3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

गिनती 23

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक राजा था। उसका नाम बालाक था। वह बहुत डरा हुआ था।

उसने एक आदमी को बुलाया। उसका नाम बिलाम था। बालाक ने कहा, "इस्राएल के लोगों को श्राप दे दो।"

बिलाम पहाड़ पर गया। उसने सात वेदियाँ बनवाईं। एक, दो, तीन, सात तक। हर वेदी पर एक बछड़ा और एक मेढ़ा चढ़ाया।

फिर परमेश्वर बिलाम से मिले। चुपचाप। धीरे से।

बालाक इंतज़ार कर रहा था। वह अपने होमबलि के पास खड़ा था। वह सोच रहा था, "अब श्राप सुनूँगा।"

पर जब बिलाम लौटा, तो उसके मुँह से कुछ और निकला।

इसका क्या मतलब है?

बिलाम ने कहा, "मैं उन्हें श्राप कैसे दूँ? जिन्हें परमेश्वर ने श्राप नहीं दिया!"

बालाक चौंक गया। वह बोला, "तूने क्या किया? मैंने तुझे श्राप देने बुलाया था!"

बिलाम ने कहा, "जो परमेश्वर कहते हैं, वही मुझे बोलना पड़ता है।"

बालाक हार नहीं माना। वह बिलाम को एक और पहाड़ पर ले गया। फिर सात वेदियाँ। फिर सात बछड़े, सात मेढ़े।

पर फिर से वही हुआ। परमेश्वर ने बिलाम के मुँह में आशीष की बात डाली।

बिलाम ने कहा, "परमेश्वर झूठ नहीं बोलते। वे इंसान नहीं हैं कि अपनी बात बदल दें। जो कहा, वही करेंगे।"

बालाक ने तीसरी बार कोशिश की। एक और पहाड़। सात वेदियाँ फिर से। सात बछड़े, सात मेढ़े फिर से।

सूत्र

परमेश्वर ने बहुत पहले इस्राएल के लोगों से एक वादा किया था। "मैं तुम्हें आशीष दूँगा।"

बालाक राजा था। उसके पास सेना थी। उसके पास पैसा था। पर वह परमेश्वर का वादा नहीं बदल सका।

कोई भी राजा, कोई भी श्राप, परमेश्वर की बात को नहीं बदल सकता। परमेश्वर जो कहते हैं, वही होता है। हमेशा।

यीशु भी ऐसे ही हैं। परमेश्वर ने उन्हें भेजने का वादा किया था। कोई भी उस वादे को रोक नहीं सका।

तेरे लिए

कभी-कभी कोई तुझे डराने की कोशिश करे। कोई कहे, "परमेश्वर तुझसे प्यार नहीं करते।"

पर याद रखना, परमेश्वर जो कहते हैं वही सच है। वे झूठ नहीं बोलते। वे अपनी बात नहीं बदलते।

जैसे बिलाम के मुँह से आशीष ही निकली, वैसे ही परमेश्वर का प्यार तेरे लिए भी सच है।

बातचीत के लिए

बालाक चाहता था कि बिलाम क्या करे?

परमेश्वर ने बिलाम के मुँह से क्या कहलवाया?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप झूठ नहीं बोलते। जो आप कहते हैं, वही करते हैं। मुझे भी आप पर भरोसा करना सिखाएँ। धन्यवाद कि आप मुझसे प्यार करते हैं। आमीन।

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गिनती 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

गिनती 23 किस विषय में है?
उसने एक आदमी को बुलाया। उसका नाम बिलाम था। बालाक ने कहा, "इस्राएल के लोगों को श्राप दे दो।"
गिनती 23 क्या कहता है?
बालाक चौंक गया। वह बोला, "तूने क्या किया? मैंने तुझे श्राप देने बुलाया था!"
गिनती 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बिलाम ने कहा, "परमेश्वर झूठ नहीं बोलते। वे इंसान नहीं हैं कि अपनी बात बदल दें। जो कहा, वही करेंगे।"
नन्हे बच्चे गिनती 23 से क्या सीख सकते हैं?
कोई भी राजा, कोई भी श्राप, परमेश्वर की बात को नहीं बदल सकता। परमेश्वर जो कहते हैं, वही होता है। हमेशा।
गिनती 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जैसे बिलाम के मुँह से आशीष ही निकली, वैसे ही परमेश्वर का प्यार तेरे लिए भी सच है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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