3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

न्यायियों 14

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

शिमशोन एक जवान आदमी था। बहुत मजबूत। एक दिन वह तिम्नाह के रास्ते पर चला। धूप तेज़ थी। धरती गरम थी। वहाँ दाख की बारी थी। अंगूर के पेड़, हरे और घने। अचानक… एक जवान शेर कूदा। उसने बहुत तेज़ गरजा। शिमशोन का दिल तेज़ धड़का। पर वह भागा नहीं। परमेश्वर की शक्ति उस पर उतरी। जोर से उतरी। उसके हाथ में कुछ नहीं था। कोई तलवार नहीं, कोई डंडा नहीं। फिर भी उसने शेर को फाड़ दिया। जैसे कोई छोटा बकरी का बच्चा फाड़े। शिमशोन ने यह किसी को नहीं बताया। न अपनी माँ को, न अपने पिता को। यह उसका राज़ रहा।

कुछ दिन बाद वह फिर उस रास्ते से गया। उसने शेर की लोथ देखी। उसमें मधुमक्खियाँ भिनभिना रही थीं। और वहाँ मधु भी था। पीला, चिपचिपा, मीठा मधु। उसने थोड़ा मधु निकाला। चखा। कितना मीठा था! वह चलते-चलते खाता गया। अपने माता पिता को भी थोड़ा दिया। उन्होंने भी खाया। पर उन्हें नहीं पता था, यह कहाँ से आया।

फिर शिमशोन का विवाह हुआ। उसकी शादी में बड़ा भोज हुआ। मेज़ पर खाना, रोटी की खुशबू, हँसी की आवाज़। तीस दोस्त वहाँ आए, उसके साथ बैठने के लिए। शिमशोन ने उनसे एक पहेली कही: "खानेवाले में से खाना निकला। बलवन्त में से मीठी वस्तु निकली।" दोस्त सोचते रहे। सोचते रहे। दिन बीतते गए। पर उन्हें उत्तर नहीं मिला।

इसका क्या मतलब है?

दोस्त गुस्सा हुए। उन्होंने उत्तर जानना चाहा। उन्होंने शिमशोन की पत्नी को डराया। उसे धमकाया। वह रोई। बहुत रोई। दिन भर रोती रही। उसने शिमशोन से मिन्नत की, "मुझे बता दो, मुझे बता दो।" आखिर शिमशोन ने उसे पहेली का अर्थ बता दिया। उसने यह जल्दी से अपने दोस्तों को बता दिया। शिमशोन को यह जानकर बहुत गुस्सा आया। फिर परमेश्वर की शक्ति फिर से उस पर उतरी। जोर से, मजबूत करके।

परमेश्वर ने शिमशोन को ताकत दी। शेर से लड़ने की ताकत। यह ताकत शिमशोन की अपनी नहीं थी। यह परमेश्वर की ओर से आई थी। हर बार।

बड़ी कहानी से जोड़ कर

शिमशोन अकेला नहीं लड़ा। परमेश्वर उसके साथ था, चुपचाप, पर पूरी ताकत से। बहुत बाद में, एक और नाम आया: यीशु। यीशु के पास भी बड़ी शक्ति थी। उनकी शक्ति भी परमेश्वर से आई। यीशु ने सबसे बड़े दुश्मन को हराया। मौत को भी। शिमशोन ने शेर को अपने हाथों से हराया। यीशु ने मौत को हराकर फिर से जी उठे। दोनों के साथ परमेश्वर था। भले कोई न देखे।

तुम्हारे लिए

तुम भी कभी डरते हो? अंधेरे कमरे से? बड़े कुत्ते से? तेज़ आवाज़ से? परमेश्वर तुम्हारे साथ भी है। जैसे वे शिमशोन के साथ थे। तुम उसे देख नहीं सकते, पर वे पास हैं। जब तुम डरो, परमेश्वर से बात करो। वे सुनते हैं।

बात करें

क्या तुम्हें लगता है शिमशोन डरा होगा, जब शेर गरजा? तुम कब डरते हो, और तब तुम क्या करते हो?

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, आपने शिमशोन को ताकत दी, जब वह डरा हुआ था। जब मैं डरूँ, आप मेरे पास रहिए। मुझे भी थोड़ी हिम्मत दीजिए। आमीन।

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न्यायियों 14 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

न्यायियों 14 किस विषय में है?
शिमशोन एक जवान आदमी था। बहुत मजबूत। एक दिन वह तिम्नाह के रास्ते पर चला। धूप तेज़ थी। धरती गरम थी। वहाँ दाख की बारी थी। अंगूर के पेड़, हरे और घने। अचानक... एक जवान शेर कूदा। उसने बहुत तेज़ गरजा। शिमशोन का दिल तेज़ धड़का। पर वह भागा नहीं। परमेश्वर की शक्ति उस पर उतरी। जोर से उतरी। उसके हाथ में कुछ नहीं था। कोई तलवार नहीं, कोई डंडा नहीं। फिर भी उसने शेर को फाड़ दिया। जैसे कोई छोटा बकरी का बच्चा फाड़े। शिमशोन ने यह किसी को नहीं बताया। न अपनी माँ को, न अपने पिता को। यह उसका राज़ रहा।
न्यायियों 14 क्या कहता है?
फिर शिमशोन का विवाह हुआ। उसकी शादी में बड़ा भोज हुआ। मेज़ पर खाना, रोटी की खुशबू, हँसी की आवाज़। तीस दोस्त वहाँ आए, उसके साथ बैठने के लिए। शिमशोन ने उनसे एक पहेली कही: "खानेवाले में से खाना निकला। बलवन्त में से मीठी वस्तु निकली।" दोस्त सोचते रहे। सोचते रहे। दिन बीतते गए। पर उन्हें उत्तर नहीं मिला।
न्यायियों 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने शिमशोन को ताकत दी। शेर से लड़ने की ताकत। यह ताकत शिमशोन की अपनी नहीं थी। यह परमेश्वर की ओर से आई थी। हर बार।
नन्हे बच्चे न्यायियों 14 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी कभी डरते हो? अंधेरे कमरे से? बड़े कुत्ते से? तेज़ आवाज़ से? परमेश्वर तुम्हारे साथ भी है। जैसे वे शिमशोन के साथ थे। तुम उसे देख नहीं सकते, पर वे पास हैं। जब तुम डरो, परमेश्वर से बात करो। वे सुनते हैं।
न्यायियों 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, आपने शिमशोन को ताकत दी, जब वह डरा हुआ था। जब मैं डरूँ, आप मेरे पास रहिए। मुझे भी थोड़ी हिम्मत दीजिए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

शिमशोन का पहला दर्ज किया गया वाक्य है, "तिम्ना में मैंने एक पलिश्ती स्त्री को देखा है; इसलिए अब उससे मेरा ब्याह करा दो।" न कोई प्रार्थना, न कोई सवाल। बस देखा, और चाहा। और कहानी के अंत में पलिश्ती उसी की आँखें निकाल लेते हैं। जो आँख परमेश्वर से नहीं पूछती, वही आँख एक दिन सबसे महँगी पड़ती है। आज तेरी चाहत कहाँ से जन्म ले रही है, देखने से या माँगने से?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

शिमशोन की पत्नी के सामने कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया था। "हम तुझे तेरे पिता के घराने समेत आग में जला देंगे।" जो लोग पहेली नहीं बूझ सके, उन्होंने अपनी हार का बोझ एक डरी हुई स्त्री पर डाल दिया। सोचो, तुम्हारे ऊपर जो दबाव आज पड़ रहा है, कहीं वह किसी और की नाकामी का बोझ तो नहीं? और जो दबाव तुम किसी पर डाल रहे हो, वह किसका है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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