मत्ती 5
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
एक दिन यीशु एक बड़े पहाड़ पर चढ़ गए। सूरज चमक रहा था। बहुत से लोग यीशु के पीछे-पीछे आए। बच्चे भी। माँएँ भी। दादा-दादी भी। सब यीशु को देखना चाहते थे। सब यीशु की बात सुनना चाहते थे।
यीशु पहाड़ पर बैठ गए। लोग चारों ओर बैठ गए। बहुत शांति हो गई। सब चुप। और फिर यीशु बोलने लगे। उनकी आवाज़ धीमी और प्यारी थी।
"धन्य हैं वे लोग," यीशु ने कहा, "जो छोटे बनकर परमेश्वर के पास आते हैं। धन्य हैं वे, जो रोते हैं। परमेश्वर उन्हें गले लगाएँगे। धन्य हैं वे, जो दयालु हैं। धन्य हैं वे, जिनका मन साफ़ है। वे परमेश्वर को देखेंगे।"
लोग सुनते रहे। यीशु की बातें बहुत अच्छी थीं।
फिर यीशु ने कहा, "तुम जानते हो नमक क्या करता है? नमक खाने को स्वादिष्ट बनाता है। तुम नमक की तरह हो! और तुम जानते हो दीया क्या करता है? दीया अंधेरे में रोशनी देता है। तुम दीये की तरह हो! अपनी रोशनी सब को दिखाओ।"
What Does This Mean?
यीशु ने और भी कहा। "एक दूसरे से प्यार करो। गुस्सा मत करो। अगर किसी से झगड़ा हो, तो जल्दी से जाकर कहो: मुझे माफ़ करो। हाँ कहो जब हाँ हो। ना कहो जब ना हो। हमेशा सच बोलो।"
फिर यीशु ने कुछ बहुत खास कहा। "अपने दुश्मन से भी प्यार करो। जो तुम्हें दुःख देता है, उसके लिए प्रार्थना करो।"
लोग एक दूसरे को देखने लगे। यह तो मुश्किल है! पर यीशु ने कहा, "देखो, स्वर्गीय पिता कितने अच्छे हैं। वे सब पर सूरज चमकाते हैं। अच्छे लोगों पर भी, और बुरे लोगों पर भी। वे सब पर बारिश भेजते हैं। तुम भी अपने पिता की तरह बनो।"
The Common Thread
यीशु स्वयं ऐसे ही थे। यीशु का मन साफ़ था। यीशु ने सब से प्यार किया। छोटे बच्चों से भी। बीमार लोगों से भी। यीशु दीये की तरह चमके। यीशु नमक की तरह थे।
और यीशु आज भी हमारे पास हैं। यीशु हमारी मदद करते हैं कि हम भी दीये की तरह चमकें।
For You
क्या तुमने कभी दीया देखा है? दीया छोटा होता है। पर वह अंधेरे कमरे में सब कुछ रोशन कर देता है!
यीशु कहते हैं: तुम भी दीये हो। जब तुम अपनी माँ की मदद करते हो, तुम चमकते हो। जब तुम अपने भाई या बहन को गले लगाते हो, तुम चमकते हो। जब तुम किसी को माफ़ करते हो, तुम चमकते हो।
तुम्हारी छोटी सी रोशनी बहुत सुंदर है। परमेश्वर उसे देखकर खुश होते हैं।
Talk About It
दीया कहाँ-कहाँ रोशनी देता है? तुम कहाँ रोशनी दे सकते हो?
आज तुम किसके साथ प्यार से बात करोगे?
Praying Together
प्यारे परमेश्वर, आप बहुत अच्छे हैं। मुझे एक छोटा दीया बनाइए। मुझे प्यार करना सिखाइए। यीशु के नाम से, आमीन।
मत्ती 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मत्ती 5 किस विषय में है?
मत्ती 5 क्या कहता है?
मत्ती 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे मत्ती 5 से क्या सीख सकते हैं?
मत्ती 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
What strikes me most about the Sermon on the Mount is not the content but the listeners. No rabbis, no scribes, just fishermen and beggars and the sick. Jesus gave his deepest teaching to people nobody took seriously. That comforts me whenever I feel too small for the Kingdom again.
जो कोई तुझसे माँगे, उसे दे; और जो तुझसे उधार लेना चाहे, उससे मुँह न मोड़।"
ध्यान दे, यीशु यह नहीं कहते कि कितना दे। वे हाथ की नहीं, चेहरे की बात करते हैं। क्योंकि हम अक्सर पैसे से पहले अपनी नज़रें छिपा लेते हैं, सुनने से पहले ही भीतर से मुकर जाते हैं।
आज किसी की ज़रूरत तुझ तक आए, तो पहले उसकी आँखों में देख। देना उसके बाद आसान लगेगा।
यीशु ने "बाईं" नहीं, "दाहिनी आँख" कहा। यानी वह जो सबसे कीमती है, जिस पर तू सबसे ज़्यादा भरोसा करता है। पाप हमें कभी बेकार चीज़ों से नहीं, अपनी प्रिय चीज़ों से फँसाता है। "उसे निकालकर अपने पास से फेंक दे।" सोच, आज तेरे हाथ में वह क्या है जिसे तू छोड़ना नहीं चाहता, पर जो तुझे धीरे-धीरे परमेश्वर से दूर खींच रहा है?
यीशु के समय पत्नी को त्यागपत्र देना आसान था, और छोड़ी गई स्त्री के पास न सहारा था, न सम्मान। इसलिए यीशु कहते हैं, "जो कोई अपनी पत्नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से छोड़ दे, तो वह उससे व्यभिचार करवाता है।" दोष उस पर डाला गया जिसने छोड़ा। क्या तेरे रिश्तों में भी कोई है जिसे तूने सुविधा से छोड़ दिया, और परमेश्वर उसका दर्द अब भी देख रहा है?
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें