मरकुस 11
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक छोटा गधा था। कभी किसी ने उस पर सवारी नहीं की थी। यीशु ने अपने दो चेलों से कहा, "जाओ, उसे लाओ।" चेले गए। उन्होंने गधे को खोला और यीशु के पास लाए।
लोगों ने अपने कपड़े रास्ते पर बिछा दिए। कुछ लोगों ने पेड़ों की डालियाँ काटी। उन्होंने भी रास्ते पर फैला दीं। नरम, हरी डालियाँ। सब लोग खुश थे।
यीशु गधे पर बैठे। और लोग चिल्लाने लगे, "होशाना!" वे आगे चलते थे। वे पीछे चलते थे। सब मिलकर पुकारते थे, "धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है।" कितना शोर था। कितनी खुशी थी।
इसका क्या अर्थ है?
यीशु यरूशलेम गए। वहाँ एक बड़ा मन्दिर था। परमेश्वर का घर। यीशु मन्दिर में गए। उन्होंने देखा, वहाँ लोग पैसे का लेन-देन कर रहे थे। यह ठीक नहीं था।
यीशु ने कहा, "मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा।" यीशु ने मेजें उलट दीं। वे चाहते थे कि मन्दिर फिर से शांत हो। फिर से प्रार्थना का घर हो।
रास्ते में एक अंजीर का पेड़ था। पत्ते थे, पर फल नहीं था। यीशु ने कहा, "अब कोई फल न खाए।" चेलों ने सुना। अगले दिन वह पेड़ सूख गया था। पूरी तरह सूखा।
पतरस बहुत हैरान हुआ। उसने कहा, "देखिए, यह पेड़ सूख गया!" यीशु ने कहा, "परमेश्वर पर विश्वास रखो।"
सामान्य सूत्र
यीशु गधे पर बैठकर आए। जैसे एक राजा आता है। पर यह राजा नम्र था। छोटा गधा, बड़ा राजा। लोग "होशाना" चिल्लाए, क्योंकि यीशु ही वह राजा थे जिनकी बात परमेश्वर ने पहले से कही थी।
यीशु ने कहा, प्रार्थना करते समय दूसरों को क्षमा करना चाहिए। जैसे स्वर्ग में पिता हमें क्षमा करते हैं। यीशु स्वयं वह मार्ग हैं, जिससे हम परमेश्वर से बात कर सकते हैं।
तुम्हारे लिए
क्या तुम कभी किसी से नाराज़ होते हो? यीशु कहते हैं, क्षमा करना अच्छा है। जैसे परमेश्वर हमें क्षमा करते हैं।
आज तुम भी कह सकते हो, "होशाना, यीशु आ रहे हैं।" तुम अपने घर में भी उनके लिए जगह बना सकते हो। जैसे मन्दिर परमेश्वर का घर था, वैसे ही तुम्हारा दिल भी उनके लिए जगह हो सकता है।
बातचीत के लिए: तुम्हें क्या लगता है, लोग यीशु को देखकर क्यों खुश हुए? क्या तुम किसी को क्षमा कर सकते हो, जैसे परमेश्वर हमें क्षमा करते हैं?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि यीशु आए। हम भी कहते हैं, होशाना। हमें क्षमा करना सिखाइए। आमीन।
मरकुस 11 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मरकुस 11 किस विषय में है?
मरकुस 11 क्या कहता है?
मरकुस 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे मरकुस 11 से क्या सीख सकते हैं?
मरकुस 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यीशु ने न सिर्फ़ बेचने वालों को निकाला, बल्कि "मन्दिर में से किसी को कोई वस्तु ले जाने न दिया।" लोग मन्दिर के आँगन को छोटा रास्ता बना बैठे थे, सामान उठाकर बीच से निकल जाते। कोई पाप नहीं, बस सुविधा। और यीशु ने उसे भी रोक दिया। सोचो, परमेश्वर की उपस्थिति क्या तुम्हारे लिए भी बस गुज़र जाने की जगह बन गई है?
मन्दिर की मेज़ें उलट दी गईं, और अगुवों का पहला सवाल यह नहीं था कि क्या यह सही था। उन्होंने पूछा, "तू ये काम किस अधिकार से करता है? और यह अधिकार तुझे किसने दिया कि तू ये काम करे?" यानी, तेरा प्रमाणपत्र कहाँ है। सच्चाई से ज़्यादा उन्हें अपनी जगह की चिंता थी। कभी सोचो, जब यीशु तुम्हारे भीतर कुछ उलटते हैं, तो तुम झुकते हो या उनसे उनका हक़ पूछते हो?
मंदिर साफ करने के बाद अगुवे पूछते हैं, तू किस अधिकार से यह करता है? यीशु कहते हैं, "मैं भी तुम से एक बात पूछता हूँ; मुझे उत्तर दो, तो मैं तुम्हें बताऊँगा कि मैं ये काम किस अधिकार से करता हूँ।" वे जवाब देने से बचते हैं, क्योंकि सच्चाई उन्हें महँगी पड़ती। सोचिए, आपके सवालों के पीछे भी क्या कोई सवाल छिपा है जिसका उत्तर आप देना नहीं चाहते?
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