड़े हैं। बहुत, बहुत बड़े। और उन बड़े हाथों में आप हैं। सुरक्षित।

जब रात को अन्धेरा होता है, परमेश्वर वहाँ हैं। जब आप खेलते हैं, परमेश्वर वहाँ हैं। जब आप खुश हैं, जब आप रोते हैं, परमेश्वर वहाँ हैं।

वे आपसे प्रेम करते हैं। बहुत। बहुत बहुत ज़्यादा।

यहूदा ने यही लिखा था। और यह बात हमेशा सच रहेगी।

Talk About It

परमेश्वर आपको कितना प्यार करते हैं, बताओ। हाथ फैला कर दिखाओ।

जब आप डरते हो, तब कौन आपको सम्भालता है?

Praying Together

प्यारे परमेश्वर, आप मुझे प्यार करते हैं। मैं जानता हूँ। आप मेरा हाथ पकड़े रहिए। हर दिन। हर रात। प्रभु यीशु, धन्यवाद। आमीन।

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यहूदा 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहूदा 1 किस विषय में है?
सुनो, एक कहानी। बहुत समय पहले एक आदमी था। उसका नाम था यहूदा। यहूदा प्रभु यीशु से बहुत प्रेम करता था।
यहूदा 1 क्या कहता है?
यहूदा मुस्कुराया। वह और लिखने लगा। "परमेश्वर की दया आप पर हो। और शान्ति। और प्रेम। बहुत, बहुत ज़्यादा।"
यहूदा 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
प्रभु यीशु भी ऐसे ही करते हैं। वे आपको सम्भालते हैं। हर दिन। हर रात।
नन्हे बच्चे यहूदा 1 से क्या सीख सकते हैं?
यहूदा ने अपनी चिट्ठी में यही लिखा। "प्रभु यीशु आपको पकड़े हुए हैं।" और यह बात आज भी सच है। आपके लिए भी।
यहूदा 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब रात को अन्धेरा होता है, परमेश्वर वहाँ हैं। जब आप खेलते हैं, परमेश्वर वहाँ हैं। जब आप खुश हैं, जब आप रोते हैं, परमेश्वर वहाँ हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

यहूदा उन्हें चौंकाता नहीं, याद दिलाता है: "अन्तिम दिनों में ऐसे उपहास करनेवाले होंगे, जो अपनी अभक्ति की अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।" ध्यान दे, उपहास पहले दिल की चाह से जन्मता है, फिर तर्क बनता है। जो हँसी तुझे आज चुभती है, वह तेरे विश्वास के टूटने का चिन्ह नहीं, बल्कि पहले से कहे गए वचन का पूरा होना है। तू अकेला नहीं, और तू अचंभित होने की जरूरत नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

यहूदा ने झूठे शिक्षकों के बारे में कड़ी बातें लिखने के बाद पाठकों को "हे प्रियो" कहकर पुकारा और कहा, "उन बातों को स्मरण रखो जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरितों ने पहले कही हैं।" कोई नई भविष्यवाणी नहीं, बस याद रखना। जो तुझे पहले ही बताया गया था, वही तुझे डगमगाने से बचाएगा। सवाल यह है, क्या तू भूल गया है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो" (यहूदा 1:21)। ध्यान दे, यहूदा यह नहीं कहता कि परमेश्वर का प्रेम कमाओ। वह प्रेम तो बह ही रहा है। बात सिर्फ इतनी है कि तू उसमें ठहरा रहे। धूप की तरह है यह, सूरज बुझता नहीं, पर हम खुद छाँव में सरक जाते हैं। आज तू कहाँ खड़ा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

यहूदा कुछ और लिखना चाहता था। उद्धार की उस साझी खुशी पर, जिसमें हम सब सहभागी हैं। पर उसने कलम रोक दी और लिखा, "उस विश्वास के लिये पूरा यत्न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था।" कभी कभी प्रेम मीठी बातें छोड़कर ज़रूरी बात कहता है। यह विश्वास तुम्हारी अपनी खोज नहीं, किसी ने तुम्हारे हाथ में सौंपा है। तुम उसे किसके हाथ में सौंप रहे हो?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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