3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

मीका 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बहुत अंधेरी रात। तारे भी छिपे हुए थे। हवा भी शांत थी। कुछ लोग अपने बिछौनों पर लेटे थे। बिछौने नरम थे। पर उनके मन बुरे थे। वे सो नहीं रहे थे। वे बुरी-बुरी बातें सोच रहे थे। "कल हम वह खेत छीन लेंगे," एक ने मन में कहा। "कल हम वह घर ले लेंगे," दूसरे ने सोचा।

सुबह हुई। सूरज निकला, बड़ा और चमकीला। और उन लोगों ने वही किया जो उन्होंने रात में सोचा था। वे दूसरों के खेत छीन लेते थे। वे दूसरों के घर छीन लेते थे। एक पिता का घर छिन गया। एक बच्चे का घर छिन गया।

छोटे-छोटे बच्चों के पास जो अच्छी चीज़ें थीं, वे भी छीन ली गईं। माँओं को उनके अपने घरों से बाहर निकाल दिया गया। बच्चे रोते थे। किसी ने उन्हें नहीं बचाया। यह बहुत उदास करने वाली बात थी।

परमेश्वर ने यह सब देखा। रात में भी। दिन में भी। परमेश्वर कुछ भी नहीं भूलते।

इसका क्या मतलब है?

परमेश्वर ने कहा, "मैं यह देख रहा हूँ।" उन्होंने कहा कि अब मुसीबत का समय आएगा। जिन लोगों ने दूसरों से चीज़ें छीनीं, वे खुद भी दुखी होंगे। परमेश्वर को अच्छा नहीं लगता जब कोई किसी और की चीज़ छीन ले। परमेश्वर को अच्छा नहीं लगता जब कोई किसी बच्चे को दुखी करे। यह परमेश्वर को दुख देता है। परमेश्वर अपने लोगों से प्यार करते हैं। इसलिए वे चुप नहीं रहे।

बड़ी कहानी की कड़ी

पर परमेश्वर ने एक और बात भी कही। एक बहुत सुंदर बात। उन्होंने कहा, "मैं तुम सबको इकट्ठा करूँगा।" जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों को इकट्ठा करता है, वैसे ही परमेश्वर अपने लोगों को इकट्ठा करेंगे। सबको साथ लाएँगे। एक अच्छी चराई में ले जाएँगे। वहाँ घास हरी-हरी होगी। वहाँ पानी ठंडा होगा। वहाँ डर नहीं होगा।

और सबसे सुंदर बात यह थी: उनका राजा उनके आगे-आगे चलेगा। परमेश्वर खुद उनका अगुआ होंगे। वे फाटक खोलेंगे। वे रास्ता दिखाएँगे। कोई अकेला नहीं चलेगा। परमेश्वर सबसे आगे चलेंगे।

यह ठीक वैसे ही है जैसे बाद में प्रभु यीशु आए। वे भी एक अच्छे चरवाहे की तरह हैं। वे भी अपनी भेड़ों को जानते हैं। वे भी अपने लोगों के आगे-आगे चलते हैं।

तुम्हारे लिए

जब तुम्हारे पास कोई खिलौना हो, क्या तुम उसे किसी दोस्त से छीनते हो? परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक-दूसरे को दुखी न करें। परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक-दूसरे को अपना दें, छीनें नहीं। परमेश्वर तुमसे भी प्यार करते हैं।

और जब तुम डरो, याद रखना: परमेश्वर आगे-आगे चलते हैं। तुम अकेले नहीं हो। वे तुम्हारा हाथ थामे हुए हैं।

बातचीत करें

जब किसी ने तुमसे कुछ छीना, तब तुम्हें कैसा लगा था?

परमेश्वर अपने लोगों को कैसे इकट्ठा करते हैं, जैसे कौन?

साथ मिलकर प्रार्थना करें

हे परमेश्वर, आप सब कुछ देखते हैं, रात में भी, दिन में भी। हमें एक-दूसरे से प्यार करना सिखाइए। हमें छीनना नहीं, बल्कि बाँटना सिखाइए। धन्यवाद कि आप हमारे आगे-आगे चलते हैं। आमेन।

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मीका 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मीका 2 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बहुत अंधेरी रात। तारे भी छिपे हुए थे। हवा भी शांत थी। कुछ लोग अपने बिछौनों पर लेटे थे। बिछौने नरम थे। पर उनके मन बुरे थे। वे सो नहीं रहे थे। वे बुरी-बुरी बातें सोच रहे थे। "कल हम वह खेत छीन लेंगे," एक ने मन में कहा। "कल हम वह घर ले लेंगे," दूसरे ने सोचा।
मीका 2 क्या कहता है?
छोटे-छोटे बच्चों के पास जो अच्छी चीज़ें थीं, वे भी छीन ली गईं। माँओं को उनके अपने घरों से बाहर निकाल दिया गया। बच्चे रोते थे। किसी ने उन्हें नहीं बचाया। यह बहुत उदास करने वाली बात थी।
मीका 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने कहा, "मैं यह देख रहा हूँ।" उन्होंने कहा कि अब मुसीबत का समय आएगा। जिन लोगों ने दूसरों से चीज़ें छीनीं, वे खुद भी दुखी होंगे। परमेश्वर को अच्छा नहीं लगता जब कोई किसी और की चीज़ छीन ले। परमेश्वर को अच्छा नहीं लगता जब कोई किसी बच्चे को दुखी करे। यह परमेश्वर को दुख देता है। परमेश्वर अपने लोगों से प्यार करते हैं। इसलिए वे चुप नहीं रहे।
नन्हे बच्चे मीका 2 से क्या सीख सकते हैं?
और सबसे सुंदर बात यह थी: उनका राजा उनके आगे-आगे चलेगा। परमेश्वर खुद उनका अगुआ होंगे। वे फाटक खोलेंगे। वे रास्ता दिखाएँगे। कोई अकेला नहीं चलेगा। परमेश्वर सबसे आगे चलेंगे।
मीका 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम्हारे पास कोई खिलौना हो, क्या तुम उसे किसी दोस्त से छीनते हो? परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक-दूसरे को दुखी न करें। परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक-दूसरे को अपना दें, छीनें नहीं। परमेश्वर तुमसे भी प्यार करते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

वे खेतों का लालच करके उन्हें छीन लेते हैं, और घरों का लालच करके उन्हें ले लेते हैं; और वे पुरुष और उसके घराने पर, और पुरुष और उसके निज भाग पर अंधेर करते हैं।"

इस्राएल में खेत सिर्फ ज़मीन नहीं था, वह परमेश्वर का दिया हुआ भाग था। उसे छीनना एक परिवार को उसके हिस्से से काट देना था।

लालच रात को बिस्तर पर जागता है और सुबह हाथ बढ़ा देता है। आज तुम्हारा मन किसकी चीज़ पर टिका है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

जो लोग दूसरों के खेत नापकर हड़प रहे थे, अब वही विलाप करते हैं, "हम पूरी रीति से नष्ट हो गए हैं।" जिस डोरी से उन्होंने गरीबों की ज़मीन नापी थी, उसी से एक दिन उनकी ज़मीन बँट गई। ठहरकर सोच, तेरे हाथ में आज ऐसा कुछ है जो किसी और के आँसुओं से आया हो? परमेश्वर उन आँसुओं की गिनती रखता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

जिन्होंने दूसरों के खेत हड़प लिए, उन्हीं के हाथ से नापने की डोरी छीन ली गई। "इस कारण तेरा कोई ऐसा न होगा जो यहोवा की मण्डली में चिट्ठी डालकर भूमि को बाँटे।" इस्राएल में ज़मीन खरीदी नहीं जाती थी, परमेश्वर उसे बाँटता था। जो दूसरे का हिस्सा दबा लेता है, वह चुपचाप अपना ही हिस्सा खो बैठता है। जो तेरे पास है, क्या वह सचमुच तेरा दिया हुआ हिस्सा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

भविष्यद्वाणी न करो!" यही उनकी मांग थी। खेत हड़पने वाले लोग परमेश्वर की चेतावनी नहीं, चुप्पी चाहते थे। ज़रा सोच, तेरे भीतर भी कोई ऐसी आवाज़ है जिसे तू दबा देता है? वह उपदेश जो चुभता है, वह वचन जिसे पढ़कर तू जल्दी से आगे बढ़ जाता है। सच बोलने वाले को चुप कराने से पाप मिटता नहीं, थोड़ी देर के लिए छिप जाता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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